हरियाणा पीडब्ल्यूडी कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन की आपात एवं महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को निर्माण सदन, सेक्टर-33, चंडीगढ़ में आयोजित हुई। बैठक में प्रदेशभर के पीडब्ल्यूडी ठेकेदारों के लंबित भुगतान सहित विभिन्न समस्याओं पर गंभीरता से चर्चा की गई। बैठक में 618 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया।
एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक जैन, प्रधान भगवान और वाइस प्रेसिडेंट मनोज चहल ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि ठेकेदार विभाग द्वारा सौंपे गए निर्माण कार्यों को निर्धारित समय में पूरा कर रहे हैं। जब ठेकेदार अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए समय पर काम पूरा कर सकते हैं तो उनके काम का भुगतान भी निर्धारित समय के अनुसार क्यों नहीं किया जा रहा?
अशोक जैन ने कहा, हमारे 618 करोड़ रुपये का बकाया यदि आज मिल जाता है तो ठीक है, वरना ठेकेदार विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि ठेकेदार अपनी पूंजी लगाकर सड़कों, भवनों और अन्य सरकारी विकास कार्यों को पूरा करते हैं। काम पूरा होने के बाद भुगतान में लगातार देरी होने से ठेकेदारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। बैंक ब्याज, कर्मचारियों की तनख्वाह, मजदूरों का भुगतान, मशीनरी और अन्य खर्च भी उन्हें अपनी जेब से वहन करने पड़ रहे हैं।
एसोसिएशन पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार और विभाग ठेकेदारों से गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध काम की अपेक्षा करते हैं और ठेकेदार भी अपनी जिम्मेदारी पूरी करते हैं। ऐसे में भुगतान के मामले में भी समयबद्ध व्यवस्था लागू होनी चाहिए। ठेकेदारों ने सवाल उठाया कि यदि काम में देरी होने पर ठेकेदारों से जवाब मांगा जाता है, तो भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदारी और जवाबदेही तय क्यों नहीं की जाती?
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यदि 618 करोड़ रुपये के लंबित भुगतान को लेकर तत्काल ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो ठेकेदार आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। पदाधिकारियों ने कहा कि ठेकेदार सरकार के साथ टकराव नहीं चाहते, लेकिन लगातार भुगतान लंबित रहने की स्थिति में उनके सामने विरोध प्रदर्शन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
बैठक के उपरांत प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें एसोसिएशन ने लंबित भुगतान, ठेकेदारों की आर्थिक परेशानियों और आगामी आंदोलन की रणनीति को लेकर मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखा और 3031.56 cr की सप्लीमेंट्री बजट की मांग को त्वरित रूप से पारित किया जाए ताकि 31 मार्च तक सभी लंबित कार्य पूर्ण किए जा सकें।