प्रदेश में अब शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी क्रांति आने वाली है। राज्य भर में 31 मार्च तक अधिकतर डे-बोर्डिंग स्कूलों के कार्यों को धरातल पर युद्ध स्तर पर शुरू किए जाने के निर्देश प्रदेश सरकार की ओर से जारी कर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की ओर से सरकारी क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने के लिए महत्त्वपूर्ण पहल की गई है। इसके तहत सरकार की ओर से 94.46 करोड़ रुपए जारी भी किए जा चुके हैं। इसी कड़ी में सबसे बड़े जिला कांगड़ा के मुख्यालय धर्मशाला में स्थित ब्वायज स्कूल में बन रहे डे-बोर्डिंग स्कूल को भी पहले चरण के तहत पांच करोड़ का बजट मिल चुका है। अब धर्मशाला सहित प्रदेश के अधिकतर जिलों में कंसल्टेंसी कंपनी हायर कर स्कूल को तैयार करने के लिए मेगा प्लान बनाया जा रहा है। इसमें बड़ी बात यह है कि प्रदेश सरकार की ओर से आगामी शैक्षणिक सत्र में डे-बोर्डिंग स्कूलों में कक्षाएं शुरू करने की योजना है।
राज्य सरकार ने राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूलों को जल्द से जल्द स्थापित करने के लिए 94.46 करोड़ रुपए की राशि पहले ही जारी कर दी है। अब राज्य में चयनित 42 स्कूलों में 31 मार्च से पहले धरातल में कार्य करने के दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। राज्य में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में ऐसा स्कूल स्थापित किया जाएगा और अब तक राज्य भर में 42 स्थानों की पहचान की जा चुकी है। इन स्कूलों में अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने में ये महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
यहां काम की तैयारी
कांगड़ा जिला में धर्मशाला, जयसिंहपुर, पालमपुर, नगरोटा बगवां, फतेहपुर, ज्वालामुखी, शाहपुर, इंदौरा व देहरा, बिलासपुर में हटवार, चंबा में भटियात, किलाड़ और बनीखेत, हमीरपुर में अमलेहर, कोहडऱा, करहा, चमियाना खास और हमीरपुर, कुल्लू में पिराडी मोहल, किन्नौर में उर्नी और रिकांगपिओ, लाहुल-स्पीति के केलांग, काजा और दारचा, मंडी में सरकाघाट व जोगिंद्रनगर, शिमला के ठियोग, सुन्नी और सरस्वती नगर, सिरमौर में सतौन, ऊना के अंब, बंगाणा, संघनाई और बदेहरा, सोलन के कल्याणपुर, ममलीग, दाड़लाघाट, कुनिहार, अर्की और कंडाघाट में डे-बोर्डिंग स्कूल का कार्य शुरू करने की तैयारी की जा रही है।