चंडीगढ़ : अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्लूसी) की सदस्य, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि भाजपा सरकार के 12 वर्षों का वास्तविक मूल्यांकन देश की माताओं और बहनों के रसोईघरों में किया जा सकता है। भाजपा ने पिछले 12 वर्षों में जनता को बड़े-बड़े वादे और सपने दिखाकर गुमराह करने का काम किया है। उज्ज्वला योजना को गरीब महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाने और स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने की योजना के रूप में प्रस्तुत किया गया था, लेकिन आज बढ़ती गैस कीमतों और घटती सुविधाओं ने करोड़ों गरीब परिवारों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। कुमारी सैलजा ने कहा कि भाजपा सरकार ने गरीब परिवारों को सस्ते गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने तथा महिलाओं को चूल्हे के धुएं से राहत दिलाने का वादा किया था, लेकिन समय के साथ इन दावों की वास्तविकता सामने आ गई। पहले 12 सिलेंडरों की बात हुई, फिर संख्या घटकर 9 तक पहुंची और अब केवल 4 सिलेंडरों तक सीमित होने की स्थिति सामने आ रही है। इससे गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। सांसद ने कहा कि गैस सिलेंडरों की लगातार बढ़ती कीमतों ने घरेलू बजट को पूरी तरह प्रभावित किया है। रसोई का खर्च बढ़ने से लाखों परिवार गैस सिलेंडर रिफिल कराने में असमर्थ हो रहे हैं। अनेक ग्रामीण और गरीब परिवारों की महिलाएं फिर से लकड़ी, उपलों और पारंपरिक चूल्हों का सहारा लेने को मजबूर हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि किसी भी योजना की सफलता का आकलन केवल सरकारी विज्ञापनों और आंकड़ों से नहीं, बल्कि उसके वास्तविक लाभार्थियों के जीवन में आए बदलाव से किया जाता है। यदि करोड़ों परिवार गैस रिफिल नहीं करवा पा रहे और महिलाएं फिर से धुएं में खाना बनाने को विवश हैं, तो यह सरकार की नीतियों की विफलता का स्पष्ट प्रमाण है। कुमारी सैलजा ने कहा कि भाजपा सरकार ने पिछले 12 वर्षों में महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ते घरेलू खर्च से आम जनता को राहत देने के बजाय केवल प्रचार पर ध्यान केंद्रित किया है। आज रसोई गैस से लेकर दैनिक उपयोग की अधिकांश वस्तुओं के दाम बढ़ चुके हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग का जीवन कठिन होता जा रहा है।
कुमारी सैलजा ने मांग की कि केंद्र सरकार रसोई गैस पर वास्तविक राहत प्रदान करे, उज्ज्वला लाभार्थियों को पर्याप्त सहायता दे तथा ऐसी नीतियां बनाए जिससे गरीब परिवारों की रसोई पर पड़ रहा आर्थिक बोझ कम हो सके। उन्होंने कहा कि देश की माताओं और बहनों को केवल वादों की नहीं, बल्कि वास्तविक राहत की आवश्यकता है।