मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार को कहा कि हिमाचल सरकार ने मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) के तहत 8,000 टन से ज्यादा सेब खरीदे हैं, जबकि अब तक 17,000 से ज्यादा किसानों ने एचपीएमआईएस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया है। उन्होंने कहा, "एचपीएमसी और हिमफेड द्वारा चलाए जा रहे 213 सेब कलेक्शन सेंटर्स (ACC) के जरिए 1 अगस्त, 2026 से शुरू हुई यह खरीद प्रक्रिया 21 अक्टूबर, 2026 तक जारी रहेगी।"
सुक्खू ने यहां जारी एक प्रेस बयान में कहा कि इस सीजन में एक बड़ा सुधार एचपीएमआईएस के जरिए एमआईएस ऑपरेशन्स का पूरी तरह से डिजिटाइजेशन है। इस सिस्टम में किसानों का रजिस्ट्रेशन, खरीद, डिजिटल रसीदें, ट्रांसपोर्टेशन, प्रोसेसिंग, मॉनिटरिंग और पेमेंट शामिल है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बेहतर होती है। उन्होंने कहा, "एचपीएमआईएस (HPMIS) एंड्रॉयड और आईओएस एप्लिकेशन पर उपलब्ध है और किसानों के लिए एक बार रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी कर दिया गया है। इस साल रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसानों को आने वाले सालों में दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने की ज़रूरत नहीं होगी और उन्हें बस एचपीएमआईएस पोर्टल के जरिए सेब जमा करने के बारे में संबंधित सेब कलेक्शन सेंटर को जानकारी देनी होगी।" किसान खुद रजिस्ट्रेशन करके, कॉमन सर्विस सेंटर्स/लोक मित्र केंद्रों या ग्राम पंचायतों की मदद से रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अकेले शिमला जिले में रजिस्ट्रेशन की सुविधा के लिए 681 लोक मित्र केंद्र उपलब्ध हैं।"
रजिस्ट्रेशन के बाद, किसानों को तय किए गए एप्पल कलेक्शन सेंटर्स पर सेब लाने होते हैं। एमआईएस के तहत ली गई मात्रा को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड किया जाता है और एचपीएमआईएस के जरिए एक रसीद बनाई जाती है। रसीद की एक कॉपी किसान को उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर/अकाउंट पर भेजी जाती है। स्कीम की शर्तों को पूरा करने और वेरिफिकेशन के बाद, MIS के तहत मिलने वाला पेमेंट सीधे किसान के रजिस्टर्ड बैंक अकाउंट में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिए भेजा जाता है। सुखू ने कहा, "इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे पक्का कर लें कि उनका मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट की जानकारी एचपीएमआईएस (HPMIS) में सही-सही रजिस्टर्ड हो।" उन्होंने सेब उत्पादकों को सलाह दी कि वे जल्द से जल्द अपना HPMIS रजिस्ट्रेशन पूरा कर लें, अपना मोबाइल नंबर और बैंक की जानकारी अपडेट रखें और सेब सिर्फ़ तय किए गए एप्पल कलेक्शन सेंटर्स पर ही जमा करें।
मुख्यमंत्री ने कहा, "किसानों को अपने रिकॉर्ड के लिए डिजिटल रूप से बनी रसीद संभालकर रखनी चाहिए और रजिस्ट्रेशन, खरीद या पेमेंट से जुड़ी किसी भी मुश्किल के मामले में मदद के लिए संबंधित ACC, HPMC, HIMFED, लोक मित्र केंद्र या ग्राम पंचायत से संपर्क करना चाहिए।"