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चंडीगढ़

हिंदी अध्यापिका मुक्ता शर्मा त्रिपाठी "मुक्तामणि-जीवन के सूत्र" विमोचित

24 सितंबर, 2025 06:43 PM

चंडीगढ़ : बटाला के एक स्कूल में हिन्दी अध्यापिका मुक्ता शर्मा त्रिपाठी की नई पुस्तक "मुक्तामणि-जीवन के सूत्र" का यहाँ चंडीगढ़ में एक समारोह के दौरान विमोचन किया गया। इस अवसर संजीव शर्मा, संयुक्त सचिव-शिक्षा विभाग मुख्य अतिथि सहित पारिवारिक सदस्य और मित्र भी मौजूद थे।

मुख्य अतिथि संजीव शर्मा ने मुक्ता शर्मा त्रिपाठी को उनकी बुक की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मुक्ता शर्मा त्रिपाठी जी शिक्षा के साथ साथ प्रेरणा से भरपूर किताबें भी निकाल रही है। यह बच्चों के मार्गदर्शन के लिए एक अच्छा प्रयास है। संजीव शर्मा ने कहा कि उन्होंने बुक पढ़ी है। बुक में बड़े ही प्रभावशाली प्रेरक प्रसंग है। जो जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर रोशनी डालते हैं।

उन्होंने बुक पढ़ी है
बुक के बारे में जानकारी देते हुए मुक्ता शर्मा त्रिपाठी ने बताया कि "मुक्तामणि" अर्थात् पवित्र तथा कीमती मोती। यह अनमोल होते हैं। एक जौहरी इसके भौतिक तथा आर्थिक महत्त्व के कारण परन्तु विद्वान वैचारिक महत्त्व के कारण पूजा करता है। मणि केवल गहने बनाने या उनमें जड़ाऊ मोती के रूप में शोभा प्राप्त करने के ही कार्य में नहीं आती।

उन्होंने आगे बताया कि प्रतीक रूप में मुक्ता-मणि का प्रयोग कई जगह पर किया जाता है। इस पुस्तक में भी मुक्तामणि का अर्थ वे बहुमूल्य विचार हैं, जो हमारे जीवन में प्रेरणा, उर्जा, सकारात्मक्ता तथा नवजीवन का संचार करें।


मुक्ता शर्मा त्रिपाठी ने आगे बताया कि "मुक्तामणि- जीवन के सूत्र" पुस्तक का आधार कोविड के दौरान ही रखा गया था। उस समय अपने विद्यार्थियों से बात न कर पाने की कमी खलती थी। चाहे ऑनलाइन कक्षाएँ लग रहीं थीं। परन्तु जो उनसे कक्षा में प्रेरक विचारों का आदान-प्रदान होता था, उस प्रवाह को जीवंत करने के लिए सोशल मीडिया पर रोज़ एक मुक्तामणि बच्चों के सम्बंधित चित्रों के माध्यम से भेजना शुरू किया। मेरे विद्यालय के विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों, मेरे साथी अध्यापकों, मेरे अपने बच्चों ने उसे बेहद पसंद किया, बेहद सराहा।
अमूर्त रूप में उस समय इस पुस्तक की आधारशिला रखने के बाद, आप सबकी शुभकामनाओं से अब ये स्वप्न मूर्त रूप में सत्य होने जा रहा है।

मेरे जीवन की सुख-दुःख की धूप-छाँव ने, विभिन्न धार्मिक ग्रंथों-पुस्तकों को पढ़ते हुए, जिस जीवन दर्शन ने मेरे दिल पर छाप छोड़ी, उसे मैं समेटना चाहती थी। अमर बनाना चाहती थी। अध्यापिका होने के नाते मेरे मन में आया कि मैं इन विचारों को अपने तक ही सीमित क्यों रखूँ? क्यों न अपने विद्यार्थियों के साथ भी इनको सांझा करूँ! अब मेरे सामने दो पथ थे। एक पथ कविता लेखन द्वारा इन विचारों को विद्यार्थियों तक पहुंचाने का, दूसरा ज्यों के त्यों जैसे ये विचार मुझ संग रहे, उन्हें व्यक्त करना। दूसरा पथ अधिक उपयुक्त लगा क्योंकि यह बिना घुमाए- फिराए सीधी बात करने का ही समय है।
आज के समय में नकारात्मक्ता के शोर में, सीधी बात करना ही श्रेयस्कर है। भावी पीढ़ी से बिना लाग-लपेट के सीधी बात करती ये मुक्तामणियाँ मेरे अनुभवों को कुछ शब्दों तथा संबंधित चित्रों संग उन तक पहुँचाने की कोशिश है। बाल मनोविज्ञान के अनुसार शब्दावली सरल मगर थोड़ा-सी प्रतीकात्मक रखी गई है ताकि हर उम्र के विद्यार्थी या बच्चे इससे जुड़ पाएँ।
उन्होंने बताया कि प्रस्तुत पुस्तक में मैंने 100 प्रेरक विचार अर्थात 100 मुक्तामणियों को समाहित किया है। इस पुस्तक का पंजाबी अनुवाद भी उपलब्ध है ताकि मेरे पंजाब के सभी विद्यार्थी, बच्चे इस पुस्तक तक पहुँच सकें।


▶️लेखिका-मुक्ता शर्मा त्रिपाठी के बारे में:-

मुक्ता शर्मा त्रिपाठी, हिन्दी अध्यापिका, अपने विद्यार्थियों संग बेहद अभिव्यंजक और बहिर्मुखी मगर व्यक्तिगत रूप में अपने कल्पना संसार के काव्य व्योम पथ पर चाँद और सूर्य की रौशनी संग चहचहाने वाली, उतनी ही अंतर्मुखी स्वभाव की हैं। लेखन का सफ़र उनके लिए नया नहीं है। घर में रौबदार मगर सामाजिक रूप से बेहद कम या कह लीजिए बिल्कुल न बोलने वाली, शर्माती, सकुचाती-सी, सम्मान का पात्र तो कभी नहीं अपितु मज़ाक का पात्र अक्सर बन जाती। लेखिका का मुक्ता नाम उनकी प्यारी विदुषी बुआ ने रखा, इतना सुंदर नाम होने के बावजूद उन्हें अकड़ू, पत्थर, भटूरे आदि की संज्ञा मिल जाती। परन्तु वे इतने में भी खुश हो जाती कि चलो नकारात्मक ही सही, वह कहीं तो अस्तित्व रखती हैं। कम सहेलियाँ पर पक्की वाली सहेलियाँ (जो कि अब तक साथ हैं) का निःस्वार्थ साथ तथा उनके नाना जी, नानी जी, दादा जी, सहेली-सी बुआ, दोनों छोटे भाईयों का साथ उनके व्यक्तित्व का वास्तविक सम्बल बना।


बचपन में जीवन दर्शन पर अपने विचार उड़ेलते, उनके ख़त जब उनके नाना जी को मिलते, वे खुश तो होते मगर चिंतित भी। परन्तु वही नाना जी को लिखे ख़त, इसी तरह दादा जी के साथ दैनिक बात-चीत, दादी जी द्वारा उपहार स्वरूप दी गई 'कल्याण' पुस्तक की प्रतियाँ, B.D. Arya College की लाइब्रेरी की ढेरों पुस्तकें, उनकी आरंभिक रचनाओं का आधार बनीं।
आरंभिक कविताओं में उनके हृदय का कोलाहल स्पष्ट सुनाई देता है। तकरीबन दसवीं कक्षा के बाद छोटी-छोटी रचनाओं से उन्होंने अपनी इस साहित्यिक यात्रा को आरंभ किया।
घर में अपने प्यारे दोस्त और गुरु अपने दादा जी से प्राप्त शाबाशी की बदौलत लेखिका की काव्य पौध पल्लवित-पुष्पित होकर कॉलेज (D.A.V. Anglo Vedic College, B. Ed College) के काव्य सम्मेलनों में अपना नाम बनाने लगी। उन काव्य सम्मेलनों में होशियारपुर के शिक्षण संस्थानों के शिक्षक गण तथा उनके कॉलेज के बस 1-2 साथी विद्यार्थी होते थे। आरंभ में कवि-सम्मेलनों में प्रस्तुति के नाम मात्र से ही वे इतनी भयाकुल हो जाती कि नाम वापिस लेने को मन करने लगता, मगर पिता जी (दादा जी) से एक मंत्र प्राप्त करने के बाद उनका डर मानो छू-मंतर हो गया। उनका कहना था कि पूरी तैयारी करो और जब मंच से बोलने लगो तो पक्का समझ लो कि इस हाल में क्या पूरी दुनिया में आपसे समझदार, विद्वान कोई नहीं! आत्मविश्वासी बनो, पर अगर अति आत्मविश्वासी बने, तो सारा राज़ खुल जाएगा।


फिर एम.ए. राजनीति शास्त्र, बी.एड की पढ़ाई के संग इस काव्य फुलवारी में नित-नई विभिन्न विषयों, उपविषयों की काव्य रचनाओं के बीज-वपन होने लगे। सत्य है कि जितना प्राप्त हो इस दिल के लिए उतना ही कम है और यही उनके साथ हुआ। बहुत सारे प्यार, शाबाशी की पवन हिलोर संग उनका मन एक पुस्तक प्रकाशित करवाने का स्वप्न देखने लगा।
मगर विधाता को कुछ और ही मंजूर था। अचानक दादा जी के स्वर्ग सिधारने के बाद उनकी कविताएँ गुम हो गईं। शादी हुई, बहुत अच्छी सास, मानो माँ यशोदा का सान्निध्य मिला। प्यार, अपनापन, हर तरह की आज़ादी मिली। उधर मायके की अलमारी में हस्तलिखित पांडुलिपियाँ शायद कवयित्री को अभी भी याद कर रही थीं। मगर कवयित्री तो अपने कर्तव्यों, परिवार, पुत्र, सुखद संसार में ख़ुद खोई हुई थी। क्योंकि यह सब कविता से ज़रूरी था।


क्या कविता मर गई थी? अरे! कविता भी कहीं मरती है। सुप्त अवस्था में भी वह बस इंतज़ार करती है, किसी साधन का। बेटे के दसवीं कक्षा करने के बाद लेखिका को अहसास हुआ कि समय ही समय है। ‘क्या करूँ इस समय का?’ क्योंकि बेटा समझदार हो चुका था तो जल्द ही मायके की अलमारियाँ खुलीं, कविताओं में छिपे शब्दों के बादल, कमरे में फैल गए और क़लम रूपी पंख मिलते ही ससुराल घर में, जैसे मुस्कराहट बिखर गई। पति देव के रूप में घर में ही समीक्षक भी मिल गए।


रचना की कच्ची मिट्टी तैयार होती, सांचा बनता, रूप गढ़ता और फिर उसे तराशने में उनके पति भी उनकी मदद करते। यूँ पूर्ण रूप प्राप्त रचनाएँ S.D. College, Hoshiarpur HOD हिन्दी विभाग में कार्यरत डॉ. अरविंद पराशर चाचा जी, PSEB Director हिन्दी विभाग परम आदरणीय डॉ. सुनिल बहल जी, गुलिस्ताँ मंच के निवातिया सर, आदरणीया अंजुला भदौरिया जी, राजनीति शास्त्र के लेक्चरार गुरमीत सर जी के कुशल मार्गदर्शन में काव्य सफ़र के इस दूसरे पड़ाव में और भी परिष्कृत होने लगीं।


अब समय जैसे ख़ुद कह रहा था कि बहुप्रतीक्षित पुस्तक का स्वप्न पूर्ण होने का पल आ गया है। ससुराल परिवार के पूर्ण समर्थन के फलस्वरूप उनके पति देव ने ही उनकी प्रथम पुस्तक 'पत्रं पुष्पं' हिन्दी काव्य संग्रह प्रकाशित करवाया। इस पुस्तक का PSEB Director हिन्दी विभाग परम आदरणीय डॉ. सुनिल बहल जी ने अपने कर-कमलों से विमोचन किया। उन्होंने इस पुस्तक की ख़ूब प्रशंसा की। यह पुस्तक Notion Publishing House पर Best seller किताबों में से एक रही। फलस्वरूप World Book Fair 2022 में इसका चुनाव भी हुआ तथा ख़ूब प्रशस्ति हासिल की। इसके बाद 'मन तों बोली मेरी माँ बोली'-पंजाबी काव्य संग्रह, 'काव्य बालवाड़ी' बाल पुस्तक तथा 15 के लगभग सांझे काव्य-कहानी सरकारी संग्रहों में उनकी रचनाओं ने जगह बनाने का गर्व अर्जित किया।
और अब सफ़र जारी है...


शिक्षण क्षेत्र में उपलब्धियाँ-

  • 2003-2004 में बेरिंग कॉलेजिएट स्कूल, बटाला की वार्षिक पत्रिका दीपशिखा का संपादन
    * सरकारी-गैर विभिन्न शिक्षण संस्थानों में विद्यालय की पत्रिकाओं का संपादन कार्य
    * 2011 में CBSE Sahodaya Best Teacher Award से सम्मानित।
    * 2018-19 में ज़िला स्तर पर हिन्दी शिक्षण सुधार कमेटी में D.C. गुरदासपुर द्वारा नामंकित सदस्या
    * 2019 में Director Of Education आदरणीय श्री कृष्ण कुमार जी द्वारा मोहाली में आयोजित बैठक में उपस्थिति
    * PSEB की राज्य स्तरीय 'हिन्दी भाषा टीम' में शामिल
    * राज्य स्तरीय हिन्दी विभाग द्वारा निर्देशित आज का शब्द की तकनीकी टीम की सद्स्या
    * राज्य स्तरीय हिन्दी विभाग की विशेषज्ञ टीम की सद्स्या के तौर पर 2024 तथा 2025 में राज्य के B.M's., D.M' s, Resource Persons को व्याख्यान देना।
    * राज्य स्तरीय हिन्दी विभाग द्वारा निर्देशित शिक्षण सम्बंधी सामग्री पर समय-समय पर कार्य करना।
    * 'DD Punjabi Channel, E-Vidya Channel, PSEB You Tube Channel, Diksha App' मंच पर इनके शिक्षण सम्बंधी उपाख्यान Educational Videos प्रसारित होते रहते हैं।
    * विद्यार्थियों के लिए पंजाबी, हिन्दी विषय से सम्बंधित ये अपने स्तर पर ऑनलाइन-ऑफलाइन प्रतियोगिताएँ करवाती रहती हैं।
    * माननीय ज़िला शिक्षा अधिक्षक द्वारा, गुरदासपुर शिक्षा विभाग से सम्मानित।
    * गुरदासपुर भाषा विभाग के अध्यक्ष से सम्मानित।
    * माननीय सचिव पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से सम्मानित होती रही हैं।
    * PSEB के द्वारा 2020-21-22 में श्री गुरु तेग बहादुर जी से सम्बंधित प्रतियोगिताओं में जज की भूमिका।
    * 2021 'शिक्षण अधिगम सहायक सामग्री' प्रतियोगिता में 2021 में व्लॉक स्तर पर प्रथम, ज़िला स्तर पर द्वितीय आने पर हौसला नहीं छोड़ा।
    * फिर 2022 में ब्लॉक, ज़िला स्तर पर प्रथम तथा पंजाब स्तर पर तृतीय स्थान अर्जित कर पंजाब के शिक्षा मंत्री माननीय श्री हरजोत सिंह बैंस जी से राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त कर चुकी हैं।
    * पंजाब तथा पंजाब के बाहर के सरकारी-गैरसरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की स्वरचित कविताओं को अपने स्तर पर एक पुस्तक का रूप दे चुकी हैं।



साहित्यिक क्षेत्र में उपलब्धियाँ-

  •  मुक्तामणि मुक्ता की अब तक 3 एकल पुस्तकें 'पत्रं पुष्पं' , 'मन तों बोली मेरी माँ बोली' तथा 'काव्य बालवाड़ी' , प्रकाशित हो चुकी हैं।
  • 15 सांझे काव्य संग्रहों (पंजाब भाषा विभाग के पंजाब सौरभ, ईवा ज़िंदगी पत्रिका, गुलिस्ताँ, काव्य के रंग, दस्तक, नारी, साहित्यपीडिया, निलांबरा, विहंगिनी, लफ्ज़ों के रंग, उड़ान नए परिंदों की, ओस के आखर, कल्प लतिका, लघु कथा शतक, हिन्दी प्रचार प्रसार सोसाईटी-एक प्रयोग बरोह आदि में विभिन्न कविताएँ छप चुकी हैं।
  • अंतराष्ट्रीय साहित्यिक, सांस्कृतिक संगठन #EwaZindagi का उपाध्यक्षा।
  •  #Womensweb में अपने अन्वेषित लेखों के कारण लाखों पाठकों में प्रसिद्धि प्राप्त।
  • अमर उजाला, कविशाला, काव्यांजलि, गुलिस्तां, अनुभव पत्रिका, जगदीश साहित्य संस्थान, प्रयागराज, राष्ट्रीय काव्य सागर, कल्प लतिका, मौलिक सृजन सागर, शिव बटालवी कला तथा साहित्यिक सोसाइटी, पंजाब साहित्यिक कला सोसाइटी, राष्ट्रीय लेखक संघ, अंदाज़-ए-हिन्दी, Your Quote, Nojoto, Pratilipi आदि प्रतिष्ठित साहित्यिक मंचों पर प्रसिद्ध हैं।
  • FaceBook Blog पर तकरीबन 5000 प्रशंसक
  • लोकसभा, राज्यसभा चुनाव के अधीन गुरदासपुर स्वीप टीम के द्वारा 2018 तथा 2023 के चुनावों में इनकी पंजाबी तथा हिन्दी कविता ‘आओ चुनाव का सफल बनाएँ’ का चुनाव प्रचार हेतु चुना जाना।
  • 2020-21 तथा 2021-22 में PSEB द्वारा श्री गुरु तेग बहादुर जी से संबंधित आयोजित प्रतियोगिताओं हेतु गठित निर्णांयक मंडल में शामिल होना।
  • PSEB की साहित्यिक सूची में शामिल
  • पंजाब तथा पंजाब के बाहर के सरकारी, गैर-सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों द्वारा भेजी गई कविताओं के संकलन स्वरूप एक काव्य संग्रह को अपने स्तर पर प्रकाशित करवाना।
  • स्वर सागर, काव्य सागर, पंजाबोत्स्व, जश्न-ए-इश्क, महासमर, Poetic Gem, Ewa Zindagi-Award Of Excellence सम्मान के साथ-साथ इन्हें N.R.B. Foundation के द्वारा अंतराष्ट्रीय मैत्री सम्मेलन में Red Achiever Award and Teacher’s Excellency Award, Pride Of Women Award, Pluralistic Society-Delhi द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है।
  •  विभिन्न शिक्षण संस्थानों की वार्षिक पत्रिकाओं का संपादन कार्य।
  • विभिन्न साहित्यिक पुस्तक, पत्रिकाओं, समाचारपत्रों में स्वलिखित-मौलिक रचनाओं का प्रकाशित होना।
  • भाषा विभाग पंजाब के अंतर्गत विभिन्न साहित्यिक आयोजनों में कविता पाठ करने, सम्मानित होने का सुअवसर मिलना।

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