अमेरिका की प्रमुख टेक कंपनियों ने तेजी से विकसित हो रही सुपर इंटेलिजेंस तकनीक के लिए साझा सुरक्षा उपाय अपनाने पर सहमति जताई है। कंपनियां अपने AI सिस्टम की आंतरिक जोखिम समीक्षा, बाहरी ऑडिट और निदेशक मंडल की निगरानी करेंगी। यह सहमति व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई बैठक के दौरान बनी।
इस बैठक में तकनीकी प्रतिस्पर्धा में आगे चल रही कई कंपनियों के प्रमुख शामिल हुए। कंपनियों के बीच AI से जुड़े जोखिमों की गंभीरता को लेकर अलग-अलग विचार होने के बावजूद, उन्होंने उन्नत AI प्रणालियों की सुरक्षा के लिए साझा सिद्धांतों और उपायों पर सहमति जताई।
Meta के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग ने इसे तकनीक को सुरक्षित तरीके से विकसित करने से जुड़ा “व्हाइट हाउस समझौता” बताया। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य अमेरिकी लोगों और ग्राहकों को यह भरोसा दिलाना है कि तकनीक उसी तरह काम करेगी, जैसा कंपनियां चाहती हैं।
जुकरबर्ग के अनुसार, कंपनियां मजबूत आंतरिक नियंत्रण और संभावित समस्याओं का पता लगाने वाली व्यवस्थाएं लागू करेंगी। इसके साथ कई स्तरों पर ऑडिट और निगरानी होगी। इसमें पहले कंपनी के भीतर जोखिम की समीक्षा होगी, फिर बाहरी ऑडिटर और मूल्यांकनकर्ता भी इन प्रणालियों की जांच करेंगे। ऑडिट से तैयार रिपोर्ट की स्वतंत्र समीक्षा कंपनियों के निदेशक मंडल करेंगे।
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था अंतिम उपाय नहीं है, बल्कि उद्योग की ओर से साझा सुरक्षा व्यवस्था की शुरुआत है।
Google के प्रमुख सुंदर पिचाई ने इस समझौते को “ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण” बताया। उन्होंने कहा कि उद्योग AI के संभावित लाभों के साथ-साथ इससे जुड़े जोखिमों को भी समझता है और इन जोखिमों से निपटने के लिए कंपनियों को मिलकर काम करना होगा।
Anthropic के CEO डारियो अमोडेई ने भी AI के संभावित लाभों के साथ इसके जोखिमों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि AI से बड़े फायदे हो सकते हैं, लेकिन इससे जुड़े वास्तविक जोखिम भी हैं। इन जोखिमों से निपटने का तरीका अभी चर्चा का विषय है, लेकिन सभी कंपनियों को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ने के लिए साथ काम करना होगा।
Nvidia के CEO जेंसन हुआंग ने कहा कि तकनीकी प्रगति और सुरक्षा के बीच कोई विरोधाभास नहीं है। उन्होंने कहा कि AI जैसी महत्वपूर्ण तकनीक को आगे बढ़ाते हुए इसे जिम्मेदारी और सुरक्षा के साथ विकसित किया जाना चाहिए।
राष्ट्रपति ट्रंप ने उद्योग के भीतर ही निगरानी और जवाबदेही पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कंपनियां एक-दूसरे की निगरानी करेंगी और तकनीक को सुरक्षित तरीके से विकसित किया जाएगा।
ट्रंप ने AI की दौड़ को चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका में कंपनियों के लिए डेटा सेंटर बनाना मुश्किल हो जाता है और वे दूसरे देशों में निवेश करने लगती हैं, तो इससे अमेरिका को नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि चीन डेटा सेंटरों में निवेश बढ़ाना चाहता है और अमेरिका को अपनी बढ़त बनाए रखनी चाहिए।
ट्रंप ने यह भी कहा कि वह सुपर इंटेलिजेंस से जुड़े मामलों के लिए एक प्रमुख अधिकारी नियुक्त करने के करीब हैं। उन्होंने बताया कि अगले तीन-चार दिनों में इसकी घोषणा की जा सकती है और नियुक्ति से पहले वह टेक कंपनियों तथा कांग्रेस के नेताओं से सलाह लेंगे।
AI के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे के विस्तार का जिक्र करते हुए जेंसन हुआंग ने इसे इतिहास की सबसे बड़ी औद्योगिक क्रांतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका में चिप संयंत्रों, कंप्यूटर संयंत्रों और AI कारखानों का निर्माण हो रहा है और इससे करीब 10 लाख नौकरियां पैदा हो रही हैं।
हालांकि, सुपर इंटेलिजेंस के तेजी से विकास से रोजगार के भविष्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। एलन मस्क ने कहा कि AI के कारण नौकरियों में बदलाव आएगा, जैसा पिछली तकनीकी क्रांतियों के दौरान हुआ था। उन्होंने अनुमान जताया कि भविष्य में ऐसी अर्थव्यवस्था बन सकती है, जिसमें लोगों की आय व्यापक रूप से बढ़े।
मस्क ने स्वास्थ्य क्षेत्र में भी AI और रोबोटिक्स से बड़े बदलाव की संभावना जताई। उनके अनुसार, रोबोट और सुपर इंटेलिजेंस के विकास से दुनिया भर के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं।