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बाज़ार

सीआईआई ने पश्चिम एशिया तनाव पर केंद्र की प्रतिक्रिया की सराहना की; 12 बिंदुओं का इंडस्ट्री एजेंडा भी तैयार किया

29 मार्च, 2026 06:05 PM

नई दिल्ली : देश के बड़े उद्योग निकायों में से एक कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) ने पश्चिम एशिया में तनाव का देश पर प्रभाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया की सराहना की है और इसे एक समन्वित और सुव्यवस्थित कदम बताया। साथ ही, सीआईआई ने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे जिम्मेदार और सकारात्मक कार्रवाई के माध्यम से इन प्रयासों में सहयोग करें। सीआईआई ने कहा कि मध्य पूर्व की वर्तमान स्थिति आपूर्ति में व्यवधान उत्पन्न करती है, जिसका प्रभाव ऊर्जा लागत, रसद और कार्यशील पूंजी चक्रों पर पड़ता है। हालांकि, नीतिगत उपायों से तात्कालिक जोखिम कम हुए हैं, फिर भी बदलती स्थिति के लिए सरकार और उद्योग के बीच निरंतर समन्वय आवश्यक है। सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, “सरकार की प्रतिक्रिया समयोचित, संतुलित और आश्वस्त करने वाली रही है।


यह सरकार के समग्र दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुचारू रखना, निर्यातकों का समर्थन करना, वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि से परिवारों की रक्षा करना और व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है। उद्योग जगत सरकार के इरादे और क्रियान्वयन दोनों की सराहना करता है।” उन्होंने आगे कहा, “इन उपायों ने मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित करने, औद्योगिक गतिविधियों को बनाए रखने और वैश्विक अनिश्चितता के समय में विश्वास को कायम रखने में मदद की है, साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका को भी सहारा दिया है।” सीआईआई ने 12 सूत्रीय कार्य योजना की रूपरेखा तैयार की है, जिस पर उद्योग वर्तमान परिस्थितियों में विचार कर सकता है। 1.उद्योग सरकार के साथ मिलकर महत्वपूर्ण कच्चे माल, ईंधन और मध्यवर्ती वस्तुओं के लिए रणनीतिक भंडार और सुरक्षा तंत्र विकसित कर सकता है। स्टॉक रखने, साझा बुनियादी ढांचे और बेहतर डेटा पारदर्शिता के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण भविष्य में होने वाली बाधाओं के खिलाफ राष्ट्रीय तैयारियों को काफी मजबूत कर सकते हैं। 2. कंपनियां स्थिर ईंधन कीमतों और कम लॉजिस्टिक्स लागतों का लाभ अंतिम उपभोक्ताओं और डाउनस्ट्रीम भागीदारों तक पहुंचाकर मूल्य स्थिरता बनाए रखने का प्रयास कर सकती हैं।

इससे मुद्रास्फीति प्रबंधन में सहायता मिलेगी और उद्योग की विश्वसनीयता मजबूत होगी। 3. कंपनियां वैकल्पिक स्रोत पहचान करके, विक्रेता आधार में विविधता लाकर और महत्वपूर्ण इनपुट के लिए सुनियोजित भंडार बनाकर आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ा सकती हैं। इससे समुद्री मार्गों पर निर्भरता के कारण होने वाली बाधाओं का जोखिम कम होगा। 4. कंपनियां नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और औद्योगिक ऊर्जा दक्षता सहित ऊर्जा परिवर्तन में निवेश बढ़ा सकती हैं। वर्तमान स्थिति पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने और दीर्घकालिक ऊर्जा मजबूती बनाने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। 5. जहां भी तकनीकी और व्यावसायिक रूप से संभव हो, कंपनियां एलपीजी से प्राकृतिक गैस और अन्य कुशल ऊर्जा विकल्पों की ओर रुख कर सकती हैं। इससे लागत अनुकूलन में सहायता मिलेगी और स्वच्छ ऊर्जा मिश्रण में योगदान होगा। 6. संस्थागत रसोईघर और बड़े खाद्य सेवा प्रदाता व्यवसाय ईंधन की खपत कम करने के लिए नवीन उपाय अपना सकते हैं, जिनमें बिजली या जैव-आधारित खाना पकाने के समाधान और अनुकूलित उपभोग पद्धतियां शामिल हैं। 7. कंपनियां आंतरिक दक्षता और लागत प्रबंधन का उपयोग करके अस्थायी झटकों को सहन कर रोजगार और आजीविका की सुरक्षा को प्राथमिकता दे सकती हैं, जिससे कार्यबल की स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।


8. बड़ी कंपनियां तेजी से भुगतान, बेहतर ऋण शर्तों और बेहतर ऑर्डर पारदर्शिता के माध्यम से एमएसएमई भागीदारों का समर्थन कर सकती हैं। इससे आपूर्ति श्रृंखलाओं में तरलता का दबाव कम होगा। 9. कंपनियां ईंधन की लागत में उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करने के लिए प्रक्रियाओं में ऊर्जा दक्षता और परिचालन अनुकूलन को बढ़ा सकती हैं। 10. निर्यातकों और निर्माताओं को अनिश्चित परिस्थितियों में लचीलापन बढ़ाने के लिए लॉजिस्टिक्स योजना, बीमा कवरेज और प्राप्य प्रबंधन सहित जोखिम प्रबंधन प्रथाओं को मजबूत करना चाहिए। 11. कंपनियां ऐसी प्रौद्योगिकी और डेटा प्रणालियों में निवेश कर सकती हैं जो आपूर्ति श्रृंखला की दृश्यता और परिचालन लचीलेपन को बेहतर बनाती हैं, जिससे व्यवधानों पर त्वरित प्रतिक्रिया संभव हो पाती है। 12. कंपनियां सोर्सिंग, मूल्य निर्धारण और वितरण समयसीमा में अधिक लचीलापन लाने के लिए खरीद और अनुबंध प्रथाओं की समीक्षा कर सकती हैं, जिससे अचानक बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशीलता कम हो जाती है।


सीआईआई ने बताया कि 28 फरवरी को संकट शुरू होने के बाद से, सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा, निर्यात को समर्थन, बाजारों को स्थिर करने और कमजोर वर्गों की रक्षा करने के लिए कई मोर्चों पर निर्णायक कार्रवाई की है, साथ ही अर्थव्यवस्था में विश्वास बनाए रखा है। व्यापार के मोर्चे पर, सरकार ने आरओडीटीईपी दरों और मूल्य सीमाओं को बहाल करके निर्यातकों को समर्थन दिया है, साथ ही माल ढुलाई और बीमा संबंधी व्यवधानों को दूर करने के लिए लक्षित उपाय किए हैं, जिनमें राहत तंत्र भी शामिल है। निर्यात ऋण सहायता में वृद्धि और ईसीजीसी कवरेज के विस्तार ने निर्यातकों, विशेष रूप से एमएसएमई के बीच, का विश्वास बनाए रखने में मदद की है।

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