इस साल औसत से कम बारिश के अनुमान भी जुलाई के शुरुआती दिनों में देशभर में अच्छी बारिश हुई है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र से लेकर बंगाल तक में मूसलधार बरसात के बाद लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली। वहीं कई इलाकों में मॉनसून ने अपनी ताकत दिखाते हुए तबाही भी मचाई। अब करीब 9 दिनों तक मॉनसून के तांडव और अच्छी बारिश के बाद अल नीनो बदला लेने के लिए लौट आ रहा है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक देश भर में एक बार फिर अल नीनो की स्थिति हावी होगी और इस दौरान बारिश के लिए तरसना पड़ सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो एक बार फिर मॉनसून की रफ्तार पर ब्रेक लगाने जा रहा है। इससे पहले जून के महीने में केरल में दस्तक देने के बाद मॉनसून करीब तीन सप्ताह तक अटक गया था, जिससे देश भर में बारिश की कमी दर्ज की गई थी। वहीं लोग रिकॉर्डतोड़ गर्मी से भी परेशान थे। लेकिन जुलाई की शुरुआत में बंगाल की खाड़ी और मध्य भारत के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्रों ने मॉनसून को दोबारा एक्टिव किया। इसके बाद लगातार 9 दिनों तक देश में औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई। बारिश ने घाटे को कुछ हद तक पूरा किया। हालांकि अब स्थिति फिर बदलने वाली है।
बदला लेगा अल नीनो
जानकारी के मुताबिक मॉनसून अब भी बारिश की कमी को पूरी तरह से रिकवर नहीं कर पाया है। फिलहाल कम दबाव के क्षेत्र अब कमजोर हो हो गए हैं और सैटेलाइट तस्वीरों से भी साफ है कि देश के कुछ इलाकों से मॉनसूनी बादल गायब हो रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक 10 जुलाई से 15 जुलाई के बीच उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत सहित देश के पश्चिमी तटीय इलाकों में बारिश के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं इस लंबे ब्रेक की वजह से मॉनसून की बारिश का कुल औसत एक बार फिर सामान्य से नीचे चला जाएगा।
खरीफ फसलों पर गहराया संकट
विशेषज्ञों के मुताबिक मॉनसून में यह ब्रेक किसानों की चिंता बढ़ाने वाला है। आने वाले दिनों में अल नीनो के और मजबूत होने से भारत में फसलों की बुवाई पर गंभीर असर पड़ सकता है क्योंकि देश में खरीफ की आधे से अधिक खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पहले से ही धान सहित खरीफ फसलों की बुवाई में कमी आई है। जून तक खरीफ फसलों की बुवाई का कुल आंकड़ा पिछले साल की तुलना में 23 प्रतिशत कम है। धान के अलावा दलहन, तिलहन, मोटे अनाज और कपास की बुवाई भी जून 2025 की तुलना में कम रही है।
अल नीनो है भारत के लिए काल
बता दें कि अल नीनो, प्रशांत महासागर में बनने वाली एक जलवायु घटना है। इससे मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में बदलाव के साथ वायुमंडल की परिस्थितियों में भी बदलाव होता है। अल नीनो के कारण भारत में मॉनसून की बारिश सामान्य से कम होती है और इससे वैश्विक तापमान बढ़ने का खतरा होता है। हालांकि, जुलाई के पहले आठ दिनों में देश में सामान्य से काफी अधिक वर्षा हुई है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि बारिश की कमी का खतरा पूरी तरह टल गया है। देश में सितंबर तक अल नीनो का प्रभाव हावी रहेगा।