राज ऐसा ही होता है— रणवीर सिंह ने ‘धुरंधर’ के साथ एक बार फिर दिखा दिया कि बड़े पर्दे पर उनका जादू क्या है और क्यों वह आज के सबसे बेहतरीन कलाकारों में से एक हैं। ‘धुरंधर’ के साथ रणवीर सिंह ने सिर्फ वापसी नहीं की है, बल्कि अपना दबदबा फिर से साबित किया है। यह केवल एक मशहूर कलाकार की वापसी नहीं, बल्कि ऐसे सितारे का उभार है, जिसमें दमदार अभिनय और जबरदस्त मास अपील दोनों हैं। यही वजह है कि यह फिल्म कला और भव्यता—दोनों का अनोखा मेल बन गई है और आज के हिंदी सिनेमा में स्टारडम की परिभाषा बदल रही है।
‘धुरंधर’ की जान रणवीर की दमदार मौजूदगी है। फिल्म की ऐतिहासिक कमाई—हिंदी में 800 करोड़ से ज्यादा और दुनिया भर में 1000 करोड़ के पार—सिर्फ बड़े सीन की वजह से नहीं है। इसकी ताकत भरोसा है—उस स्टार पर भरोसा जो दर्शकों को बार-बार थिएटर तक खींच लाता है, और उस अभिनेता पर भरोसा जो ऐसी परफॉर्मेंस देता है जो तालियों के बाद भी याद रहती है।
इस सफर को खास बनाती है इसकी लगातार सफलता। ‘धुरंधर’ सिर्फ पहले वीकेंड पर नहीं टिकी; यह हर हफ्ते बढ़ी, टिकी और नई ऊंचाइयों तक पहुंची। इसने साबित कर दिया कि मजबूत सोच और शानदार अभिनय के साथ बनी मास फिल्में आज भी राज कर सकती हैं।
यह पूरी तरह रणवीर की फिल्म है। ट्रेड और दर्शक—सब मानते हैं कि वह सिर्फ फिल्म का चेहरा नहीं हैं, बल्कि वही इसे संभाले हुए हैं। उनकी परफॉर्मेंस में जबरदस्त जोश और संतुलन दोनों हैं—भीड़ का शोर भी और एक गंभीर अभिनेता की पकड़ भी। यह दिखाता है कि असली स्टारडम दिखावे से नहीं, नियंत्रण से आता है।
ऑनलाइन चर्चाओं में भी यही बात गूंजती है। लोग कहते हैं कि उनकी स्क्रीन प्रेज़ेंस कहानी को अपने काबू में रखती है, और उनकी खामोशी भी असर छोड़ती है। जब बात सिर्फ कमाई से हटकर किरदार के प्रभाव तक पहुंचती है, तो समझिए यह सिर्फ सफलता नहीं, सांस्कृतिक असर है।
ये आंकड़े एक नई पीढ़ी का समीकरण भी बदलते हैं। एक ही भाषा में हिंदी से ?800 करोड़ और दुनियाभर में ?1000 करोड़—यह उपलब्धि रणवीर सिंह को अपनी पीढ़ी में सबसे अलग जगह देती है। यह रफ्तार नहीं, राज है—एक साफ संदेश कि वह यहां हुकूमत करने आए हैं।
इस असर के पीछे ‘हम्ज़ा फीवर’ भी है। रणवीर के इस किरदार ने पार्ट 1 को पॉप-कल्चर का हिस्सा बना दिया। अब पार्ट 2 के साथ अगली लहर—‘जसकीरत फीवर’—का इंतज़ार है, जहां वह उसी दुनिया में खुद को फिर से नया रूप देंगे।
जैसे-जैसे ‘धुरंधर’ हिंदी सिनेमा में नए मानक बना रही है, एक बात साफ है—यह सिर्फ एक ब्लॉकबस्टर नहीं, बल्कि एक दौर तय करने वाला अध्याय है। रणवीर सिंह अब इतिहास के पीछे नहीं भाग रहे—वह उसे गढ़ रहे हैं, जहां मास उनके साथ है और कला रास्ता दिखा रही है।