चंडीगढ़ : पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री कुमारी सैलजा ने ऋण की ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि महंगे कर्ज का सीधा असर व्यापारियों, छोटे उद्यमियों, मध्यम वर्ग और रोजगार के अवसरों पर पड़ता है। रेपो दर में वृद्धि से कर्जदारों की ईएमआई बढ़ने की स्थिति चिंताजनक है। सरकार को यह समझना चाहिए कि व्यापार और उद्योग को प्रोत्साहन दिए बिना विकसित भारत का सपना साकार नहीं हो सकता।
कुमारी सैलजा ने कहा कि अनेक विकसित देशों में कई श्रेणियों के व्यावसायिक ऋण भारत की तुलना में कम ब्याज दरों पर उपलब्ध हैं। लेकिन भारत को भी छोटे एवं मध्यम उद्योगों के लिए सस्ती और सुलभ ऋण व्यवस्था विकसित करनी चाहिए। कांग्रेस की नीति हमेशा रोजगार सृजन, लघु उद्योगों के संरक्षण और आर्थिक अवसरों के विस्तार की रही है।
सांसद ने कहा कि उदाहरण के तौर पर 50 लाख रुपये के गृह ऋण पर ब्याज दर में मात्र 0.25 प्रतिशत अंक की वृद्धि से 25 वर्ष की अवधि में लगभग 2.45 लाख रुपये का अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है। इसी प्रकार महंगा व्यावसायिक ऋण उत्पादन लागत बढ़ाता है और नए रोजगार सृजित करने की क्षमता को प्रभावित करता है। महंगाई नियंत्रण आवश्यक है, लेकिन इसके साथ आर्थिक विकास और आम नागरिक की वित्तीय सुरक्षा का संतुलन भी जरूरी है।
कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि जब विकसित देशों में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है, तो भारत में छोटे व्यापारियों, स्वरोजगार करने वाले युवाओं और एमएसएमई क्षेत्र को अधिक राहत क्यों नहीं दी जा सकती? उन्होंने मांग की कि सरकार और रिजर्व बैंक महंगाई, ब्याज दरों, रोजगार तथा व्यापार पर पड़ने वाले प्रभावों की समग्र समीक्षा करें और छोटे उद्यमियों को राहत देने के लिए प्रभावी कदम उठाएं।