भारत ने रेयर अर्थ, क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए पिछले दो वर्षों में व्यापक कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने विश्व स्तर पर 35 देशों के साथ रणनीतिक नेटवर्क तैयार किया है, जिसमें 24 देशों के साथ समझौते हो चुके हैं और 11 देशों के साथ बातचीत चल रही है।
मिशन का मुख्य उद्देश्य
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश की औद्योगिक जरूरतों, ऊर्जा सुरक्षा, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, रक्षा, अंतरिक्ष और सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए जरूरी खनिजों की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
वैश्विक पहुंच
सरकार द्वारा जारी ग्राफिक मैप के अनुसार, भारत ने उत्तरी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, पश्चिम एशिया, मध्य एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया तक अपनी साझेदारी फैलाई है। ये साझेदारियां केवल खनिज आयात तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खोज, खनन, प्रोसेसिंग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त निवेश और पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करने पर केंद्रित हैं।
प्रमुख साझेदार देश
भारत पहले ही अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, नीदरलैंड, जापान, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, अर्जेंटीना, डीआर कांगो, घाना, नामीबिया, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल, वियतनाम, मोजाम्बिक, जिम्बाब्वे, मलावी, जापान और रूस के साथ विभिन्न समझौते कर चुका है। इनमें लिथियम, कोबाल्ट, कॉपर, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और सेमीकंडक्टर सहयोग शामिल हैं।
बातचीत जारी
चिली, पेरू, बोलीविया, जाम्बिया, कजाकिस्तान, मंगोलिया, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, तजाकिस्तान, म्यांमार और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ लिथियम, कॉपर, रेयर अर्थ और अन्य रणनीतिक खनिजों पर बातचीत चल रही है।
रणनीतिक महत्व
क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, कॉपर और रेयर अर्थ एलिमेंट्स इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी स्टोरेज, सौर और पवन ऊर्जा, रक्षा उपकरण तथा हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इन साझेदारियों से भारत न सिर्फ आपूर्ति सुरक्षा हासिल करेगा, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा और हरित अर्थव्यवस्था के लक्ष्यों को भी मजबूती मिलेगी।
सरकार का फोकस संयुक्त निवेश, खनिज प्रसंस्करण क्षमता निर्माण और दीर्घकालिक सप्लाई चेन विकसित करने पर है, ताकि भविष्य में वैश्विक खनिज संकट का असर भारत पर कम पड़े। यह रणनीति भारत को वैश्विक क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में मजबूत खिलाड़ी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।