पंचकूला : हरियाणा के चर्चित पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी अशोक खेमका के खिलाफ कथित भर्ती घोटाले के मामले में राज्य सरकार की सुस्त रवैये पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। पंचकूला की मुख्य न्यायिक मैजिस्ट्रेट (सी.जे.एम.) कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि सरकार ने उस महत्वपूर्ण याचिका पर कोई जवाब दाखिल नहीं किया है, जिसमें इस केस को सक्षम कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की गई थी।
अधिवक्ता रविंद्र कुमार द्वारा दायर इस अर्जी पर बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस वजह या स्पष्टीकरण पेश नहीं किया गया। सरकार के इस सुस्त रवैये को देखते हुए कोर्ट ने जवाब दाखिल करने का अवसर अब पूरी तरह बंद कर दिया है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 मई को होगी। यह मामला अप्रैल 2022 में दर्ज हुई उन 2 क्रॉस-एफ.आई.आर. से पैदा हुआ जिसमें एक तरफ पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी अशोक खेमका पर हरियाणा स्टेट वेयरहाऊसिंग कॉर्पोरेशन में नियुक्तियों के दौरान धांधली और भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे तो दूसरी तरफ खेमका की शिकायत पर अंबाला के तत्कालीन डिवीजनल कमिश्नर आई.ए.एस. अधिकारी संजीव वर्मा के खिलाफ दस्तावेजों में हेरफेर का मामला दर्ज हुआ था।
पिछले साल अप्रैल में खेमका की रिटायरमेंट के बाद हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की पूर्व अनुमति देने से इन्कार कर दिया, जिसके आधार पर पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। हालांकि अदालत ने अभी तक इस क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया है क्योंकि मूल शिकायतकर्ता ने इसमें कई तकनीकी विरोधाभास होने का दावा किया है।
अधिवक्ता रविंद्र कुमार ने अदालत में दलील दी है कि पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट में कानूनी विसंगतियां हैं, जहां एक ओर धारा 17ए का हवाला दिया जा रहा है वहीं अन्य सह-आरोपियों के बाबत स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में सी.जे.एम. कोर्ट में इस मामले की कार्रवाई को आगे बढ़ाना नियमसंगत नहीं है। अब 30 मई को होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि भ्रष्टाचार के इन आरोपों की फाइलें बंद होंगी या यह मामला किसी विशेष अदालत में पहुंचेगा।