Tuesday, October 06, 2026
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बाज़ार

जनवरी में थोक महंगाई 1.81% पर, मेटल और मैन्युफैक्चरिंग कीमतों ने बढ़ाया दबाव

16 फ़रवरी, 2026 06:48 PM

भारत में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर जनवरी में सालाना आधार पर 1.81 प्रतिशत रही है। यह जानकारी सोमवार को वाणिज्य और उद्योग मंत्री की ओर से दी गई।

आधिकारिक बयान में कहा गया कि जनवरी में महंगाई बढ़ने की वजह बेसिक मेटल की कीमतों में इजाफा होना और मैन्युफैक्चरिंग एवं गैर-खाद्य उत्पादों, खाद्य वस्तुओं और टेक्सटाइल की कीमतों में बढ़ोतरी होना है।

खाद्य सूचकांक, जिसमें प्राथमिक वस्तुओं के समूह से ‘खाद्य पदार्थ’ और विनिर्मित उत्पादों के समूह से ‘खाद्य उत्पाद’ शामिल हैं, दिसंबर 2025 में 196.0 से घटकर जनवरी 2026 में 194.2 हो गया है। थोक महंगाई दर जनवरी में पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में बढ़कर 1.41 प्रतिशत हो गई।

डब्ल्यूपीआई में विनिर्माण समूह का भार 64.23 प्रतिशत है, और इस सूचकांक में महीने के दौरान 1.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 22 विनिर्मित उत्पादों में से 19 समूहों की कीमतों में वृद्धि देखी गई, जबकि तीन समूहों की कीमतों में कमी दर्ज की गई। जिन महत्वपूर्ण समूहों की कीमतों में महीने-दर-महीने वृद्धि हुई, उनमें बेसिक मेटल का निर्माण, खाद्य उत्पाद, वस्त्र, अन्य विनिर्माण और विद्युत उपकरण शामिल हैं।

जिन वस्तुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, उनमें दवाइयों का निर्माण, औषधीय रसायन और वनस्पति उत्पाद, मशीनरी और उपकरण एवं फर्नीचर शामिल हैं, जिनकी कीमतें जनवरी 2026 में दिसंबर 2025 की तुलना में कम हुई हैं।

भारत में अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा महंगाई दर जनवरी 2026 में सालाना आधार पर 2.75 प्रतिशत रही थी। बेस ईयर में बदलाव के बाद खुदरा महंगाई दर के यह पहले आंकड़े हैं। सरकार की ओर से बेस ईयर को बदलकर 2024 कर दिया गया है, जो कि पहले 2012 था। दिसंबर में खुदरा महंगाई दर 1.33 प्रतिशत थी। हालांकि, यह पुराने बेस ईयर 2012 पर आधारित थी।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर 2.73 प्रतिशत रही है और शहरी इलाकों में 2.77 प्रतिशत थी। वहीं, खाद्य महंगाई दर जनवरी में 2.13 प्रतिशत रही है। यह ग्रामीण इलाकों में 1.96 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 2.44 प्रतिशत रही है।

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