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हिमाचल

पर्यटन सीजन के बीच कचरे के ढेर से धूमिल हो रही मनाली की छवि, हिडिंबा मंदिर और रोहतांग के आसपास लगे कूड़े के ढेर

19 जून, 2026 04:28 PM

मनाली : अपनी प्राकृतिक सुंदरता, बर्फ से ढके पहाड़ों और मनमोहक वादियों के लिए विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी मनाली इन दिनों गंभीर कचरा प्रबंधन संकट से जूझ रही है। पर्यटन सीजन के चरम पर पहुंचते ही शहर के विभिन्न हिस्सों में कूड़े के ढेर लगने से पर्यावरण, जनस्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। मनाली पहुंचने वाले पर्यटकों का स्वागत अब खूबसूरत नजारों के बजाय शहर के प्रवेश द्वार, वोल्वो बस स्टैंड, एचआरटीसी बस स्टैंड और लेडी विलिंगडन अस्पताल के आसपास फैले कचरे और दुर्गंध से हो रहा है। स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने हिमाचल प्रदेश के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक की बिगड़ती स्थिति पर चिंता व्यक्त की है।

मनाली के प्रसिद्ध मॉल रोड की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। दीवारों और पैदल मार्गों पर पान-गुटखे के दाग इसकी सुंदरता को प्रभावित कर रहे हैं। लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए नगर परिषद द्वारा लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई पेंटिंग्स और कलाकृतियां भी बेअसर साबित हो रही हैं, क्योंकि जमीनी स्तर पर पर्याप्त डस्टबिन उपलब्ध नहीं हैं और नागरिकों में भी जागरूकता का अभाव दिखाई दे रहा है।

सबसे चिंताजनक स्थिति धार्मिक स्थलों के आसपास देखने को मिल रही है, जहां खुलेआम कूड़ा फेंका जा रहा है। पवित्र स्थलों के निकट बीयर और शराब की खाली बोतलें बिखरी पड़ी हैं। वहीं रोहतांग दर्रा और सोलंग नाला जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल प्लास्टिक कचरे के अड्डे बनते जा रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश में सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध होने के बावजूद इसका उपयोग धड़ल्ले से जारी है। पर्यटकों की लापरवाही का आलम यह है कि वर्षों पुराने वृक्षों के खोखलों को भी कूड़ेदान की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे न केवल वन संपदा को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि प्रदेश की उपजाऊ भूमि और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।

अनियंत्रित कचरा प्रबंधन के कारण मनाली की कई बड़ी और छोटी नालियां पूरी तरह अवरुद्ध हो चुकी हैं। स्थानीय विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी मानसून सीजन में यह लापरवाही भारी पड़ सकती है। नालियों में जमा प्लास्टिक और ठोस कचरा पानी के प्राकृतिक प्रवाह को रोक सकता है, जिससे जलभराव, नालों के उफान और फ्लैश फ्लड जैसी स्थितियां उत्पन्न होने की आशंका बढ़ गई है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार नगर परिषद मनाली के कई वार्डों में सफाई व्यवस्था बदहाल है। कई स्थानों पर दोपहर एक बजे तक भी कचरा नहीं उठाया जाता। बस स्टैंड क्षेत्र की स्थिति सबसे खराब बताई जा रही है, जहां प्रतिदिन हजारों पर्यटक पहुंचते हैं और उन्हें सबसे पहले गंदगी और दुर्गंध का सामना करना पड़ता है।

हैरानी की बात यह है कि मनाली के प्रमुख आकर्षण मॉल रोड के लगभग 100 से 150 मीटर लंबे हिस्से में केवल दो से तीन डस्टबिन ही दिखाई देते हैं। स्थानीय लोग यहां कम से कम 10 से 15 अतिरिक्त डस्टबिन लगाने की मांग कर रहे हैं।
गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) से आए पर्यटक अनुपम तथा स्थानीय लोगों ने बताया कि हिडिंबा मंदिर, वन विहार, क्लब हाउस, नेचर पार्क और गोम्पा रोड जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले मार्गों पर सिंगल यूज प्लास्टिक का कचरा बड़ी मात्रा में फैला हुआ है।

प्रतिबंध के बावजूद कई दुकानदार खुलेआम सिंगल यूज प्लास्टिक में खाद्य सामग्री परोस रहे हैं। एक रुपये वाले पानी के पाउच भी बड़ी संख्या में बेचे जा रहे हैं, जो पर्यावरण के लिए नया खतरा बनते जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि गोम्पा रोड सहित कई क्षेत्रों की नालियां प्लास्टिक कचरे से पूरी तरह जाम हो चुकी हैं। मानसून के दौरान जल प्रवाह बढ़ने पर ये अवरोध गंभीर बाढ़ का कारण बन सकते हैं, जिससे जान-माल का भारी नुकसान होने की आशंका है।

दिल्ली से मनाली घूमने आए पर्यटक अंकुश गर्ग ने लोगों से जिम्मेदार पर्यटक बनने की अपील की। उन्होंने कहा, "यह देश और यह प्रकृति हमारी अपनी है। यदि हम इसी तरह कूड़ा फैलाते रहे तो ग्लोबल वार्मिंग बढ़ेगी और प्राकृतिक संसाधन नष्ट होते जाएंगे।

भविष्य में लोग यहां केवल बर्फ देखने के लिए तरस जाएंगे। इसके लिए केवल सरकार को दोष नहीं दिया जा सकता, आम जनता को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।"

स्थानीय लोगों ने समस्या के स्थायी समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय मॉडल पर आधारित "रिवॉर्ड सिस्टम" लागू करने की मांग की है, ताकि स्वच्छता बनाए रखने वाले लोगों को प्रोत्साहित किया जा सके और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिले। (SBP)

 

 

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