डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के सिल्विकल्चर एवं एग्रोफॉरेस्ट्री विभाग के अंतर्गत संचालित ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटर रिसर्च प्रोजेक्ट ऑन एग्रोफॉरेस्ट्री को हिमाचल प्रदेश में किसानों एवं हितधारकों के बीच एग्रोफॉरेस्ट्री को बढ़ावा देने में उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रतिष्ठित डॉ. एस. चिन्नामणि अवार्ड फॉर एक्सीलेंस इन एग्रोफॉरेस्ट्री एक्सटेंशन–2025 से सम्मानित किया गया है।
यह पुरस्कार इंडियन सोसाइटी ऑफ एग्रोफॉरेस्ट्री तथा सेंट्रल एग्रोफॉरेस्ट्री रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय एग्रोफॉरेस्ट्री दिवस समारोह के दौरान संयुक्त रूप से प्रदान किया गया। यह सम्मान डीडीजी प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन डॉ. ए.के. नायक द्वारा प्रदान किया गया। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में एग्रोफॉरेस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए केंद्र द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों की सराहना की।
देशभर में संचालित 37 ए.आई.सी.आर.पी. -एग्रोफॉरेस्ट्री केंद्रों में से विश्वविद्यालय के इस केंद्र को प्रभावशाली जन-जागरूकता कार्यक्रमों एवं किसान-केंद्रित विस्तार गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली। पिछले पांच वर्षों में सिल्विकल्चर एवं एग्रोफॉरेस्ट्री विभाग ने 40 विस्तार कार्यक्रम आयोजित किए तथा 3,379 किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया, जिनमें महिलाएं, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लाभार्थी भी शामिल रहे। इन कार्यक्रमों में जलवायु-अनुकूल एग्रोफॉरेस्ट्री पद्धतियों पर विशेष बल दिया गया।
इस परियोजना का नेतृत्व सिल्विकल्चर एवं एग्रोफॉरेस्ट्री विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रोहित बिष्ट कर रहे हैं तथा उनके साथ टीम सदस्य डॉ. प्रेम प्रकाश कार्यरत हैं। यह पुरस्कार राज्य में सतत एग्रोफॉरेस्ट्री विकास एवं किसान सशक्तिकरण की दिशा में ए.आई.सी.आर.पी -एग्रोफॉरेस्ट्री टीम के सामूहिक योगदान को मान्यता प्रदान करता है। यह पुरस्कार औपचारिक रूप से डॉ. रोहित बिष्ट ने डॉ. ए.के. नायक से प्राप्त किया।