रोहतक : अग्रवाल वैश्य समाज के प्रदेश अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने इनेलो के रोहतक जिला अध्यक्ष नफे सिंह लाहली द्वारा रोहतक उपायुक्त के संदर्भ में सार्वजनिक तौर की गई जातिसूचक टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि किसी भी समाज के लिए अपमानजनक एवं अभद्र भाषा का प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक मर्यादाओं और संविधान की भावना के विरुद्ध है।
अशोक बुवानीवाला ने कहा कि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत नाराजगी किसी अधिकारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि अथवा राजनीतिक दल से हो सकती है, लेकिन उस विवाद या मतभेद में किसी पूरे समाज को उसकी जाति के साथ घसीटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। सार्वजनिक जीवन में सक्रिय व्यक्तियों के शब्दों का व्यापक प्रभाव पड़ता है, इसलिए उन्हें अपनी भाषा और आचरण में विशेष संयम बरतना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इनेलो विधायक अर्जुन चौटाला की उपस्थिति में हुए इस पूरे घटनाक्रम में पार्टी की जिम्मेदारी बनती है कि वो वैश्य समाज के प्रति अपने जिलाध्यक्ष द्वारा की गई इस अभद्र टिप्पणी का संज्ञान ले और उन पर कड़ी कार्यवाही करें अन्यथा वैश्य समाज की इस नाराजगी का खामियाजा भविष्य में पूरी इनेलो पार्टी को उठाना पड़ेंगा। उन्होंने कहा कि इनेलो जिला अध्यक्ष द्वारा जिस प्रकार एक प्रशासनिक अधिकारी को उसकी जाति से जोडक़र संबोधित किया गया, वह न केवल उस अधिकारी का बल्कि पूरे वैश्य समाज का अपमान है।
अशोक बुवानीवाला ने नफे सिंह लाहली से मांग की कि वे अपनी टिप्पणी पर सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करें तथा वैश्य समाज से बिना शर्त माफी मांगें। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की भाषा का प्रयोग न करने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि यदि सार्वजनिक मंच से समाज का अपमान किया गया है तो उसी सार्वजनिक मंच से समाज से क्षमा भी मांगी जानी चाहिए।
अशोक बुवानीवाला ने कहा कि वैश्य समाज के सम्मान पर की गई टिप्पणी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने नफे सिंह लाहली को 7 दिन का समय देते हुए मांग की कि वे अपने शब्दों को सार्वजनिक रूप से वापस लें और वैश्य समाज से बिना शर्त क्षमा याचना करें। अन्यथा प्रदेशभर का वैश्य समाज एकजुट होकर इनेलो के रोहतक जिला कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेगा तथा इनेलो पार्टी के बहिष्कार को लेकर व्यापक जनअभियान चलाने के लिए मजबूर होगा।
समाज के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सुभाष तायल ने भी रोहतक उपायुक्त के प्रति उनकी जाति को जोडक़र की गई अमर्यादित टिप्पणी का विरोध करते हुए कहा कि लोकतंत्र में आलोचना का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाने का अधिकार किसी को नहीं है।
उन्होंने कहा कि वैश्य समाज किसी भी प्रकार की जातीय विद्वेषपूर्ण मानसिकता का विरोध करता है। इस प्रकार की टिप्पणियां सामाजिक सद्भाव को कमजोर करती हैं और समाज में अनावश्यक विभाजन एवं वैमनस्य पैदा करने का कार्य करती हैं।
वैश्य समाज के प्रति अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता इसलिए उन्होंने इनेलो पार्टी की ओर से इस पूरे प्रकरण पर खेद जताने और अपने जिलाध्यक्ष के खिलाफ कार्यवाही करने का आग्रह किया।