नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय में दल बदल को रोकने के मुद्दे से जुड़ी याचिका दाखिल हुई थी। यह याचिका मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सामने पेश की गई थी। हालांकि, इसे खारिज कर दिया गया और याचिकाकर्ता से सवाल भी पूछे गए हैं। दल बदलुओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका, CJI सूर्यकांत ने पूछ लिया पार्टी का नाम
राजनीतिक दलों के नेताओं के पार्टी बदलने की चर्चा सुप्रीम कोर्ट में भी शुरू हो गई है। खबर है कि दल बदल को रोकने के निर्देश का अनुरोध करने वाली याचिका शुक्रवार को उच्च न्यायालय में दाखिल हुई थी। खास बात है कि CJI यानी भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। साथ ही याचिकाकर्ता से पार्टी के नाम को लेकर सवाल भी पूछ लिया।
याचिकाओं में भ्रष्टाचार और दल बदल का जिक्र किया गया था। बार एंड बेंच के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट सीआर जया सुकिन ने कहा, 'इस देश में पार्टियों के नेता या तो रिश्वत देकर भ्रष्टाचार में लगे हुए हैं या धमकियां दे रहे हैं कि अगर वो पार्टी में शामिल नहीं हुए तो परिवार के सदस्यों को नुकसान पहुंचाया जाएगा।'
इसपर सीजेआई ने सवाल किया, 'किस सत्तारूढ़ दल की बात कर रहे हैं? आपके राज्य में तो पार्टियां बदलती रहती हैं।'
याचिका में लगाए आरोप
एडवोकेट सुकिन ने कहा, 'एक राज्य पूर्वी भारत में हैं और एक मध्य भारत में है और पार्टी नेता दूसरे दलों में शामिल हो रहे हैं...। स्पीकर को नेताओं के इस्तीफे की जांच करना चाहिए। स्पीकर मीडिया बुलाते हैं... वो इन्हें स्वीकार कर लेते हैं और कुछ ही मिनटों में वो दूसरी पार्टी में शामिल हो जाते हैं। यह लोकतंत्र को तबाह करना है।'
CJI का रिप्लाई
वकील की तरफ से दलीलें दिए जाने के बाद सीजेआई ने कहा, 'आपने एक मिनट मांगा था और हमने आपको 7 मिनट दिए। याचिका खारिज की जाती है। यह याचिका अस्पष्ट और सामान्य आरोपों पर आधारित है। साथ ही इसमें आरोपों का समर्थन करने वाला कोई भी सबूत पेश नहीं किया गया है। हमें इसमें दखल देने का कोई भी आधार नजर नहीं आता है।'
हाल में टूटी तृणमूल कांग्रेस
खास बात है कि हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के विधायक और सांसदों ने बगावत की है। वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में 20 सांसदों ने टीएमसी से अलग होकर NCPI यानी नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर लिया है। राज्य में भी विधायकों ने अलग गुट बना लिया है और कोर्ट से भी रिताब्रता बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता मिल गई है।
महाराष्ट्र में अटकलें लगाई जा रही हैं कि शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) के 6 सांसद भी जल्द ही अलग हो सकते हैं। ये सांसद शिवसेना को समर्थन दे सकते हैं। बगावत के ताजा संकेत गुरुवार को हुई पार्टी के संसदीय दल की बैठक से मिले हैं, जिसमें दल के 9 में से महज 6 सांसद ही पहुंचे थे।