हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने एक राष्ट्रीय समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली तथा मतदाता सूचियों से जुड़े निर्णयों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में सामने आए तथ्य देश की चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करते हैं। राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 महीनों के दौरान चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कुछ निर्णयों, कार्यप्रणाली और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार लिखित रूप में आपत्तियां दर्ज कराई हैं। यदि रिपोर्ट में सामने आए ये तथ्य सही हैं, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है और इसकी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार इन आपत्तियों का संबंध मुख्य रूप से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), फॉर्म-6 में बदलाव, नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने, नाम बहाल करने संबंधी आदेशों के विरुद्ध अपील, मतदाता सूचियों की सुरक्षा तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा, “जब देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने वाली संवैधानिक संस्था के भीतर ही निर्णय प्रक्रिया, पारदर्शिता और अधिकारों को लेकर गंभीर मतभेद सामने आने लगें, तो यह पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता लोकतंत्र की बुनियाद है। इस विश्वसनीयता पर उठने वाला कोई भी सवाल लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।”
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की आधारशिला है। किसी वैध मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया जाना या किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल न होना उसके मताधिकार को सीधे प्रभावित करता है। इसलिए मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और संशोधन की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सत्यापन योग्य और सभी राजनीतिक दलों एवं संबंधित पक्षों के प्रति समान रूप से जवाबदेह होनी चाहिए।
हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लंबे समय से “वोट चोरी” और मतदाता सूचियों में संभावित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते रहे हैं। अब चुनाव आयोग के भीतर से सामने आई कथित लिखित आपत्तियों ने इन सवालों की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े प्रत्येक सवाल का तथ्यात्मक, स्पष्ट और सार्वजनिक रूप से संतोषजनक जवाब मिलना चाहिए।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरन्त प्रभाव से पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने मांग की कि पिछले 10 महीना में दोनों चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के जिन निर्णयों, कार्यप्रणाली और प्रक्रियाओं को लेकर 14 बार लिखित रूप में आपत्तियां दर्ज कराई है वो सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके।