चंद्रयान की ऐतिहासिक सफलता के बाद भारत यहीं रुकने वाला नहीं है। हमारा देश अब अपने खुद के स्पेस स्टेशन और 'गगनयान' मिशन की तैयारियों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान कही। मेलबर्न में आयोजित 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम में करीब 30 हजार भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने भारत के भविष्य की रूपरेखा और अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते कदमों का जिक्र किया।
अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज के साथ तीसरे वार्षिक लीडर्स समिट में भी हिस्सा लिया, जहां दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, तकनीक और क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में 18 बड़े समझौते हुए हैं।
'ग्रो मोर, अचीव मोर' है भारत का विजन
प्रवासियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "दुनिया के किसी भी देश ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने का कारनामा नहीं किया है, लेकिन भारत इस सफलता पर संतुष्ट होकर बैठने वाला नहीं है। हमारा विजन है- 'ग्रो मोर, अचीव मोर'। इसी मंत्र के साथ भारत अब इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने वाले 'गगनयान' मिशन और अपने खुद के स्पेस स्टेशन के निर्माण की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।"
गगनयान भारत का वह मिशन है जिसकी सफलता हमारे देश को एक ऐसे एलीट क्लब में शामिल कर देगी जहां दुनिया के केवल तीन देश मौजूद हैं। जी हां, केवल रूस, अमेरिका और चीन वे देश हैं जो अपने स्वतंत्र स्पेस स्टेशन हैं। अब भारत भी इस क्लब में शामिल होने के करीब हैं।
इनोवेशन और स्टार्टअप्स का नया दौर
भारत के इनोवेशन इकोसिस्टम की रफ्तार का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कई अहम आंकड़े साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है, जहां 2 लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड स्टार्टअप मौजूद हैं। हर महीने 4,000 से अधिक नए स्टार्टअप जुड़ रहे हैं। रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्र जो पहले बंद थे, अब प्राइवेट कंपनियों के लिए खोल दिए गए हैं। आज सैकड़ों स्टार्टअप्स इन सेक्टर्स में काम कर रहे हैं।
भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट लॉन्च
स्काईरूट एयरोस्पेस नामक भारतीय स्टार्टअप कंपनी जल्द ही अपना 'विक्रम-1' ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च करने वाली है। स्कूली छात्रों में छोटी उम्र से ही वैज्ञानिक सोच और रचनात्मकता विकसित करने के लिए देश भर में 10 हजार से ज्यादा 'अटल टिंकरिंग लैब' संचालित किए जा रहे हैं।
भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए अहम रणनीतिक समझौते
इस दौरे पर दोनों देशों की 6 साल पुरानी 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' को एक नया विस्तार मिला है। पीएम मोदी और एंथनी अल्बनीज के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं।
गगनयान को मिलेगा ऑस्ट्रेलिया का साथ
भारत के गगनयान मिशन की मॉनिटरिंग और टेलीमेट्री ट्रैकिंग के लिए कोकोस (कीलिंग) द्वीप समूह पर एक अस्थायी स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल स्थापित किया जाएगा। दोनों देशों ने 2009 के सुरक्षा समझौते की जगह एक नया 'जॉइंट डिक्लेरेशन' साइन किया है। इसके अलावा 'इंडिया-ऑस्ट्रेलिया डिफेंस इनोवेशन कॉरिडोर' की शुरुआत की गई है, जो दोनों देशों की रक्षा इंडस्ट्रीज और स्टार्टअप्स को जोड़ेगा।
क्लीन एनर्जी और यूरेनियम
2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा के लक्ष्य को हासिल करने के लिए, शांतिपूर्ण नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों के तहत ऑस्ट्रेलिया भारत को यूरेनियम का निर्यात करेगा। ग्लोबल क्लीन एनर्जी और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूरी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के मकसद से दोनों देशों ने साइबर और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी (PACTS) पर भी नया समझौता किया है। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए एक गंभीर चुनौती है और इसके खिलाफ दोनों देशों की लड़ाई और संकल्प अटूट है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और निवेश का न्योता
प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों को भारत के तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश का सीधा न्योता दिया। उन्होंने बताया कि भारत ने हाल ही में परमाणु क्षेत्र को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोल दिया है। पोर्ट, एयरपोर्ट, रेलवे, हाईवे और शहरी विकास के क्षेत्र में लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स के लिए भारत में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। साथ ही, दोनों देशों ने 'व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते' (CECA) को भी जल्द से जल्द अंतिम रूप देने पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।