अमेरिकी टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक के एक सत्र में 5 प्रतिशत लुढ़के से एआई बबल के फूटने के शुरुआती संकेत मिले हैं, लेकिन इस बदलाव से भारतीय शेयर बाजार में विदेश निवेश प्रवाह में सुधार देखने को मिल सकता है। यह जानकारी रविवार को एक्सपर्ट्स की ओर से दी गई थी।
एनएसडीएल के डेटा के मुताबिक, मई में एफआईआई ने 32,963 करोड़ रुपए की बिकवाली की थी। जून में भी बिकवाली को जारी रखा। इस महीने की शुरुआत से अब तक 42,926 करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं, जिससे 2026 में अब तक बिकवाली का आंकड़ा 2,83,662 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है।
चालू खाता घाटे और भुगतान संतुलन अंतर को पूरा करने के लिए विदेशी निवेश (एफपीआई) के प्रवाह के महत्व को देखते हुए, केंद्रीय बैंक और सरकार ने एफपीआई को आकर्षित करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा, “केंद्र द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों में एफपीआई निवेश पर ब्याज और पूंजीगत लाभ को कर से छूट देने जैसे उपायों के साथ-साथ मौद्रिक नीति में आरबीआई ने वाणिज्यिक बैंकों द्वारा जुटाए गए एफसीएनआर जमा पर हेजिंग लागत को वहन करने, फॉरेक्स स्वैप विंडो का विस्तार, एफएआर मार्ग के माध्यम से सरकारी बॉन्ड तक पहुंच में वृद्धि और भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने के लिए एनआरआई और ओसीआई की सीमा में वृद्धि जैसी घोषणाएं भारत में विदेशी मुद्रा प्रवाह को मजबूत करेंगी।”
इससे रुपए को स्थिर होने में भी मदद मिली है। वैश्विक अस्थिरता के कारण रुपया गिरकर 96.96 के निचले स्तर पर पहुंच गया था, हालांकि, 5 जून को बढ़कर 94.94 हो गया था।
विश्लेषक ने कहा, “अगर विदेशी निवेशकों को भारत में वापस लाना है, तो एआई ट्रेड, जो भारत से विदेशी निवेश के बाहर ले जाने का मुख्य कारण रहा है, में बदलाव आना चाहिए। फिलहाल इसके शुरुआती संकेत मिल रहे हैं।”
भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता की चिंताओं के बीच, निफ्टी और सेंसेक्स जैसे प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के साथ बाजार पिछले सप्ताह बंद हुए।
हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतों ने गिरावट को सीमित करने में मदद की।