शिमला : हिमाचल प्रदेश में 51 शहरी निकायों में हुए चुनाव के बाद अब चुनाव लडऩे वाले सभी 1147 प्रत्याशियों को चुनाव के खर्च की जानकारी चुनाव आयोग को देनी होगी। राज्य चुनाव आयोग ने एक महीने में यह सभी जानकारी चुनाव आयोग को देने के लिए चुनाव लडऩे वाले सभी उम्मीदवारों, चाहे वे चुनाव में विजेता रहे हों या फिर चुनाव हारे हों, सभी को चुनाव खर्च से संबंधित जानकारी प्रदान करनी होगी। चुनाव के दौरान नगर निगमों के प्रत्याशियों को एक लाख तक चुनाव खर्च करने तक ही चुनाव आयोग ने सीमित किया था। वहीं, नगर परिषदों के चुनाव में 75 हजार तो नगर पंचायतों के चुनाव में 50 हजार रुपए तक चुनाव प्रचार पर खर्च होने की सीमा तय की गई थी। राज्य मेंं चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अब सभी प्रत्याशियों के पास 27 दिन बचे हैं। हालांकि नगर निगमों के चुनाव के परिणाम 31 मई को आएंगे ऐसे में नगर निगमों में चुनाव लडऩे वाले सभी प्रत्याशियों को अपने चुनाव खर्च की रिपोर्ट 30 जून तक देनी होगी, जबकि अन्य शहरी निकायों के प्रत्याशियों को 16 जून से पहले अपने चुनावी खर्च की रिपोर्ट चुनाव आयोग को देनी होगी।
यदि तय समय में प्रत्याशी अपनी रिपोर्ट नहीं देगा, तो उस संबंध में कार्रवाई हो सकती है और उस प्रत्याशी के चुनाव लडऩे पर पांच वर्ष का प्रतिबंध लग सकता है। इससे पहले भी राज्य चुनाव आयोग ने 24 नवंबर, 2023 के आदेश में नगर निगम शिमला चुनाव के बाद चुनाव खर्च का हिसाब जमा न करने वाले उम्मीदवारों पर सख्त कार्रवाई की है। आयोग के निर्देश पर ऐसे नौ उम्मीदवारों को पांच साल के लिए अयोग्य घोषित गया था। जो अब पंाच वर्ष तक चुनाव नहीं लड़ सकते। इस संबंध में जिला निर्वाचन अधिकारियों और उपायुक्तों को द्वारा अयोग्य घोषित उम्मीदवारों की सूची जिला की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की गइ थी। बता दें कि इलेक्शन के दौरान आयोग ने चुनाव खर्च की निगरानी के लिए व्यय पर्यवेक्षक नियुक्त किए थे। जांच में सामने आया कि कुछ उम्मीदवारों ने तय समय में चुनाव खर्च का हिसाब जमा नहीं करवाया। इसके बाद शहरी विकास विभाग के निदेशक ने कानून के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें पांच वर्षों के लिए चुनाव लडऩे से अयोग्य घोषित कर दिया।