शिमला : हिमाचल प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी का असर अब कृषि, बागबानी सहित शिक्षा के क्षेत्र को भी प्रभावित कर रहा है। राज्य में गर्मी के असर के चलते राज्य के कई जिलों में अत्यधिक गर्मी वाले क्षेत्रों में स्कूल जाने वाले बच्चों की समयसारिणी में भी परिवर्तन किया गया है। इस संबंध में राज्य सरकार ने संबंधीत उपमंडल अधिकारियों को गर्मी,बरसात और डिजास्टर के दौरान स्कूलों की समयसारिणी तय करने संबंधीत निर्देश जारी किए गए हैं। राज्य में लगातार बढ़ रही गर्मी को देखते हुए जिला सिरमौर के पांवटा साहिब उपमंडल के अंतर्गत आने वाले स्कूलों के खुलने व बंद होने के समय में बदलाव किया गया है। पांवटा में विभिन्न कक्षाओं को संचालीत करने के लिए सुबह सात से साढ़े बारह और एक बजे तक तय किया गया है।
ऊना में पहले से स्कूलों की टाइमिंग में परिवर्तन किया गया है। गर्मी बढऩे से स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति प्रभावित हो रही है। खासकर निचले और मैदानी क्षेत्रों में दोपहर के समय कक्षाओं में बैठना मुश्किल हो रहा है। कई सरकारी स्कूलों में पर्याप्त कूलिंग व्यवस्था नहीं होने से विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बाजार पहुंचने से पहले बागीचों में ही फल खराब
शिक्षा के अलावा गर्मी का असर खेतीबाड़ी सहित बागबानी पर भी पड़ रहा है। राज्य में गुठलीदार फल फसलों के बाजार में पहुंचाने का समय चला हुआ है। आडु, प्लम, चैरी, आम व खुमानी जैसे फल गर्मी के चलते अब जल्द खराब हो रहे हैं ऐसे में बाजार में पहुंचने से पहले की खराब होने का खतरा बढ़ गया है। तेज गर्मी से मक्की की फसल बिजाई के समय में देरी हो रही है साथ ही सब्जियों की फसलों पर असर
पड़ रहा है।
स्कूलों को निर्देश, बच्चों को धूप से बचाएं
पांवटा साहिब के अंर्तगत आने वाले स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्कूल के समय के दौरान बाहरी गतिविधियों, जिसमें खेलकूद, सभाएं या सीधे धूप के संपर्क में आने वाली कोई भी गतिविधि शामिल से बचें।
बदलता मौसम बना बड़ी चुनौती
विशेषज्ञ मानते हैं कि हिमाचल में जलवायु परिवर्तन का असर तेजी से बढ़ रहा है। कम बर्फबारी, जल्दी गर्मी पडऩा और अनियमित वर्षा अब सामान्य होता जा रहा है। इसका सीधा असर किसानों, बागबानों, विद्यार्थियों और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है।
पेयजल योजनाओं पर असर
जल शक्ति विभाग प्रदेश में पेयजल व्यवस्था पर पैनी निगाह रखे हुए है। सीजन में पेयजल संकट न खड़ा हो, इसके मद्देनजर विभाग के प्रदेश मुख्यालय से फील्ड को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए है। हर सप्ताह प्रदेश भर से पेयजल की स्थिति को लेकर रिपोर्ट ली जा रही है। इसके लिए मुख्यालय में नोडल अधिकारी की तैनाती भी की है। अभी तक की रिपोर्ट के तहत प्रदेश में तीन पेयजल योजनाओं पर 75 फीसदी से ऊपर असर पड़ा है।