मध्य पूर्व में जारी तनाव और ईरान युद्ध का असर अब सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एशिया के कई देशों में चावल उत्पादन पर भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है। महंगे ईंधन और उर्वरकों की वजह से खेती की लागत तेजी से बढ़ गई है, जिससे किसान मुश्किल हालात का सामना कर रहे हैं।
खेती की लागत में भारी बढ़ोतरी
दक्षिण-पूर्व एशिया में लाखों छोटे किसान डीजल और खाद की कीमतों में बढ़ोतरी से परेशान हैं। ट्रैक्टर चलाने, सिंचाई और रोपाई जैसे काम अब पहले से कहीं ज्यादा महंगे हो गए हैं, जिससे कई किसानों के लिए खेती जारी रखना मुश्किल हो रहा है।
सप्लाई चेन पर दबाव
मध्य पूर्व में तनाव और Strait of Hormuz Crisis जैसी स्थिति के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। तेल और उर्वरकों की आपूर्ति बाधित होने से एशियाई देशों में जरूरी कृषि इनपुट की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
किसानों की आय पर संकट
चावल उत्पादक देशों में एक तरफ लागत बढ़ रही है, जबकि दूसरी ओर चावल के दाम स्थिर या कम बने हुए हैं। इससे किसानों का मुनाफा घट रहा है और कई जगह उनकी आय पर गंभीर दबाव पड़ गया है।
उत्पादन में गिरावट की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में चावल उत्पादन में गिरावट हो सकती है। कुछ देशों में किसान अगली फसल की बुवाई कम करने या रोकने पर भी विचार कर रहे हैं।
आगे क्या हो सकता है?
यदि सप्लाई चेन जल्द स्थिर नहीं हुई, तो एशिया के कई हिस्सों में खाद्य संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है, जिसका असर वैश्विक बाजार और आम लोगों की थाली तक पहुंच सकता है।