ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को एक प्रस्ताव दिया है। इसके तहत होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और बड़े स्तर पर जारी युद्ध को खत्म करने के लिए सात दिनों के भीतर बातचीत फिर शुरू करने की बात कही गई है।
मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचा प्रस्ताव
द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, अराघची ने बताया कि यह प्रस्ताव इस सप्ताह मध्यस्थों के जरिए हुई अप्रत्यक्ष बातचीत के दौरान अमेरिकी अधिकारियों तक पहुंचाया गया। प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया जानने के लिए व्हाइट हाउस से संपर्क किया गया, लेकिन तत्काल कोई जवाब नहीं मिला।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अहम प्रस्ताव
यह प्रस्ताव महीनों से जारी संघर्ष के बाद कूटनीतिक बातचीत की नई शुरुआत का रास्ता खोल सकता है। संघर्ष के कारण दुनिया के प्रमुख ऊर्जा समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। आमतौर पर दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब 20 से 25% हिस्सा इस समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।
जून के समझौता ज्ञापन का दिया हवाला
अराघची ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पत्रकारों से बातचीत में प्रस्ताव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ईरान की मौजूदा शर्तें काफी हद तक उस समझौता ज्ञापन (एमओयू) जैसी हैं, जिस पर दोनों देश जून में सहमत हुए थे।
ईरान ने कहा- शर्तों में कुछ नया नहीं
अराघची ने कहा कि ईरान ने जो शर्तें रखी हैं, उनमें कुछ भी नया नहीं है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्ताव ट्रंप प्रशासन की ओर से युद्ध खत्म करने के लिए रखी गई शर्तों को पूरा करता है या नहीं।
होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर मतभेद
तेहरान ने जून में बनी सहमति की व्याख्या इस रूप में की थी कि इसमें होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान के नियंत्रण को मान्यता दी गई है। हालांकि, अमेरिका और क्षेत्र में उसके सहयोगी इस रुख को खारिज करते रहे हैं। यही मतभेद समुद्री मार्ग की स्थिति को लेकर बातचीत में अहम मुद्दा बना हुआ है।
ईरान पर हमले के बाद बढ़ा तनाव
रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी के आखिर में इजराइल और अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी सुरंगें बिछाईं और जहाजों को चेतावनी दी कि वे तेहरान के साथ समन्वय किए बिना इस रास्ते से गुजरने की कोशिश न करें।
ऊर्जा बाजार पर पड़ा असर
इसके बाद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बेहद कम हो गई। इस घटनाक्रम का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा और दुनिया के कई हिस्सों में ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई।
ट्रंप ने कूटनीतिक संपर्क की पुष्टि की
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क की बात स्वीकार की। ट्रंप ने कहा कि ईरान संघर्ष खत्म करने के लिए समझौते पर पहुंच सकता है या फिर उसे “पूरी तरह खत्म होने” का सामना करना पड़ सकता है। उनके भाषण के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य हॉल से बाहर चले गए।
पेजेशकियन ने बातचीत के लिए रखी शर्त
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ट्रंप के बयान का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ईरान को बाहरी खतरों से खुद को बचाने के लिए पर्याप्त ताकत की जरूरत है। पेजेशकियन ने कहा कि ईरान को ताकतवर होना चाहिए, ताकि उसे धमकाया न जा सके और उसके भविष्य को खतरे में न डाला जा सके। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत, कूटनीति और वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन ताकत के दम पर बात मनवाने की भाषा स्वीकार नहीं करेगा।
परमाणु कार्यक्रम पर बना हुआ है विवाद
ट्रंप का कहना है कि अमेरिका इजराइल के साथ युद्ध में इसलिए शामिल हुआ, ताकि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोका जा सके। दूसरी ओर, पेजेशकियन ने कहा कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेगा, लेकिन देश को शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक विकसित करने का अधिकार है।
परमाणु मुद्दा बातचीत में बड़ी चुनौती
ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर विवाद किसी समझौते तक पहुंचने में अब भी प्रमुख बाधाओं में से एक है। वॉशिंगटन ऐसी पुख्ता व्यवस्था चाहता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि तेहरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। वहीं, ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश को शांतिपूर्ण और नागरिक जरूरतों के लिए परमाणु कार्यक्रम चलाने की अनुमति मिलनी चाहिए।