केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने गुरुवार को वस्त्र मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं और संस्थागत सुधारों की समीक्षा करते हुए कहा कि एकीकृत वस्त्र एवं परिधान विकास केंद्र (आईटीएडीसी) देश के वस्त्र उद्यमियों और एमएसएमई के लिए एकीकृत विकास केंद्र के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये केंद्र कौशल विकास, तकनीकी सहायता, ऋण सुविधा, निर्यात संवर्धन और बाजार से जुड़ाव जैसी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराएंगे।
आईटीएडीसी की भूमिका होगी और मजबूत
समीक्षा बैठक में वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव, वस्त्र आयुक्त वृंदा मनोहर देसाई और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में पूर्व पावरलूम सेवा केंद्रों को आईटीएडीसी में परिवर्तित करने की प्रगति की समीक्षा की गई। गिरिराज सिंह ने कहा कि पुनर्गठित आईटीएडीसी वस्त्र उद्यमियों, एमएसएमई और उद्योग से जुड़े अन्य हितधारकों के लिए वन-स्टॉप सुविधा केंद्र के रूप में कार्य करेंगे। यहां कौशल विकास, परीक्षण, डिजाइन सहायता, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता विकास, संस्थागत ऋण, निर्यात संवर्धन और बाजार संपर्क जैसी सेवाएं उपलब्ध होंगी।
पहली तिमाही में उल्लेखनीय प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में आईटीएडीसी ने 1,170 से अधिक प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया और जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 1,770 वस्त्र इकाइयों तक पहुंच बनाई। केंद्रों ने उद्यमियों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराने, ई-कॉमर्स से जोड़ने, उत्पाद आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा बांस, भांग, पटसन, केले और अनानास जैसे नए रेशों के व्यावसायीकरण में भी सहयोग दिया। मंत्री ने कहा कि आईटीएडीसी अब केवल प्रशिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि नवाचार और उद्यम विकास केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं, जो व्यवसायों को शुरुआती चरण से लेकर बाजार विस्तार तक सहयोग देंगे।
एटीयूएफएस से 53 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश
बैठक में संशोधित प्रौद्योगिकी उन्नयन निधि योजना (एटीयूएफएस) की भी समीक्षा की गई। स्वतंत्र मूल्यांकन के अनुसार, इस योजना के तहत 2,776 करोड़ रुपये की सब्सिडी के माध्यम से 10,061 वस्त्र इकाइयों को सहायता मिली, जिससे 53,121 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ। योजना के अंतर्गत लगभग 6.7 लाख आधुनिक वस्त्र मशीनों की स्थापना हुई और करीब 3.6 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए।
हर एक करोड़ की सब्सिडी से 19 करोड़ का निवेश
अध्ययन के अनुसार, एटीयूएफएस के तहत दी गई प्रत्येक एक करोड़ रुपये की सब्सिडी से लगभग 19 करोड़ रुपये का निजी निवेश आया और औसतन 130 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए। कुल सब्सिडी का 46 प्रतिशत हिस्सा बुनाई क्षेत्र को मिला, जबकि नए रोजगारों में लगभग 1.7 लाख नौकरियां समेकित इकाइयों में सृजित हुईं।
नई वेबसाइट और केपीआई पोर्टल लॉन्च
गिरिराज सिंह ने वस्त्र आयुक्त कार्यालय की नई वेबसाइट का उद्घाटन किया, जिसमें योजनाओं, सेवाओं, आईटीएडीसी और पावरलूम क्लस्टरों की जानकारी आधुनिक एवं उपयोगकर्ता-अनुकूल स्वरूप में उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने आईटीएडीसी के लिए विकसित की परफॉर्मेंस इंडिकेटर (केपीआई) पोर्टल का भी शुभारंभ किया। यह पोर्टल वास्तविक समय में प्रदर्शन की निगरानी, डिजिटल डैशबोर्ड और डेटा विश्लेषण के माध्यम से संस्थागत पारदर्शिता और सेवा वितरण को मजबूत करेगा।
संस्थागत समन्वय पर जोर
वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव ने कहा कि क्षेत्रीय इकाइयों, वस्त्र समिति, निर्यात संवर्धन परिषदों, वस्त्र अनुसंधान संस्थानों और उद्योग संगठनों के बीच बेहतर समन्वय से सरकारी योजनाओं का प्रभाव और अधिक बढ़ाया जा सकता है। बैठक के अंत में मंत्रालय ने तकनीकी उन्नयन, उद्यमिता, संस्थागत सहयोग और रोजगार सृजन के माध्यम से भारत के वस्त्र क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।