Monday, August 10, 2026
BREAKING
डेमोक्रेटिक सीनेटर का दावा- ‘युद्ध में हार चुके हैं राष्ट्रपति ट्रंप, लंबा खिंचा तो अमेरिका को होगा भारी नुकसान’ दिल्ली मेट्रो पर चढ़ा देशभक्ति का रंग, ‘हर घर तिरंगा’ थीम वाली खास मेट्रो शुरू: Har Ghar Tiranga यूक्रेन ने रूस के औद्योगिक शहर को बनाया निशाना, 13 की मौत और 39 घायल आखिरकार बनी सहमति; Haryana में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म...मंत्री अनिल विज से हुई बैठक में लिया फैसला मिलावटखोरों की खैर नहीं...खाद्य सुरक्षा पर हरियाणा सरकार अलर्ट, मानकों से खिलवाड़ पर कार्रवाई का तंत्र मजबूत करने की तैयारी अम्बाला फ्री होल्ड नीति पर अनिल विज का दबाव आया काम, 11 अगस्त को अधिकारियों के साथ होगी अहम बैठक Kangra: ओपीएस में बदलाव का सवाल ही नहीं, कांग्रेस सरकार अपने फैसले पर कायम : मुकेश अग्निहोत्री घर से नीट का रिजल्ट देखने गया माता-पिता का इकलौता बेटा नहीं लौटा वापिस, परिवार ने लोगों से की मदद की अपील पंजाब में BJP-अकाली गठबंधन की अटकलों पर हरियाणा CM नायब सैनी का बड़ा बयान, जानें क्या बोले स्वतंत्रता दिवस से पहले पंजाब में सुरक्षा कड़ी, DGP ने तैयारियों का लिया जायजा

हरियाणा

अम्बाला फ्री होल्ड नीति पर अनिल विज का दबाव आया काम, 11 अगस्त को अधिकारियों के साथ होगी अहम बैठक

10 अगस्त, 2026 06:26 PM

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : हरियाणा सरकार की 13 अगस्त को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक से पहले अम्बाला छावनी की फ्री होल्ड संपत्तियों से जुड़ी नीति को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करते हुए प्रस्तावित शर्तों पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। फ्री होल्ड की पिछली कैबिनेट में नीति बनाकर लाने वाले अधिकारियों के साथ 11 अगस्त को अनिल विज की महत्वपूर्ण बैठक चंडीगढ़ हरियाणा सचिवालय में प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस बैठक में नीति की उन शर्तों पर विस्तार से चर्चा होगी, जिन्हें लेकर अम्बाला छावनी के लोगों में असंतोष है। विज का जोर इस बात पर है कि फ्री होल्ड की नीति ऐसी होनी चाहिए, जिससे दशकों से अपनी संपत्तियों पर अधिकार की प्रतीक्षा कर रहे लोगों को वास्तविक राहत मिले। उनका कहना है कि यदि शर्तें इतनी कठिन और आर्थिक रूप से बोझिल होंगी कि आम आदमी उन्हें पूरा ही न कर सके तो फ्री होल्ड का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।

1977 का समझौता बना पूरे विवाद की पृष्ठभूमि
अनिल विज ने अम्बाला छावनी की भूमि का इतिहास सामने रखते हुए बताया कि 5 फरवरी 1977 तक पूरा क्षेत्र कैंटोनमेंट बोर्ड के अधीन था। तत्कालीन रक्षा मंत्री बंसीलाल के समय 1063 एकड़ जमीन को कैंटोनमेंट से अलग कर नगर पालिका को दिया गया था। इस व्यवस्था के तहत हरियाणा सरकार को भारत सरकार की जमीन का मालिकाना मिलना था और इसके बदले सेना को 150 एकड़ जमीन मुफ्त उपलब्ध कराई जानी थी। विज के अनुसार लंबे समय तक इस समझौते पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। वर्ष 2000 तक किसी सरकार ने इस दिशा में काम नहीं किया, लेकिन उनके प्रयासों से सेना को 150 एकड़ जमीन उपलब्ध कराकर समझौता पूरा कराया गया। इसके बाद अम्बाला की संपत्तियों से जुड़ी रजिस्ट्री व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया। सामान्य संपत्ति रजिस्ट्री के स्थान पर कई मामलों में केवल भवन की रजिस्ट्री और जमीन का स्वामित्व सरकार के नाम दर्ज होने लगा। यही व्यवस्था आगे चलकर लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती गई।

बैंक लोन से लेकर विरासत तक लोगों को परेशानी
विज का कहना है कि जमीन का मालिकाना स्पष्ट नहीं होने से अम्बाला छावनी के हजारों संपत्ति मालिकों को विभिन्न स्तरों पर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बैंक से ऋण लेने, भवन का नक्शा पास कराने, संपत्ति के उत्तराधिकार, खरीद-फरोख्त और हस्तांतरण जैसी प्रक्रियाओं में लोगों को परेशानी आती है।ऐसे में फ्री होल्ड नीति से लोगों को उम्मीद थी कि उनकी संपत्तियों के अधिकार संबंधी समस्या का स्थायी समाधान होगा। लेकिन प्रस्तावित नीति की शर्तों ने राहत की उम्मीद के साथ नई चिंता भी पैदा कर दी है।

कलेक्टर रेट पर जमीन का भुगतान सबसे बड़ा सवाल
अनिल विज ने वकीलों के साथ बैठकर प्रस्तावित नीति का अध्ययन किया और कई प्रमुख आपत्तियां उठाईं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण पूरी जमीन की कीमत कलेक्टर रेट पर वसूलने का प्रावधान है। विज के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के पास 1000 गज जमीन है और कलेक्टर रेट 60 हजार रुपये प्रति गज है तो जमीन का मूल्य करोड़ों रुपये बैठता है। ऐसे में आम और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए इतनी बड़ी राशि जमा करना बेहद मुश्किल होगा।उनका तर्क है कि दशकों से संपत्ति पर रह रहे परिवारों को राहत देने के लिए बनाई जा रही नीति में बाजार अथवा कलेक्टर रेट के आधार पर भारी आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं होगा।

25 प्रतिशत तुरंत, 75 प्रतिशत एक साल में देने की शर्त पर भी आपत्ति
प्रस्तावित नीति में आवेदन के साथ 25 प्रतिशत राशि जमा करने और शेष 75 प्रतिशत राशि एक वर्ष के भीतर जमा करने की शर्त पर भी सवाल उठ रहे हैं। विज का कहना है कि बड़ी रकम एक साथ जमा करना अधिकांश परिवारों के लिए संभव नहीं होगा। इसके अलावा निर्धारित अवधि में भुगतान न करने पर संपत्ति सील करने और सरकार द्वारा कब्जे में लेने का प्रावधान भी चिंता का विषय है। इतना ही नहीं, ऐसी स्थिति में संपत्ति को आगे किसी अन्य व्यक्ति को बेचने का प्रावधान लोगों की आशंकाओं को और बढ़ा रहा है।विज का मानना है कि जिस नीति का उद्देश्य लोगों को संपत्ति का स्थायी अधिकार देना है, उसमें ऐसी कठोर शर्तें नहीं होनी चाहिए, जिनसे लोग अपनी ही संपत्ति को लेकर असुरक्षित महसूस करें।

150 साल पुराने दस्तावेज मांगने पर भी विज ने उठाया सवाल
फ्री होल्ड के लिए 150 साल पुराने मूल दस्तावेज जमा करने की शर्त को भी अनिल विज ने अव्यावहारिक बताया है। उनका कहना है कि इतनी पुरानी संपत्तियों के मूल दस्तावेज आज अधिकांश परिवारों के पास उपलब्ध नहीं हो सकते। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी परिवार के पास 150 साल पुराना मूल दस्तावेज नहीं है, तो क्या वह फ्री होल्ड के अधिकार से वंचित कर दिया जाएगा? विज का सुझाव है कि पुराने दस्तावेज उपलब्ध न होने की स्थिति में बिजली बिल, संपत्ति कर रसीद और अन्य वैध सरकारी रिकॉर्ड जैसे वैकल्पिक प्रमाणों को स्वीकार किया जाना चाहिए।

कैबिनेट में विज की आपत्ति के बाद एजेंडा हुआ डिफर
अनिल विज ने स्पष्ट किया कि जब फ्री होल्ड नीति का एजेंडा कैबिनेट में आया तो उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि वह अम्बाला छावनी से सात बार विधायक रहे हैं और इतनी महत्वपूर्ण नीति बनाते समय उनसे राय तक नहीं ली गई। विज ने मांग की कि नीति को अंतिम रूप देने से पहले अम्बाला के लोगों और संबंधित पक्षों को बुलाकर उनकी बात सुनी जाए। उनकी आपत्ति के बाद एजेंडा डिफर कर दिया गया। अब 13 अगस्त की कैबिनेट बैठक से पहले अधिकारियों के साथ होने वाली बैठक को इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

"पहले जनता, फिर सरकार" के रुख पर कायम विज
अनिल विज ने इस मामले में अपना राजनीतिक रुख भी साफ कर दिया है। उनका कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता सरकार के भीतर बातचीत के जरिए नीति में आवश्यक बदलाव कराना है। लेकिन यदि जनता की उचित मांगों को स्वीकार नहीं किया जाता और लोग आंदोलन के लिए मजबूर होते हैं तो वह जनता के साथ खड़े होंगे। उन्होंने साफ संदेश दिया है कि अम्बाला छावनी के लोगों के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर वह किसी भी कीमत पर उनकी आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। यही कारण है कि 11 अगस्त की अधिकारियों के साथ बैठक को लेकर अम्बाला के लोगों की निगाहें भी टिकी हैं।

रियायती दर, पांच साल की मोहलत और ऑनलाइन प्रक्रिया की मांग
अम्बाला के विभिन्न संगठनों और विधायकों की ओर से भी नीति में बदलाव की मांग की जा रही है। प्रमुख मांगों में कलेक्टर रेट के बजाय रियायती दर पर जमीन का भुगतान, 25 प्रतिशत के बजाय 10 प्रतिशत प्रारंभिक राशि और शेष भुगतान के लिए पांच वर्ष की समय सीमा शामिल है। इसके अलावा पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर वैकल्पिक सरकारी प्रमाणों को मान्यता देने और पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन तथा समयबद्ध करने की मांग भी उठ रही है।अब गेंद सरकार और अधिकारियों के पाले में है। 11 अगस्त की बैठक में प्रस्तावित शर्तों पर क्या सहमति बनती है और 13 अगस्त की कैबिनेट में फ्री होल्ड नीति किस स्वरूप में सामने आती है, यह अम्बाला छावनी के हजारों परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल अनिल विज ने यह स्पष्ट कर दिया है कि फ्री होल्ड के नाम पर जनता पर नया आर्थिक बोझ डालने के बजाय नीति का पहला उद्देश्य लोगों को वास्तविक राहत देना होना चाहिए।

 

Have something to say? Post your comment

और हरियाणा खबरें

आखिरकार बनी सहमति; Haryana में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म...मंत्री अनिल विज से हुई बैठक में लिया फैसला

आखिरकार बनी सहमति; Haryana में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म...मंत्री अनिल विज से हुई बैठक में लिया फैसला

मिलावटखोरों की खैर नहीं...खाद्य सुरक्षा पर हरियाणा सरकार अलर्ट, मानकों से खिलवाड़ पर कार्रवाई का तंत्र मजबूत करने की तैयारी

मिलावटखोरों की खैर नहीं...खाद्य सुरक्षा पर हरियाणा सरकार अलर्ट, मानकों से खिलवाड़ पर कार्रवाई का तंत्र मजबूत करने की तैयारी

पंजाब में BJP-अकाली गठबंधन की अटकलों पर हरियाणा CM नायब सैनी का बड़ा बयान, जानें क्या बोले

पंजाब में BJP-अकाली गठबंधन की अटकलों पर हरियाणा CM नायब सैनी का बड़ा बयान, जानें क्या बोले

Haryana : किरण चौधरी से मिलीं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता, संगठन और सरकार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की अटकलें

Haryana : किरण चौधरी से मिलीं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता, संगठन और सरकार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की अटकलें

Haryana: CM सैनी ने लाडो लक्ष्मी योजना की 10वीं किस्त की जारी, 9.98 लाख महिलाओं के खाते में आए 209 करोड़

Haryana: CM सैनी ने लाडो लक्ष्मी योजना की 10वीं किस्त की जारी, 9.98 लाख महिलाओं के खाते में आए 209 करोड़

"कांग्रेस राज में नौकरी के लिए खेत, घर और गहने तक बिकते थे", BJP प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गुप्ता ने विपक्ष पर साधा निशाना

सरकार ने कबूलाः पिछले 12 साल में धनाढ्यों का ₹10 लाख करोड़ माफ किया, किसानों की एक चवन्नी भी माफ नहीं- दीपेंद्र हुड्डा

सरकार ने कबूलाः पिछले 12 साल में धनाढ्यों का ₹10 लाख करोड़ माफ किया, किसानों की एक चवन्नी भी माफ नहीं- दीपेंद्र हुड्डा

मुख्यमंत्री ने 50 लाख से अधिक लाभार्थियों के खातों में डाली 1,595 करोड़ रुपए से अधिक की राशि

मुख्यमंत्री ने 50 लाख से अधिक लाभार्थियों के खातों में डाली 1,595 करोड़ रुपए से अधिक की राशि

संसद में गूंजा मंडी मजदूरों की आजीविका और सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा : कुमारी सैलजा

संसद में गूंजा मंडी मजदूरों की आजीविका और सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा : कुमारी सैलजा

बिना टिकट यात्रियों पर रोडवेज का शिकंजा, विशेष चेकिंग अभियान शुरू

बिना टिकट यात्रियों पर रोडवेज का शिकंजा, विशेष चेकिंग अभियान शुरू