अमेरिका ने चीन से तिब्बती बौद्ध धर्म के प्रमुख आध्यात्मिक नेता पंचेन लामा गेदुन चोएकी न्यिमा की तुरंत रिहाई की मांग की है। यह अपील उनके लापता होने की 31वीं वर्षगांठ पर की गई है।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि 18 मई को पंचेन लामा के लापता होने को 31 साल पूरे हो गए। उन्होंने याद दिलाया कि दलाई लामा द्वारा उन्हें पंचेन लामा घोषित किए जाने के कुछ दिनों बाद ही, जब वे महज छह साल के थे, चीनी अधिकारियों ने उन्हें और उनके पूरे परिवार को गायब कर दिया था।
अमेरिका की सख्ती
पिगॉट ने कहा, “चीनी अधिकारियों को तुरंत गेदुन चोएकी न्यिमा और उनके परिवार को रिहा करना चाहिए। तिब्बतियों या चीन में किसी भी समुदाय को उनके धार्मिक विश्वासों के कारण प्रताड़ित करना बंद करना चाहिए।”
अमेरिका ने एक बार फिर तिब्बत में चीन की धार्मिक नीतियों और बौद्ध संस्थानों में उसके हस्तक्षेप की कड़ी आलोचना की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने दोहराया कि तिब्बती बौद्ध समुदाय को अपने धार्मिक नेताओं का चयन करने की पूर्ण स्वतंत्रता होनी चाहिए और इसमें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।
पंचेन लामा का महत्व
पंचेन लामा को तिब्बती बौद्ध धर्म में दलाई लामा के बाद दूसरा सबसे उच्च आध्यात्मिक पद माना जाता है। 1995 में दलाई लामा द्वारा गेदुन चोएकी न्यिमा को पंचेन लामा घोषित किए जाने के बाद चीन ने इसे अस्वीकार कर दिया था और अपनी पसंद के ग्यैनकैन नोरबू को पंचेन लामा घोषित कर दिया था।
अमेरिका ने स्पष्ट किया कि वह तिब्बतियों की धार्मिक स्वतंत्रता, उनकी संस्कृति और भाषाई पहचान की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ा है। यह मुद्दा लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशील बना हुआ है, क्योंकि चीन तिब्बत पर अपना पूर्ण नियंत्रण बनाए हुए है और धार्मिक नेताओं की नियुक्ति में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करता है।