चंडीगढ़ : भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुग ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एक ओर मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के हस्तक्षेप की नौबत आ गई है, वहीं दूसरी ओर नशा तस्करों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट के इस्तेमाल में सरकार की देरी सामने आई है। ये दोनों मामले आम आदमी पार्टी सरकार के जनसेवा और सुशासन के दावों की वास्तविकता उजागर करते हैं। पंजाब की जनता को विज्ञापनों और घोषणाओं की नहीं, बल्कि सुरक्षित व्यवस्था और जमीन पर दिखाई देने वाली कार्रवाई की जरूरत है।
चुग ने कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत संचालित बसों की सुरक्षा को लेकर एनएचआरसी का नोटिस गंभीर विषय है। जो श्रद्धालु भगवान के दर्शन की आस्था लेकर घर से निकलते हैं, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की पहली जिम्मेदारी है। तीर्थयात्रा जैसी संवेदनशील योजना में सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठना शासन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। भगवंत मान सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बसों की फिटनेस, चालकों की योग्यता और अन्य आवश्यक सुरक्षा मानकों की नियमित जांच सुनिश्चित की गई है या नहीं।
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार योजनाओं का राजनीतिक प्रचार करने में आगे रहती है, लेकिन जब जवाबदेही का समय आता है तो उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगते हैं। एनएचआरसी का नोटिस कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक संवैधानिक आयोग की कार्रवाई है, जिसे सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए। श्रद्धालुओं की आस्था और सुरक्षा को राजनीतिक प्रचार का माध्यम बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को सुरक्षा संबंधी शिकायतों पर जवाब देना चाहिए और किसी भी लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
चुग ने नशे के मुद्दे पर भगवंत मान सरकार को घेरते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद ही पंजाब सरकार ने इस दिशा में कदम उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने पंजाब दौरे के दौरान यह सवाल उठाया था कि देश में इस कानून के तहत 929 मामले दर्ज हो चुके हैं, लेकिन पंजाब में एक भी मामला क्यों दर्ज नहीं हुआ। इसके बाद राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना जारी करना यह सवाल खड़ा करता है कि नशे के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने का दावा करने वाली सरकार ने इस महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान का इस्तेमाल पहले क्यों नहीं किया।
उन्होंने कहा कि पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट, 1988 नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को रोकने के लिए महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान उपलब्ध कराता है। निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और शर्तों के अधीन इस कानून के तहत नशे के अवैध कारोबार को रोकने के उद्देश्य से एक वर्ष तक निवारक हिरासत का आदेश दिया जा सकता है। पंजाब सरकार द्वारा अधिसूचना जारी करना केवल पहला कदम है। असली परीक्षा यह होगी कि इस कानून का प्रभावी और निष्पक्ष इस्तेमाल करके नशा तस्करी के नेटवर्क पर कितनी ठोस कार्रवाई की जाती है।
चुग ने कहा कि पंजाब के युवा नशे की गिरफ्त में जा रहे हैं और परिवार अपने बच्चों का भविष्य बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी केवल अभियान चलाने और बड़े-बड़े दावे करने तक सीमित नहीं हो सकती। नशा तस्करों के पूरे नेटवर्क की पहचान करना, उनके वित्तीय स्रोतों पर कार्रवाई करना, पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही तय करना तथा नशे की लत से जूझ रहे लोगों के उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था करना आवश्यक है। सरकार को यह भी बताना चाहिए कि कानून के इस्तेमाल में हुई देरी के लिए जिम्मेदार कौन है।
उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान की राजनीति घोषणाओं और प्रचार के इर्द-गिर्द घूमती रही है, जबकि पंजाब की जनता सुरक्षा, जवाबदेही और ठोस परिणाम चाहती है। चाहे तीर्थयात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा हो या पंजाब की युवा पीढ़ी को नशे से बचाने की लड़ाई, सरकार अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकती। भाजपा पंजाब को नशे के अभिशाप से मुक्त कराने के लिए प्रतिबद्ध है और 2029 तक पंजाब को नशामुक्त बनाने के संकल्प के साथ इस लड़ाई को आगे बढ़ाएगी।
चुग ने कहा कि भगवंत मान सरकार को पंजाब की जनता के सामने जवाब देना चाहिए कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर बार-बार सवाल क्यों उठ रहे हैं। पंजाब को प्रचार नहीं, परिणाम चाहिए; घोषणाएं नहीं, जवाबदेही चाहिए। भाजपा जनहित, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और पंजाब के युवाओं के सुरक्षित भविष्य के लिए अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी।