Sunday, April 05, 2026
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हरियाणा

देश की सुरक्षा करने वाले सशस्त्र बलों के हितों व भविष्य की सुरक्षा करना सरकार का दायित्व : दीपेंद्र हुड्डा

02 अप्रैल, 2026 08:46 PM

चंडीगढ़ : सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने आज लोकसभा में केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल 'CAPF' (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पर कांग्रेस पार्टी की तरफ से चर्चा करते हुए कहा कि अग्निपथ योजना लाकर मिलिट्री को कच्चा करने वाली बीजेपी सरकार से पैरा-मिलिट्री के अधिकारी, जवान न्याय की क्या उम्मीद करें। उन्होंने कहा कि सरकार जो कानून लेकर आई यही वो CAPF कर्मियों के जीवन और उनके भविष्य पर तलवार लटकाने का काम करेगा। उन्होंने सरकार के दोहरे रवैये की पोल खोलते हुए कहा कि देश के गृहमंत्री ने इसी सदन में कहा कि हमने नक्सलियों को साफ कर दिया, लेकिन आज CAPF बिल 2026 के जरिये भाजपा सरकार ने CAPF जवानों और अफसरों के भविष्य की संभावनाओं को ही साफ कर दिया है। जिस CAPF ने देश में 7.5 करोड़ पेड़ लगाए, आज सरकार उन्हीं के भविष्य की जड़ें काट रही है। ये जवान हमारी रक्षा करते हैं लेकिन सरकार इनके भविष्य की रक्षा करने से हाथ पीछे खींच रही है। सुप्रीम कोर्ट ने न्याय दिया लेकिन सरकार अन्याय कर रही है। हनुमान जयंती की चर्चा करते हुए दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि आज हनुमान जयंती है और हम कहते हैं "जय बजरंग बली, तोड़ दुश्मन की नली"। जिन CAPF अफसरों, जवानों ने दुश्मनों की नली तोड़ी, आज बीजेपी सरकार उनके भविष्य की नली तोड़ रही है। दीपेन्द्र हुड्डा ने मांग करी कि CAPF के लिए NFFU लागू हो, सेना की तर्ज पर CAPF कर्मियों को ओल्ड पेंशन दी जाए, देश के हर राज्य में सैनिक कल्याण बोर्ड की तर्ज पर का अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड का गठन किया जाए। स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढाते हुए CGHS डिस्पेंसरी का विस्तार किया जाए। रोहतक, रेवाड़ी और बहादुरगढ़ में उनके द्वारा मंजूर कराई गई तीनों CGHS डिस्पेंसरी को बनाया जाए।


नई बटालियन बने, फोर्स बढ़ाई जाए। झज्जर में उनके द्वारा मंजूर कराए गए BSF, CRPF ग्रुप सेंटर का काम पूरा कराया जाए। CAPF की छुट्टियों को बढ़ाया जाए, वायदे के मुताबिक साल में 100 दिन अवकाश मिले। उन्होंने रोहतक (मोखरा) निवासी CRPF के जांबाज असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक जिन्होंने हाल ही में छत्तीसगढ़ में नक्सलियों से लोहा लेते हुए अपना एक पैर गँवा दिया, उनके अदम्य साहस की शौर्य गाथा आज देश की संसद में सुनाई और CAPF कर्मियों के अधिकार देने की मांग की। दीपेन्द्र हुड्डा ने बताया कि हरियाणा के गांव मोखरा, रोहतक निवासी CRPF के असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक का उदाहरण देते हुए बताया कि 14 साल पहले UPSC परीक्षा पास करके CRPF में काडर ऑफिसर के रूप में जॉइन करने वाले अजय मालिक के 14 साल का जीवन सफर किसी गौरव गाथा से कम नहीं। उन्होंने 2013 में CRPF की गाड़ी खाई में गिरने पर खाई में कूदकर नौ लोगों की जान बचाई जिसके लिए उन्हें प्रधानमंत्री जीवन रक्षा मेडल मिला, 2017 में जम्मू कश्मीर में हिजबुल मुजाहिदीन के 3 आतंकवादियों को ढेर करने पर राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक से पुरस्कृत किया गया। गणतंत्र दिवस परेड में अपनी टुकड़ी का नेतृत्व भी किया और झारखंड में एक करोड़ के इनामी नक्सली को मुठभेड़ में मार गिराया। हाल ही में सरंडा के जंगलों में नक्सलियों से लड़ते हुए बम ब्लास्ट में अपना एक पैर गंवा बैठे। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि अनेक वीरता मेडल से सम्मानित असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक 14 साल वीरता से देश सेवा करने के बाद आज भी अपनी पहली पदोन्नति (प्रमोशन) का इंतजार कर रहे हैं। अजय मलिक की तरह ही राजस्थान के चेतन चीता, बिहार के विभोर, महाराष्ट्र के सागर बुराडे जैसे सैंकड़ों CAPF के काडर ऑफिसर आज भी अपने प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं। CAPF में विसंगतियों को बताते हुए सांसद दीपेन्द्र ने कहा कि अगर फौज में कोई लेफ्टिनेंट पद पर भर्ती हुआ होगा, तो 14 साल में कर्नल तक पहुंच गया होगा और जो पुलिस में है वो आज DIG स्तर पर पहुंच चुका होगा।


यहां तक कि CRPF और BSF में जो नॉन एक्जीक्यूटिव पद पर जो आए, उनको भी पांच प्रमोशन मिल गया होगा। CAPF कर्मियों के लिए यह केवल प्रमोशन की नहीं बल्कि स्वाभिमान की लड़ाई है। उन्होंने बताया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अजय मलिक से मिलने दिल्ली के सीआरपीएफ अस्पताल में गये थे। दीपेन्द्र हुड्डा ने गृह मंत्री से आग्रह किया कि बिल पारित करने से वो इनके पास जाएं। उनसे बात करने के बाद इस बिल को पास करें। लेकिन अफसोस की बात है कि CAPF कर्मियों न्याय दिलाना तो दूर सरकार को उनसे मिलने का भी समय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में जो स्थिति है उसे देखते हुए फ़ौज और अर्धसैनिक बलों को कमजोर करने का समय नहीं है। देश की फ़ौज और अर्धसैनिक बलों को ताकतवर बनाने की जरूरत है। प्रमोशन न होने के पीछे के कारण बताते हुए दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि CAPF, CRPF, BSF, ITBP में काडर ऑफिसर पोस्ट को ग्रुप ए सर्विसेज़ में शुमार नहीं किया जाता और कुछ पदों पर बड़े पैमाने पर IPS अफसरों की नियुक्तियां हो जाती है। ये सवाल केवल 13 हज़ार काडर ऑफिसर पोस्ट का नहीं बल्कि साढ़े 11 लाख की पूरी फोर्स के भविष्य से जुड़ा है। क्योंकि एक प्रमोशन होगी तो उसका असर नीचे की 5 रैंक पर होगा। इसीलिये आज सारी फोर्स का मनोबल गिरा हुआ है। दु:ख की बात ये है कि नक्सलियों, आतंकवादियों से लड़ने वाले हमारे CAPF के अधिकारी जवानों को कोर्ट में अपनी ही सरकार से लड़ना पड़ा और सुप्रीम कोर्ट ने इनके पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि CAPF अधिकारी ऑर्गनाइज़्ड ग्रुप ए सर्विस के हकदार हैं। सरकार तुरंत काडर रिव्यू करे, सर्विस रूल बनाए। आईपीएस डेप्यूटेशन को 2 साल में फेज आउट करे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटनेके लिये सरकार बिल ले आयी। क्योंकि OGAS मिलते ही इनका करिअर प्रोग्रेशन, प्रमोशन का रास्ता तय हो जाता है। उन्होंने मांग करी कि OGAS को ज्यों का त्यों लागू किया जाए और इन अधिकारियों को OGAS में शामिल कर प्रमोशन कारास्ता साफ किया जाए। इसके अलावा, 11 जनवरी, 2023 को माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में सभी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को ‘भारत संघ के सशस्त्र बल’ माना और सभी जवान और अधिकारी पुरानी पेंशन योजना (OPS ) के दायरे में आने का निर्देश दिया था। दीपेन्द्र हुड्डा ने सेना की तर्ज पर CAPF कर्मियों को ओल्ड पेंशन देने की मांग की।


सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने CAPF के पे-स्केल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 2019 में बीजेपी सरकार की कैबिनेट ने CAPF अधिकारियों के लिए Non Function Financial Upgradation (NFFU) मंजूर किया था। यानी अगर कहीं प्रमोशन नहीं भी मिल पाया तो कम से कम समकक्ष अधिकारियों के तुलना में उनको पे-स्केल की बढ़ोतरी मिल जाएगी। लेकिन आज इस बिल के माध्यम से उसको भी निरस्त किया जा रहा है। उन्होंने CAPF अधिकारियों के लिए NFFU लागू करने की मांग की।


दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री ने सभी CAPF सैनिकों को साल में 100 दिन के अवकाश की घोषणा की थी। अभी CAPF कर्मियों को 60 दिन का अवकाश का प्रावधान है। जिसमें से CISF जवान को मात्र 30 दिन का अवकाश दिया जाता है। इनकी छुट्टियों को बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि CAPF फोर्सेस में प्रतिवर्ष 10,000 वीआरएस, 150 आत्महत्याएं, 2000 इस्तीफे हो रहे हैं। ये 5 साल का आंकड़ा है, जो संसद में सरकार ने दिया है। इस पर सरकार को चिंतन करना चाहिए। सुकमा में 78 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे, उससे दोगुनी आत्महत्याएं हो रही है।
उन्होंने आर्मी फ्लैग डे फंड की तर्ज पर पैरा-मिलिट्री फ्लैग डे फंड बनाने की मांग की ताकि जरूरत पड़ने पर पूर्व सैनिक, उनके परिवार को आर्थिक सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि देश के हर राज्य में सैनिक कल्याण बोर्ड की तर्ज पर का अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड का गठन किया जाए। स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढाते हुए CGHS डिस्पेंसरी का विस्तार किया जाए। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि उन्होंने यूपीए सरकार के समय काफी प्रयासों से अपने लोकसभा क्षेत्र के लिए रोहतक, रेवाड़ी और बहादुरगढ़ में 3 CGHS डिस्पेंसरी मजूर कराई थी। लेकिन आज तक उन पर काम शुरू नहीं हुआ है। इन तीनों CGHS डिस्पेंसरी को बनाया जाए।


दीपेन्द्र हुड्डा ने सरकार से मांग करी कि पिछले 10 साल से कोई नई बटालियन भी नहीं बनी। नई बटालियन बने, फोर्स बढ़ाई जाए। हरियाणा के झज्जर में तत्कालीन गृहमंत्री के माध्यम से BSF, CRPF का ग्रुप सेंटर मंजूर कराकर बटालियन हेडक्वार्टर कॉम्प्लेक्स की नींव रखी गई थी, जहां केंद्रीय विद्यालय और CGHS अस्पताल भी आना था। लेकिन आज तक उसकी केवल चारदीवारी ही बनाई गई, अंदर कोई काम नहीं हुआ। दीपेन्द्र हुड्डा ने इन सारी मांगों को मानते हुए CAPF, CRPF, BSF, ITBP के जवानों और अफसरों को न्याय देने की मांग की क्योंकि वे हमारी रक्षा करते हैं। उनकी रक्षा करना सरकार का, हमारा सबका काम है।

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