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बाज़ार

होर्मुज और लाल सागर में व्यवधान से भारतीय निर्यातकों-आयातकों की कमाई पर पड़ सकता है असर: रिपोर्ट

29 जुलाई, 2026 04:03 PM

पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता और होर्मुज जलडमरूमध्य तथा लाल सागर के दो प्रमुख समुद्री मार्गों पर संभावित व्यवधान भारतीय निर्यातकों और आयातकों की लाभप्रदता पर असर डाल सकते हैं। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो समुद्री बीमा प्रीमियम, मालभाड़ा (फ्रेट) और ट्रांजिट समय बढ़ सकता है, जिसका सबसे अधिक प्रभाव उन छोटे और मझोले कारोबारियों पर पड़ेगा जिनकी लागत बढ़ने पर कीमतें बढ़ाने की क्षमता सीमित है।

केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के लगभग 40 प्रतिशत कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के आयात के साथ-साथ एलएनजी और एलपीजी की बड़ी आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर करती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मई 2026 में होर्मुज में व्यवधान के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। यदि होर्मुज और लाल सागर, दोनों मार्गों पर एक साथ बाधा उत्पन्न होती है, तो ब्रेंट क्रूड 130-135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने और ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का खतरा रहेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 से जारी पश्चिम एशिया संघर्ष ने भारत के लिए अभूतपूर्व ऊर्जा संकट पैदा किया है। हालांकि रूस से कच्चे तेल की बढ़ती खरीद सहित विविध स्रोतों से आयात के कारण भारत ने अपनी तेल आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखा है, लेकिन इसके आर्थिक प्रभाव लगातार बढ़ रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यमन के हूती आंदोलन ने लाल सागर में समुद्री यातायात बाधित करने की चेतावनी दी है और सऊदी अरब के तेल जहाजों पर हमले भी किए हैं। वहीं, ईरान ने कथित तौर पर हूतियों को निर्देश दिया है कि यदि अमेरिका ईरान के महत्वपूर्ण ढांचे पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो वे बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को बंद करने की तैयारी करें।

बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य हिंद महासागर से लाल सागर में प्रवेश का एकमात्र समुद्री मार्ग है और यह स्वेज नहर से जुड़कर एशिया और यूरोप के बीच व्यापार का महत्वपूर्ण मार्ग बनाता है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि होर्मुज और बाब-अल-मंदेब दोनों मार्ग प्रभावित होते हैं, तो इससे वैश्विक लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा आपूर्ति शृंखला और भारत की व्यापक आर्थिक स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और एलएनजी की आपूर्ति बाधित होने से ऊर्जा-आधारित उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है। साथ ही, यदि जहाजों को केप ऑफ गुड होप के रास्ते भेजना पड़ा, तो सामान की डिलीवरी में 2 से 3 सप्ताह अतिरिक्त लग सकते हैं और परिवहन लागत भी काफी बढ़ जाएगी।

केयरएज रेटिंग्स की सीनियर डायरेक्टर प्रीति अग्रवाल ने कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर दोनों कुछ सप्ताह के लिए भी बंद होते हैं, तो वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। ऐसी स्थिति में ब्रेंट क्रूड 130 से 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है, जबकि एशिया और यूरोप में एलएनजी की आपूर्ति पर भी गंभीर दबाव पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र के अलावा इस तरह की बाधाओं से समुद्री बीमा प्रीमियम बढ़ेंगे, बंदरगाहों पर भीड़भाड़ बढ़ेगी, जहाजों के मार्ग और यात्रा अवधि लंबी होगी तथा वैश्विक सप्लाई चेन में मालभाड़ा लागत भी बढ़ जाएगी।

केयरएज रेटिंग्स के डायरेक्टर पुनीत कंसल ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज व लाल सागर से जुड़े बढ़ते जोखिम भारतीय कंपनियों पर नया वित्तीय दबाव बना सकते हैं, जिससे कच्चे माल की लागत बढ़ेगी, सप्लाई चेन प्रभावित होगी और कंपनियों के परिचालन से होने वाले नकदी प्रवाह पर असर पड़ेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी कंपनियां अपनी मजबूत सौदेबाजी क्षमता और विविध आपूर्ति स्रोतों के कारण इस झटके को कुछ हद तक संभाल सकती हैं। लेकिन छोटे और मझोले उद्यम, जिनके पास लागत बढ़ने का बोझ ग्राहकों पर डालने की सीमित क्षमता है, उन्हें मुनाफे में कमी, कार्यशील पूंजी की बढ़ती जरूरत और नकदी संकट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

 

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