चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को पंचकूला में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 के पदक विजेताओं एवं प्रतिभागियों के राज्य स्तरीय सम्मान समारोह में खिलाड़ियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर 24 खिलाड़ियों को 13 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपये के नकद पुरस्कार दिए गए। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा, खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम, सांसद रेखा शर्मा, मेयर श्यामलाल गुप्ता, खेल विभाग की प्रधान सचिव अमनीत पी. कुमार, खेल विभाग के निदेशक पार्थ गुप्ता, , खिलाड़ी और उनके परिजन उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर गर्व जताते हुए कहा कि किसी खिलाड़ी की कहानी पदक से शुरू नहीं होती। उसकी कहानी उस मिट्टी से शुरू होती है, जहां उसने पहली बार दौड़ना सीखा, उस मैदान से जहां उसने पहली बार हार का सामना किया और उन सुबहों से, जब बाकी दुनिया सो रही होती है और वह अपने सपने के लिए पसीना बहा रहा होता है। उसके पीछे माता-पिता का विश्वास, गुरु का अनुशासन और हर हार के बाद फिर उठ खड़े होने का संकल्प होता है। पोडियम पर खड़ा खिलाड़ी कुछ क्षणों के लिए पूरी दुनिया को दिखाई देता है, लेकिन उस पोडियम तक पहुंचने का वर्षों का संघर्ष दिखाई नहीं देता।
उन्होंने कहा कि ग्लासगो में हरियाणा के खिलाड़ियों ने अपने दमखम और प्रतिभा का डंका पूरी दुनिया में बजाया है। आज हर हरियाणवी का सीना गर्व से चौड़ा है और खिलाड़ियों की उपलब्धियों की खुशी पूरे हरियाणा में उत्सव बनकर छाई हुई है। हरियाणा की मिट्टी की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां खेतों में सिर्फ अन्न नहीं उगता, यहां चैंपियन भी पैदा होते हैं।
उन्होंने कहा कि देश की कुल आबादी में हरियाणा की हिस्सेदारी महज 2 प्रतिशत है, लेकिन इन खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले 122 खिलाड़ियों में 24 खिलाड़ी हरियाणा के थे और इनमें से लगभग हर दूसरा खिलाड़ी पदक लेकर लौटा। हरियाणा के खिलाड़ियों ने कुल 11 पदक जीते, जिनमें 7 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल हैं। इस प्रकार देश की कुल पदक संख्या में हरियाणा के खिलाड़ियों का योगदान 28 प्रतिशत से अधिक रहा है। यह महज आंकड़ा नहीं है, बल्कि हरियाणा की खेल प्रतिभा, मेहनत और जुझारूपन की वह ताकत है, जिसने दुनिया के मंच पर एक बार फिर तिरंगे की शान बढ़ाई है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की पौने तीन करोड़ जनता तथा अपनी ओर से ग्लासगो में तिरंगा ऊंचा करने वाले हरियाणा के पदक विजेताओं और प्रत्येक प्रतिभागी खिलाड़ी का हृदय की गहराइयों से अभिनंदन किया। उन्होंने खिलाड़ियों के माता-पिता और प्रशिक्षकों को भी बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने कदम-कदम पर खिलाड़ियों का साथ दिया है।
नायब सिंह सैनी ने कहा कि खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा, मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प से देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। आज हम केवल पदकों का सम्मान नहीं कर रहे हैं, बल्कि उस तपस्या, संघर्ष और संकल्प का सम्मान कर रहे हैं, जिसने इन पदकों को जन्म दिया है। किसी खिलाड़ी के गले में आने वाला पदक केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होता, उसमें उसके परिवार का त्याग, गुरु का मार्गदर्शन और पूरे प्रदेश की उम्मीदें भी शामिल होती हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2028, 2032 और 2036 के ओलंपिक खेलों में हरियाणा के खिलाड़ियों के बलबूते भारत दुनिया की बड़ी खेल शक्ति के रूप में उभरेगा। आज ग्लासगो में खिलाड़ियों ने तिरंगा ऊंचा किया है और आने वाले वर्षों में वे ओलंपिक के पोडियम पर भी तिरंगा ऊंचा करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 23वें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान प्राप्त किया। यह खिलाड़ियों की इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और राष्ट्र के प्रति समर्पण का परिणाम है। इस गौरवशाली अभियान में हरियाणा ने एक बार फिर अपनी अलग पहचान बनाई है।
हरियाणा की बेटियों ने जीते 6 पदक, इनमें 5 स्वर्ण
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से प्रदेश की बेटियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि हरियाणा के खिलाड़ियों द्वारा जीते गए 11 पदकों में से 6 पदक बेटियों के हैं, जिनमें 5 स्वर्ण पदक शामिल हैं। मुक्केबाजी रिंग में भी हरियाणा के खिलाड़ियों का दबदबा रहा और भारत के 7 स्वर्ण पदकों में से 6 स्वर्ण हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीते।
उन्होंने कहा कि प्रीति पवार, जैस्मिन लम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस, सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पराजित करके स्वर्णिम इतिहास रचा है।
पैरा-एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली बेटी शर्मिला का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने सिद्ध किया है कि मन की शक्ति के सामने कोई बाधा टिक नहीं सकती। नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक में रजत पदक अर्जित कर अपनी विश्वस्तरीय प्रतिभा को फिर से प्रमाणित किया। मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल ने रजत पदक जीतकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया और बेटी सीमा कालीरमन ने कांस्य पदक प्राप्त कर हरियाणा की पदक संख्या में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन खिलाड़ियों ने अलग-अलग मैदानों में खेलते हुए एक ही तिरंगे को ऊंचा किया है।
केवल पदकों का नहीं, खिलाड़ियों की तपस्या, संघर्ष और संकल्प का भी सम्मान – मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का सम्मान केवल पदक विजेताओं का नहीं है। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले हर प्रतिभागी खिलाड़ी का योगदान हमारे लिए समान रूप से गौरवपूर्ण है। खेल में पदक जीतना निश्चित रूप से बहुत बड़ी उपलब्धि है, लेकिन विश्व के श्रेष्ठ खिलाड़ियों के बीच देश की जर्सी पहनकर मैदान में उतरना भी अपने आप में एक असाधारण सम्मान है।
उन्होंने कहा कि जो खिलाड़ी आज पदक लेकर लौटे हैं, वे हमारी उपलब्धि हैं और जो खिलाड़ी अनुभव लेकर लौटे हैं, वे हमारी अगली उपलब्धि की नींव हैं। आज का अनुभव कल का पदक बन सकता है। सरकार, खेल विभाग और पूरा हरियाणा खिलाड़ियों के साथ खड़ा है।
खिलाड़ी देश के लिए खेले तो उसे अपने भविष्य की चिंता न हो – मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सोच स्पष्ट है कि खिलाड़ी जब देश के लिए खेले तो उसे यह चिंता नहीं होनी चाहिए कि खेल के बाद उसका भविष्य क्या होगा। इसलिए सरकार की नीतियां केवल पदक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खिलाड़ी को सम्मान, सुरक्षा और अवसर देने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए सरकारी सेवाओं के अवसर, खेल अकादमियां, खेल नर्सरियां, प्रशिक्षण सुविधाएं और आधुनिक खेल ढांचे का निरंतर विस्तार इसी सोच का प्रमाण हैं।
अब तक 260 उत्कृष्ट खिलाड़ियों को दी सरकारी नौकरियां
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा उत्कृष्ट खिलाड़ी भर्ती नियमों के तहत अब तक 260 उत्कृष्ट खिलाड़ियों को ग्रुप-ए, बी और सी की सरकारी नौकरियां दी गई हैं।
उन्होंने कहा कि हाल ही में खेल ग्रेडेशन नीति में संशोधन किया गया है। अब हरियाणा स्टेट गेम्स में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को भी खेल ग्रेडेशन का लाभ मिलेगा। इससे उन्हें सरकारी नौकरियों सहित अन्य अवसरों का भी लाभ मिलेगा।
पिछले लगभग 12 वर्षों में 17,544 खिलाड़ियों को 742 करोड़ रुपये के नकद पुरस्कार
नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज 24 खिलाड़ियों को 13 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपये के नकद पुरस्कार दिए गए हैं। यह केवल आज की घोषणा नहीं है। पिछले लगभग 12 वर्षों में प्रदेश के 17 हजार 544 खिलाड़ियों को 742 करोड़ रुपये की नकद पुरस्कार राशि दी गई है।
उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए खिलाड़ियों को तैयारी हेतु अग्रिम राशि देने का भी प्रावधान किया गया है, ताकि पैसे की कमी के कारण किसी खिलाड़ी की ट्रेनिंग न रुके।
सरकार ने अवार्ड विजेता खिलाड़ियों के मासिक मानदेय में भी बढ़ोतरी की है। अब खेल रत्न, द्रोणाचार्य, अर्जुन, ध्यानचंद तथा तेनजिंग नोर्गे अवार्ड विजेताओं को प्रतिमाह 20 हजार रुपये तथा भीम अवार्ड विजेताओं को प्रतिमाह 5 हजार रुपये का मानदेय दिया जा रहा है।
लक्ष्य केवल आज के चैंपियनों का सम्मान नहीं, कल के चैंपियन तैयार करना भी – मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल आज के चैंपियनों का सम्मान करना नहीं, बल्कि कल के चैंपियन तैयार करना भी है। खिलाड़ी की यह यात्रा गांव की मिट्टी, स्कूल के मैदान और स्थानीय खेल नर्सरी से शुरू होती है। इसी सोच के साथ खेल प्रतिभाओं को तलाशने और तराशने के लिए प्रदेश में 2 हजार खेल नर्सरियां खोली गई हैं।
उन्होंने कहा कि प्रतिभा को अवसर के साथ आर्थिक सहारा भी चाहिए। इसलिए 8 से 14 वर्ष के खिलाड़ियों को 1500 रुपये तथा 15 से 19 वर्ष के आयु वर्ग के खिलाड़ियों को 2 हजार रुपये मासिक छात्रवृत्ति देने का प्रावधान किया गया है।
प्रदेश में 25 आवासीय खेल अकादमियां भी खोली गई हैं। इनमें हर खिलाड़ी को 500 रुपये प्रतिदिन की दर से डाइट मनी दी जा रही है।
खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर लगभग 1100 करोड़ रुपये खर्च, बजट बढ़कर 668.42 करोड़ रुपये
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभा को अवसर और आर्थिक सहारे के साथ विश्वस्तरीय सुविधाएं भी चाहिए। खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं देने के लिए मजबूत खेल बुनियादी ढांचा बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पिछले लगभग 12 वर्षों में लगभग 1100 करोड़ रुपये खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किए गए हैं। खेल विभाग का बजट बढ़ाकर 668 करोड़ 42 लाख रुपये किया गया है, जो वर्ष 2013-14 में केवल 163 करोड़ रुपये था।
चोट के बाद खिलाड़ी को वापसी का भरोसा देने के लिए स्थापित किया ‘ए-स्टार’ केंद्र
नायब सिंह सैनी ने कहा कि जब खिलाड़ी चोटिल होता है तो उसका करियर दांव पर लग जाता है। खिलाड़ियों के इसी दर्द को दूर करने और चोट के बाद उन्हें वापसी का भरोसा देने के लिए पंचकूला के ताऊ देवीलाल खेल परिसर में लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय स्तर का ‘ए-स्टार’ उन्नत वैज्ञानिक प्रशिक्षण एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित किया गया है। यह उत्तर भारत में अपनी तरह का पहला और सबसे आधुनिक केंद्र है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को बचपन से ही तराशने की नीति पर काम कर रही है और उनकी तैयारियों के लिए हर कदम पर सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के लिए कृतसंकल्प है। सरकार का प्रयास है कि हरियाणा की मिट्टी से शुरू होने वाली किसी भी प्रतिभा की यात्रा संसाधनों की कमी के कारण बीच में न रुके और वह यात्रा दुनिया के पोडियम तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ियों ने भी अपनी मेहनत से साबित किया है कि वे ऐसे प्रोत्साहनों और सुविधाओं के हकदार हैं। खिलाड़ियों ने हर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता के बाद प्रदेश को जश्न मनाने का अवसर दिया है। अब सरकार की जिम्मेदारी है कि उनकी अगली जीत की तैयारी में भी उनके साथ खड़ी रहे। कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 का यह उत्सव जैसा माहौल उसी विश्वास का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेल भारत की बढ़ती खेल शक्ति दिखाने का अवसर – मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में देश के सामने एक और बड़ा अवसर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से वर्ष 2030 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी भारत को मिली है। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि दुनिया के सामने भारत की बढ़ती खेल शक्ति को दिखाने का अवसर है।
नायब सिंह सैनी ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2028, 2032 और 2036 के ओलंपिक खेलों में हरियाणा के खिलाड़ी भारत को दुनिया की बड़ी खेल शक्ति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आज ग्लासगो में खिलाड़ियों ने तिरंगा ऊंचा किया है और आने वाले वर्षों में वे ओलंपिक के पोडियम पर भी तिरंगा ऊंचा करेंगे।
मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों का आह्वान करते हुए कहा कि आज उनके गले में जो पदक हैं, वे उनकी मंजिल नहीं, बल्कि अगली उड़ान की शुरुआत हैं। जिस मिट्टी से उन्होंने अपने सपने की पहली लकीर खींची थी, उसी मिट्टी से अब दुनिया के सबसे बड़े खेल मंचों तक अपनी पहचान लिखनी है। आज ग्लासगो में तिरंगा उनके हाथों से ऊंचा हुआ है और कल यही तिरंगा ओलंपिक के पोडियम पर और ऊंचा लहराए, यही हर हरियाणवी का सपना और हर भारतीय की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने खेल विभाग, सभी प्रशिक्षकों, माता-पिता और विशेष रूप से सभी खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि थककर भी जो ठहरा नहीं, वही सफ़र की पहचान बना, गिरकर जिसने उठना सीखा, वही आज हिंदुस्तान बना। मंज़िल मिली तो क्या हुआ, अब राह नई बनानी है;
एक जीत मिली है आज, कल दुनिया जीतकर आनी है।
खिलाड़ियों से रूबरू हुए मुख्यमंत्री, संघर्ष और सफलता की यात्रा को करीब से जाना
सम्मान समारोह के उपरांत मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाने वाले खिलाड़ियों के साथ विशेष रूप से संवाद किया। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों के बीच पहुंचकर आत्मीयता से उनसे बातचीत की और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की उनकी खेल यात्रा, कठिन परिश्रम, संघर्ष तथा इस दौरान सामने आई चुनौतियों के बारे में विस्तार से जाना। खिलाड़ियों ने भी मुख्यमंत्री के साथ अपने अनुभव और सफलता की कहानियां साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के बल पर उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स के मंच तक का सफर तय किया और देश के लिए पदक जीतने में सफलता हासिल की।
संवाद के दौरान खिलाड़ियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपने खेल जीवन से जुड़े अनुभव साझा किए और प्रदेश में खिलाड़ियों को मिल रहे प्रोत्साहन एवं सहयोग के लिए मुख्यमंत्री तथा राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण, खेल सुविधाओं और अन्य आवश्यक सहयोग के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा खिलाड़ियों की हरसंभव सहायता सुनिश्चित की जा रही है। सरकार से मिले इस सहयोग और प्रोत्साहन ने उन्हें अपने खेल पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। इसी का परिणाम है कि हरियाणा के खिलाड़ियों ने कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश और प्रदेश का नाम रोशन किया।
मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उन्हें आगे भी इसी समर्पण और जज्बे के साथ देश के लिए खेलते हुए नई उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार खिलाड़ियों के साथ मजबूती से खड़ी है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए आवश्यक सहयोग एवं सुविधाएं उपलब्ध करवाने के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।