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धर्म

सोमनाथ भारत माता की वीर संतानों के स्वाभिमान और अदम्य साहस की गाथा: पीएम मोदी

05 जनवरी, 2026 12:32 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर के विध्वंस और पुनरुत्थान की उस ऐतिहासिक गाथा को स्मरण किया है, जो भारतीय सभ्यता की अमर चेतना और अटूट आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत माता की उन करोड़ों वीर संतानों के स्वाभिमान और अदम्य साहस की कहानी है, जिन्होंने हर चुनौती के बावजूद अपनी संस्कृति और सभ्यता को जीवित रखा।

सोमनाथ मंदिर बार-बार हुए हमलों के बाद भी हर बार पुनः खड़ा हुआ और आज भी पूरे गौरव के साथ अडिग है

प्रधानमंत्री ने अपने ब्लॉग पोस्ट में लिखा कि वर्ष 1026 में, आज से ठीक एक हजार वर्ष पहले, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर पहला भीषण आक्रमण हुआ था। इस आक्रमण का उद्देश्य सिर्फ एक मंदिर को नष्ट करना नहीं था, बल्कि भारत की आस्था और सांस्कृतिक आत्मा को कुचलना था। इसके बावजूद सोमनाथ मंदिर बार-बार हुए हमलों के बाद भी हर बार पुनः खड़ा हुआ और आज भी पूरे गौरव के साथ अडिग है।

‘सोमनाथ’ भारत माता की उन करोड़ों वीर संतानों के स्वाभिमान और अदम्य साहस की गाथा

पीएम मोदी ने इस विषय पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी अपनी बात साझा की। उन्होंने लिखा, “जय सोमनाथ! वर्ष 2026 में आस्था की हमारी तीर्थस्थली सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। बार-बार हुए हमलों के बावजूद हमारा सोमनाथ मंदिर आज भी अडिग खड़ा है। सोमनाथ दरअसल भारत माता की उन करोड़ों वीर संतानों के स्वाभिमान और अदम्य साहस की गाथा है, जिनके लिए अपनी संस्कृति और सभ्यता सदैव सर्वोपरि रही है।”

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान रखता है सोमनाथ मंदिर

गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान रखता है। शास्त्रों के अनुसार, इसके दर्शन से पापों से मुक्ति और आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है। अपने इसी गहरे आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व के कारण यह मंदिर इतिहास में कई बार विदेशी आक्रमणों का निशाना बना। जनवरी 1026 में गजनी के महमूद द्वारा किए गए आक्रमण ने गहरी पीड़ा दी, लेकिन भारतीय चेतना को समाप्त नहीं कर सका।

मंदिर आज भी विश्व को यह संदेश देता है कि आस्था को न तो मिटाया जा सकता है और न ही झुकाया जा सकता है

प्रधानमंत्री ने अपने ब्लॉग में यह भी उल्लेख किया कि सोमनाथ की कहानी केवल विनाश की नहीं, बल्कि हजार वर्षों से चले आ रहे संघर्ष, बलिदान और पुनर्निर्माण की प्रेरक कथा है। यह मंदिर आज भी विश्व को यह संदेश देता है कि आस्था को न तो मिटाया जा सकता है और न ही झुकाया जा सकता है।

आक्रमण के एक हजार वर्ष पूरे होने के बाद भी अडिग खड़ा है सोमनाथ

पीएम मोदी ने कहा कि 2026 में, पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष पूरे होने के बाद भी अडिग खड़ा सोमनाथ हमें यह प्रेरणा देता है कि यदि एक खंडित मंदिर फिर से उठ सकता है, तो भारत भी अपने प्राचीन गौरव के साथ पुनः विश्व को मार्ग दिखा सकता है। 

 

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