कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद सोने ने दो दिनों में अपनी बढ़त जारी रखी है। इन आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा इस साल ब्याज दरों में बढ़ोतरी करके महंगाई को काबू करने की संभावनाओं को काफी हद तक कम कर दिया है। फिलहाल सोना करीब 4,150 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है, जबकि पिछले सत्र में इसमें 2.3 फीसदी की तेजी आई थी, जो पिछले तीन हफ्तों में सबसे बड़ी उछाल है।
सिंगापुर में स्पॉट गोल्ड 0.7 फीसदी बढ़कर 4,151.48 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं, चांदी 1 फीसदी बढ़कर 61.50 डॉलर प्रति औंस हो गई, जो पिछले तीन सत्रों में 5 फीसदी चढ़ने के बाद और मजबूत हुई। ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स, पिछले सत्र में 0.5 फीसदी गिरावट के बाद मामूली रूप से ऊपर चढ़ा है।
घरेलू मार्केट में गुरुवार को गिरे थे दाम
अगर घरेलू मार्केट की बात करें तो एमसीएक्स पर गुरुवार रात 11:30 बजे गोल्ड मामूली गिरावट के साथ 145723 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट पर बंद हुआ था। जबकि, चांदी थोड़ी कमजोर होकर 233200 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी। दूसरी ओर सर्राफा बाजारों में 24 कैरेट सोना 143003 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 228850 रुपये प्रति किलो के भाव पर बंद हुई थी।
सोना-चांदी के दाम अचानक बढ़ने के कारण
गुरुवार को जारी आंकड़ों से पता चला कि अमेरिका में जून में नियुक्तियों की रफ्तार में भारी कमी आई है, जिससे साफ है कि हाल के महीनों में मजबूती के कुछ संकेत मिलने के बावजूद श्रम बाजार अब भी चुनौतियों का सामना कर रहा है।
ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदें हुईं कम
इन कमजोर आंकड़ों से जुलाई में होने वाली अगली बैठक में फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव काफी कम हो जाएगा। पहले ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद बिना ब्याज वाली संपत्ति (जैसे सोना) के लिए एक बड़ी बाधा रही थी।
अब निवेशकों ने ब्याज दर बढ़ोतरी पर अपने दांव कम कर दिए हैं, और स्वैप बाजार अगली फेड बैठक में बढ़ोतरी की केवल 18 प्रतिशत संभावना जता रहा है, जो हफ्ते की शुरुआत में एक-तिहाई (करीब 33 फीसदी) के करीब थी।
तेल की कीमतों में गिरावट और भू-राजनीतिक तनाव
हाल के महीनों में महंगाई की एक बड़ी वजह रहे तेल के दाम भी अब युद्ध-पूर्व स्तर के करीब आ गए हैं, क्योंकि होर्मुज से टैंकरों की आवाजाही बढ़ गई है। अमेरिका और ईरान के बीच कतर में सकारात्मक बातचीत के बाद इस हफ्ते तेल की कीमतों में हल्की गिरावट आई है। इन वार्ताओं का मकसद दोनों देशों के बीच 60 दिनों के अंतरिम युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलना है।
क्या दाम और बढ़ने के हैं आसार
टीडी सिक्योरिटीज में कमोडिटी रणनीति के प्रमुख बार्ट मेलेक ने एक नोट में कहा कि कम ऊर्जा कीमतों और धीमी रोजगार वृद्धि से संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति का दबाव कम होने की संभावना है। उनके अनुसार, फेड द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीदों में कमी ने संभवतः व्यापारियों को पहले बनाए गए सोने के शॉर्ट पोजीशन को कवर करने के लिए प्रेरित किया, साथ ही लॉन्ग पोजीशन को बेचने की प्रेरणा भी कम हुई, जो पिछले कुछ दिनों में सोने की तेजी का कारण है।
हालांकि, उनका मानना है कि सोना अभी सिर्फ 4,280 डॉलर प्रति औंस के रेजिस्टेंस लेवल तक ही बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि टीडी को लगातार बने हुए मुद्रास्फीति के दबाव के कारण अगले साल तक सोने के 5,300 डॉलर के उनके लक्ष्य तक पहुंचने की उम्मीद नहीं है।