पुणे में गुरुवार को 12वीं ब्रिक्स संचार मंत्रियों की बैठक से पहले डिजिटल ब्रिक्स फोरम और एक्स्पो का आयोजन किया गया, जिसमें ब्रिक्स सदस्य देशों की सरकार, उद्योग जगत, शिक्षाविद, स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सदस्य देशों के मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत किया। इस दौरान ‘सुदृढ़ भविष्य के लिए नवाचार, सहयोग और बदलाव (आईसीटी)’ विषय पर ब्रिक्स संचार मंत्रियों की मंत्री-स्तरीय अनौपचारिक चर्चा भी हुई।
डिजिटल ब्रिक्स फोरम बना बहु-हितधारक मंच
डिजिटल ब्रिक्स फोरम ब्रिक्स आईसीटी ट्रैक का बहु-हितधारक मंच है, जिसे 2021 में भारत की मेजबानी में आयोजित 7वीं ब्रिक्स संचार मंत्रियों की बैठक के दौरान स्थापित किया गया था। फोरम में सरकार, उद्योग, शिक्षण संस्थानों, स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधियों ने डिजिटल विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
सिंधिया ने प्रतिनिधिमंडलों का किया स्वागत
प्रतिनिधिमंडलों के स्वागत के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि पुणे पिछले कुछ दिनों में केवल सरकारों के ही नहीं, बल्कि विचारों, नवाचार और साझा आकांक्षाओं के मिलन का केंद्र बन गया है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स आईसीटी कार्य समूह, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर फोकस ग्रुप, इंस्टीट्यूट ऑफ फ्यूचर नेटवर्क्स, डिजिटल ब्रिक्स टास्क फोर्स और डिजिटल ब्रिक्स फोरम के माध्यम से विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने समावेशी, सुरक्षित और मजबूत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के तरीकों पर काम किया है।
साइबर सुरक्षा और भरोसेमंद आईसीटी पर चर्चा
फोरम में दिनभर दो प्रमुख विषयों पर पैनल चर्चाएं हुईं। पहली चर्चा साइबर सुरक्षा और भरोसेमंद आईसीटी पर केंद्रित रही, जिसमें बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा भी शामिल थी। इसमें डिजिटल बदलाव से जुड़े सुरक्षा और भरोसे के पहलुओं पर चर्चा की गई। ब्रिक्स देशों के मंत्रियों ने डिजिटल विकास को आगे बढ़ाते हुए निजता, जनहित और संवेदनशील यूजर्स की सुरक्षा के बीच संतुलित और समग्र दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।
टिकाऊ डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र पर मंथन
दूसरे पैनल में टिकाऊ और मजबूत डिजिटल एवं आईसीटी पारिस्थितिकी तंत्र पर चर्चा हुई। इसमें सभी के लिए सार्थक और सस्ती कनेक्टिविटी, ऊर्जा-कुशल और जलवायु-अनुकूल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तथा सैटेलाइट और नॉन-टेरेस्ट्रियल सिस्टम जैसी नई प्रणालियों की भूमिका पर विचार किया गया।
भारत के डिजिटल मॉडल को बताया अलग
विषयगत पैनल में केंद्रीय संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने टिकाऊ डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दशकों तक इंफ्रास्ट्रक्चर की कहानी सड़कों, बंदरगाहों और पावर ग्रिड के जरिए बताई जाती रही है, लेकिन आज भारत दुनिया के सामने डिजिटल पहचान, बैंकिंग, भुगतान, दस्तावेज, सहमति-आधारित डेटा और बड़े पैमाने पर सेक्टर-स्पेसिफिक नेटवर्क की अलग कहानी पेश करता है।
ओपन और इंटरऑपेरेबल आर्किटेक्चर पर जोर
चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि भारत के मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बनाने वाली बात किसी एक ऐप में मौजूद वास्तविक नवाचार नहीं, बल्कि उसका आर्किटेक्चर दर्शन है। यह खुला, इंटरऑपेरेबल और बड़े पैमाने पर काम करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि हर कंज्यूमर एप्लीकेशन बनाने के बजाय सरकार और उसके सार्वजनिक संस्थान मूलभूत डिजिटल अवसंरचना तैयार करते हैं।
डिजिटल सक्षमता और सुरक्षा साथ-साथ जरूरी
साइबर सुरक्षा और विश्वसनीय आईसीटी पर पैनल चर्चा में दूरसंचार विभाग के सचिव अमित अग्रवाल ने डिजिटल सक्षमता और सुरक्षा को एक साथ आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा, भरोसे और बच्चों की सुरक्षा को सिस्टम के डिजाइन में ही शामिल किया जाना चाहिए, न कि बाद में किसी अतिरिक्त उपाय के रूप में इन पर ध्यान दिया जाए।
डिजिटल सुरक्षा के तीन प्रमुख स्तंभ
अमित अग्रवाल ने डिजिटल परिदृश्य को सुरक्षित बनाने के लिए तीन प्रमुख स्तंभ बताए। पहला, डिजाइन के स्तर पर सुरक्षित डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण। दूसरा, डिजिटल कंटेंट देने या डिजिटल व्यक्तिगत डेटा एकत्र करने वालों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से काम करना कानूनी रूप से अनिवार्य करना। तीसरा, कानून और डिजिटल माध्यमों के जरिए लोगों को सशक्त बनाना, ताकि वे अपने अधिकारों की रक्षा कर सकें और शिकायतों का प्रभावी समाधान पा सकें।
ब्रिक्स मंत्रियों ने की अनौपचारिक चर्चा
इसके बाद भारत की अध्यक्षता में आईसीटी ट्रैक के तहत ‘सुदृढ़ भविष्य के लिए नवाचार, सहयोग और बदलाव (आईसीटी)’ विषय पर ब्रिक्स संचार मंत्रियों की मंत्री-स्तरीय अनौपचारिक चर्चा हुई। इसमें डिजिटल क्षेत्र में सहयोग, नवाचार और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए साझा प्रयासों पर विचार-विमर्श किया गया।
एक्स्पो में दिखाए गए नवाचार
वरिष्ठ अधिकारियों ने डिजिटल ब्रिक्स फोरम एक्स्पो का दौरा किया। एक्स्पो में भारत और अन्य ब्रिक्स देशों के स्टार्टअप, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के नवाचार प्रदर्शित किए गए। इसका उद्देश्य डिजिटल और आईसीटी क्षेत्र में विकसित हो रही तकनीकों और समाधानों को सामने लाना था।
महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत की झलक
शाम को ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम और रात्रिभोज का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाराष्ट्र और भारत की सांस्कृतिक परंपराओं को प्रस्तुत किया गया।
आज होगी ब्रिक्स संचार मंत्रियों की बैठक
ब्रिक्स संचार मंत्रियों की 12वीं बैठक 21 अगस्त 2026 को पुणे में होगी। बैठक में ब्रिक्स देशों के बीच संचार और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी।