नई दिल्ली : मंगलवार को राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ और सदन की कार्यवाही प्रारंभ होने के कुछ देर बाद ही स्थगित करनी पड़ी। दरअसल राज्यसभा में विपक्ष ने मंगलवार राम मंदिर के चढ़ावे और प्रबंधन में अपारदर्शिता तथा गंभीर अनियमितताओं का मुद्दा उठाया।
नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम राम मंदिर ट्रस्ट और उसमें मिले बहुमूल्य उपहारों, नकद दान, जमीन की खरीद तथा उसके प्रबंधन को लेकर उठे गंभीर आरोपों की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस व उसके सहयोगियों ने पूर्व में भगवान राम को लेकर जो बयान दिए थे, उन पर उन्हें माफी मांगनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यह सदन केवल नेता प्रतिपक्ष का नहीं। उन्हें इस तरह बार-बार बोलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इस बीच सदन में जबरदस्त हंगामा शुरू हो गया। केवल विपक्ष ही नहीं बल्कि सत्ता पक्ष के सांसदों ने भी अपनी सीटों से उठकर अपनी आपत्ति दर्ज कराने लगे। वहीं विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे जिस को देखते हुए सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन की करवाई को स्थगित कर दिया।
इस हंगामे से पहले नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपनी बात रखते हुए कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार ने किया है। प्रधानमंत्री ने स्वयं सदन में ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी और सरकार ने 70 एकड़ से अधिक भूमि ट्रस्ट को सौंपी। भूमि पूजन से लेकर रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा तक हर महत्वपूर्ण अवसर पर प्रधानमंत्री स्वयं उपस्थित रहे। इसलिए राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े इस पूरे मामले पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के वक्तव्य के बाद संसद में जबरदस्त हंगामा शुरू हो गया। सत्ता पक्ष व विपक्ष के सांसदों ने शोर व नारेबाजी की। विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर आगे आ गए, वहीं सत्ता पक्ष के सांसद भी ऐसा ही करते नजर आए। इससे पहले संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के वक्तव्य पर कहा कि विपक्ष, कांग्रेस व समाजवादी पार्टी जैसे दल तो राम मंदिर के विरोध में थे। इन लोगों ने राम को काल्पनिक बताया था।
रिजिजू ने कहा कि इन्हें भगवान राम को लेकर दिए गए अपने उन बयानों पर माफी मांगनी चाहिए। ये लोग राम मंदिर निर्माण का विरोध करने के लिए हाथ पर काली पट्टी बांध आते थे। भारी हंगामे के बीच रिजिजू ने कहा, ''ये जो विपक्ष के नेता कर रहे हैं, इस मुद्दे को लेकर संसद के बाहर भी हंगामा करते हैं और सदन चलने नहीं देते। दूसरे सदस्यों की बात भी नहीं सुनते, सिर्फ खुद ही बोलना चाहते हैं। सभापति महोदय, नेता प्रतिपक्ष होने के नाते इन्हें जितना समय दिया जाता है, उसका हर बार दुरुपयोग किया जाता है। हम इसे स्वीकार नहीं कर सकते।''
उन्होंने कहा कि बाकी सदस्यों ने भी नोटिस दिए हुए हैं, उन्हें भी बोलने का अवसर मिलना चाहिए। हर बार नियमों का नाम लेकर ये खड़े हो जाते हैं और रोज एक ही मुद्दा उठाते रहते हैं। यह नहीं होगा, यह नहीं चलेगा। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि यह सदन सभी सदस्यों का है, केवल नेता प्रतिपक्ष का नहीं। इसलिए इन्हें इस तरह बार-बार बोलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
रिजिजू का कहना था कि ये वहीं लोग हैं जो राम और राम मंदिर के खिलाफ थे। पक्ष व विपक्ष दोनों ही और के सांसदों द्वारा सदन में शोर और नारेबाजी को देखते हुए सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 तक के लिए स्थगित कर दिया।