ईरान में पिछले 19 दिनों से चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शन के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमरीकी और ईरानी अधिकारी आमने-सामने आ गए। इस दौरान अमरीका के प्रतिनिधि ने तेहरान के खिलाफ कड़े तेवर दोहराए। अमरीका ने ईरान सरकार के विरोधी गुट के साथ मिलकर सरकार की उस खूनी कार्रवाई की निंदा की, जिसमें देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान कार्यकर्ताओं के अनुसार 2,637 लोग मारे गए। संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कार्रवाई करने वाले व्यक्ति हैं।
लंबी-लंबी बातें करने वाले नहीं। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान शासन के नेतृत्व को यह बात पता होनी चाहिए कि अमरीका इस नरसंहार को रोकने के लिए कोई भी कदम उठा सकता है। उन्होंने ईरान के लोगों की बहादुरी की सराहना की और कहा कि ईरान के लोगों ने इतिहास में कभी भी इतने जोरदार तरीके से आजादी की मांग नहीं की। वहीं सुरक्षा परिषद की बैठक में ईरान ने अमरीकी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। ईरान के उप राजदूत गुलाम हुसैन दर्जी ने जवाब दिया कि उनका देश टकराव नहीं चाहता, लेकिन अगर अमरीका की ओर से कोई आक्रामक कदम उठाया गया, तो ईरान जवाब देगा। दर्जी ने कहा कि अमरीका गलत जानकारी फैला रहा है और जानबूझकर अशांति को हिंसा की ओर मोड़ रहा है। दर्जी ने चेतावनी दी कि ‘किसी भी तरह की कार्रवाई का निर्णायक और कानूनी जवाब दिया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि यह धमकी नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत दिया गया बयान है।
ईरानी कार्यकर्ताओं ने सुनाई अत्याचारों की दास्तां
बैठक का सबसे भावुक पल तब आया, जब दो ईरानी कार्यकर्ताओं, मसीह अलीनेजाद और अहमद बतेबी ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने इस्लामी गणराज्य द्वारा किए गए अत्याचारों की दास्तां बयां की। अलीनेजाद ने सीधे ईरानी प्रतिनिधि को संबोधित करते हुए कहा कि आपने मुझे तीन बार मारने की कोशिश की है। मैंने अपने होने वाले हत्यारे को अपनी आंखों से अपने बगीचे में, अपने ब्रूकलिन स्थित घर के सामने देखा है। बातेबी ने बताया कि ईरान की जेलों में पहरेदार किस तरह उनके शरीर पर गहरे घाव करते थे और फिर उन पर नमक डालते थे। उन्होंने सुरक्षा परिषद से कहा कि अगर आपको मुझ पर विश्वास नहीं है, तो मैं अभी अपना शरीर दिखा सकता हूं। बातेबी ने राष्ट्रपति ट्रंप से ईरानी जनता को अकेला न छोडऩे की अपील की।