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'मॉक सत्र’ पर भूपेंद्र हुड्डा के जवाब से विधान सभा अध्यक्ष असंतुष्ट, तीन बिन्दुओं पर स्पीकर ने मांगा था स्पष्टीकरण

24 जून, 2026 06:42 PM

चंडीगढ़ : हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा विधान सभा परिसर में आयोजित समानान्तर सत्र के संबंध में भेजे गए जवाब को अस्वीकार कर दिया है। विस अध्यक्ष का मत है कि नेता प्रतिपक्ष का जवाब जहां अस्पष्ट, भ्रामक, तथ्यहीन तथा संवैधानिक एवं संसदीय मर्यादाओं के विपरीत है, वहीं वह किसी प्रकार के खेद या पश्चाताप से रहित भी है, जिसमें बेबुनियाद सलाह भी दी गई है। इसलिए इसे संतोषजनक नहीं माना जा सकता।

गौरतलब है कि गत 27 अप्रैल को हरियाणा विधान सभा के विशेष सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक दल द्वारा विधान सभा परिसर के पार्किंग क्षेत्र में समानान्तर सत्र आयोजित किया गया था। इस प्रकरण पर विधान सभा अध्यक्ष ने 28 अप्रैल को नेता प्रतिपक्ष से तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा था। इनमें समानान्तर सत्र आयोजित करने का संवैधानिक एवं प्रक्रियात्मक आधार, विशेष सत्र को असंवैधानिक करार देने का औचित्य तथा नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में पारित सरकारी प्रस्ताव को असंवैधानिक बताने के बिंदु शामिल थे।

नेता प्रतिपक्ष के जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि प्राप्त पत्र में तीनों बिंदुओं पर कोई स्पष्ट और तथ्यात्मक उत्तर नहीं दिया गया है। यह भ्रामक तथा दुर्भावनापूर्ण तरीके से दिया गया है। उन्होंने कहा कि विशेष सत्र को कथित ‘निंदा प्रस्ताव’ से जोड़ना पूरी तरह निराधार व असत्य है, क्योंकि ऐसा कोई प्रस्ताव न तो कार्य सलाहकार समिति (बीएसी) के एजेंडे में था और न ही सदन में प्रस्तुत किया गया था। इसलिए कांग्रेस द्वारा सत्र का बहिष्कार करना बिल्कुल गलत तथ्यहीन व जानबूझकर उठाया गया कदम था।

विस अध्यक्ष ने कहा कि विधान सभा का विशेष सत्र संविधान के अनुच्छेद 174 के तहत राज्यपाल द्वारा संविधान के प्रावधान के अंतर्गत विधिवत बुलाया गया था तथा इसकी समस्त कार्यवाही संविधान, नियमों और स्थापित संसदीय परंपराओं के अनुरूप संचालित हुई। सदन की कार्यवाही को अनुच्छेद 194 के अंतर्गत विशेषाधिकार प्राप्त है। किसी राजनीतिक दल की असहमति मात्र से किसी संवैधानिक सत्र को असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 27 अप्रैल को पारित सरकारी प्रस्ताव का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण और नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन का सदन द्वारा सामूहिक रूप से समर्थन करना था। इसका सीटों के बढ़ाने, परिसीमन, लोक सभा सदस्यों के सदन में मतदान या संसद के अधिकार क्षेत्र से जुड़े विषयों से कोई संबंध नहीं था। ऐसे में कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोप गलत व अनुमान पर आधारित हैं, न कि तथ्यों पर आधारित।

विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि विधान सभा परिसर में निर्धारित मीडिया ब्रीफिंग क्षेत्र का उपयोग बिना अनुमति समानान्तर ‘मॉक विधान सभा’ चलाने के लिए किया गया। वहां कांग्रेस विधायक दल के सदस्य एकत्रित हुए, अध्यक्ष चुने गए, अध्यक्ष और मंत्रियों जैसी भूमिकाएं असंवैधानिक रूप से निभाई गई। उन्होंने विधिवत रूप से चल रहे विधान सभा सत्र को असंवैधानिक करार दिया। यह न केवल संवैधानिक व संसदीय परंपराओं के विरुद्ध था बल्कि सदन की गरिमा व प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंचाने वाला था, जिससे विधान सभा की छवि धुमिल हुई है।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति और संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। विधान सभा अध्यक्ष का दायित्व सदन, उसकी समितियों और सभी सदस्यों की गरिमा एवं प्रतिष्ठा का ध्यान रखना है, जिसे निभाने का उन्होंने हमेशा प्रयत्न किया है। इसी उद्देश्य से नेता प्रतिपक्ष को पत्र लिखकर उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा गया था।

 

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