Friday, October 02, 2026
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बाज़ार

मानसून की कमी और अल नीनो के असर से खरीफ बुआई घटकर 1016.57 लाख हेक्टेयर, धान का रकबा 14.37 फीसदी कम

18 अगस्त, 2026 11:58 AM

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल 14 अगस्त तक देशभर में चालू सीजन में खरीफ फसलों की बुआई का कुल क्षेत्रफल 1016.57 लाख हेक्टेयर होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 1037.52 लाख हेक्टेयर था।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक धान की खेती का रकबा 379.07 लाख हेक्टेयर रहा है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 393.44 लाख हेक्टेयर था। बुवाई के रकबे में आई 14.37 प्रतिशत की इस कमी का कारण इस साल मानसून की कमी और 'अल नीनो' मौसम पैटर्न का बुरा असर है।


उड़द और मूंग जैसी दालों की खेती का रकबा 108.14 लाख हेक्टेयर पर स्थिर रहा है (पिछले साल इसी अवधि में यह 108.49 लाख हेक्टेयर था), क्योंकि इन फसलों को कम पानी की जरूरत होती है।
ज्वार, बाजरा और रागी जैसे मोटे अनाजों या मिलेट्स की खेती का रकबा मौजूदा सीजन में अब तक 172.96 लाख हेक्टेयर आंका गया है, जो पिछले साल इसी अवधि के 177.13 लाख हेक्टेयर से कम है।
गन्ने की खेती का रकबा, जो एक सालाना फसल है और जल्दी बोई जाती है, अब तक 58.31 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 58.62 लाख हेक्टेयर था।
मौजूदा खरीफ सीजन में अब तक कपास की बुवाई का रकबा 107.30 लाख हेक्टेयर आंका गया है, जो पिछले साल बोए गए 108.26 लाख हेक्टेयर के लगभग बराबर है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी।
मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए खरीफ फसलों के एमएसपी में यह बढ़ोतरी केंद्रीय बजट 2018-19 की उस घोषणा के अनुरूप है, जिसमें एमएसपी को अखिल भारतीय औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना स्तर पर तय करने की बात कही गई थी।


उत्पादन लागत पर किसानों को मिलने वाला अनुमानित मार्जिन मूंग (61 प्रतिशत) के मामले में सबसे ज्यादा रहने का अनुमान है, इसके बाद बाजरा (56 प्रतिशत), मक्का (56 प्रतिशत) और तुअर/अरहर (54 प्रतिशत) का स्थान है। एक सरकारी बयान के मुताबिक, बाकी फसलों के लिए किसानों को उनकी उत्पादन लागत पर 50 प्रतिशत का मार्जिन मिलने का अनुमान है।
हाल के वर्षों में, सरकार ने अनाज के अलावा दूसरी फसलों, जैसे दालों, तिलहन और न्यूट्री-सीरियल्स (पौष्टिक अनाज), की खेती को भी बढ़ावा दिया है और इनके लिए ज्यादा एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की पेशकश की है।

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