पंजाब विधानसभा में महिलाओं के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर गुरुवार को हंगामा देखने को मिला। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के बाद भाजपा विधायक अश्वनी शर्मा ने पूरे विवाद पर सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया है और यदि किसी शब्द से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्होंने उसके लिए खेद भी व्यक्त किया है। समाचार एजेंसी से बातचीत में अश्वनी शर्मा ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में आम आदमी पार्टी (आप) की कार्यशैली और मानसिकता पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि कुछ भी हो जाए, ये लोग हर बात के लिए केंद्र सरकार को दोषी ठहरा देते हैं। पंजाब में कई स्थानीय बोलचाल के शब्द और वाक्यांश प्रचलित हैं, जिनमें से एक शब्द का उन्होंने प्रयोग किया था। यदि किसी सदस्य को वह शब्द अमर्यादित लगा, तो उसे विधानसभा की कार्यवाही से हटाया जा सकता है। हमारी पार्टी महिलाओं के सम्मान में विश्वास रखती है। हम नवरात्रों में कन्या पूजन करते हैं और बेटियों को लक्ष्मी का स्वरूप मानते हैं। हम घर से निकलते समय बेटियों के चरण स्पर्श करके निकलते हैं। यदि किसी शब्द से किसी को ठेस पहुंची है तो मैंने सार्वजनिक रूप से खेद प्रकट किया है और इसमें मुझे कोई संकोच नहीं है। आम आदमी पार्टी सरकार पर महिलाओं के प्रति दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए अश्वनी शर्मा ने कहा कि जब विभिन्न आंदोलनों में महिलाओं पर पुलिस कार्रवाई हुई, तब सत्ता पक्ष की महिला विधायक और सरकार मौन रही। बरनाला में वाल्मीकि समाज की महिलाओं, बठिंडा में सहायक प्रोफेसरों के आंदोलन, नर्सों के प्रदर्शन, किसान आंदोलन में शामिल महिलाओं तथा मनरेगा से जुड़े प्रदर्शन में महिलाओं पर लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया, लेकिन उस समय महिलाओं के सम्मान की बात नहीं उठाई गई।
उन्होंने कहा कि 7 फरवरी 2026 को बठिंडा में किसान आंदोलन के दौरान महिलाओं पर लाठीचार्ज किया गया और 15 जुलाई को मनरेगा से जुड़े प्रदर्शन में भी महिलाओं के खिलाफ बल प्रयोग हुआ। इन घटनाओं पर सत्ता पक्ष ने कोई गंभीर प्रतिक्रिया नहीं दी।
अश्वनी शर्मा ने कहा कि महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। महिलाओं के प्रति सम्मान केवल शब्दों में नहीं, बल्कि उनकी सोच और संस्कारों में है। उन्होंने अपील की कि बहनों और महिलाओं के नाम पर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।