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बाज़ार

मध्य पूर्व संकट के बाद वित्त वर्ष 27 की शुरुआत में उपभोक्ता मांग स्थिर : रिपोर्ट

27 मई, 2026 04:22 PM

अधिकतर बड़ी खाद्य कंपनियों का कहना है कि वित्त वर्ष 27 की शुरुआत में खाद्य मांग स्थिर बनी हुई है। हालांकि, निकट अवधि में मध्य पूर्व संकट के बाद मांग और मुनाफे पर असर हो सकता है। यह जानकारी बुधवार को जारी एक नई रिपोर्ट में दी गई।

जेएम फाइनेंशियल रिसर्च की रिपोर्ट में बताया गया कि पश्चिम एशिया तनाव के कारण मार्च में इनपुट लागत (कच्चे माल, पैकेजिंग लागत और पाम तेल) की कीमतों में इजाफा हुआ है। साथ ही, इस संकट का असर मुद्रा और सप्लाई चेन पर पड़ा है।

रिपोर्ट में बताया गया कि संकट के चलते अधिक कंपनियों ने कीमतों में 3-7 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, "वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के शुरुआती रुझान मूल्य वृद्धि के बाद स्थिर मात्रा की ओर इशारा करते हैं। हालांकि, मांग पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।"

जनवरी-मार्च तिमाही (वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही) में समग्र उपभोक्ता मांग में भारी स्थिरता देखी गई, जिसका कारण कम महंगाई और जीएसटी दरों में कटौती का लाभ था।

रिपोर्ट में बताया गया है, “खाद्य एवं पेय पदार्थ ने उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन जारी रखा है। अधिकांश कंपनियों में बिक्री वृद्धि में मात्रा-आधारित तेजी देखी गई है, मार्जिन प्रोफाइल मोटे तौर पर स्थिर है, जो कम मूल्य वृद्धि और उत्पादन से समर्थित है। प्रबंधन की टिप्पणियों में स्थिर से बेहतर मांग के रुझानों का संकेत मिलता है।”

रिपोर्ट में बताया गया कि घरेलू खपत भारत की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ बन गई है। देश का बढ़ता मध्यम वर्ग ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य सेवा और आवास जैसे उत्पादों की मांग को बढ़ा रहा है।

कृषि और गैर-कृषि गतिविधियों से मिल रहे सकारात्मक संकेतों के कारण ग्रामीण खपत मजबूत बनी हुई है। राजकोषीय प्रोत्साहन के समर्थन से, शहरी खपत में पिछले त्योहारी सीजन से लगातार वृद्धि देखी गई है। सरकार द्वारा जीएसटी के माध्यम से खपत को बढ़ावा देने के साथ, ऋण में वृद्धि जारी है।

 

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