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राष्ट्रीय

प्रधानमंत्री मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्, श्रेष्ठ आचरण को बताया समाज का दीपक

20 मई, 2026 04:16 PM

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए मानवीय आचरण और कर्तव्यनिष्ठ जीवन के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ आचरण एक दीपक की तरह होता है, जो केवल व्यक्ति को ही नहीं बल्कि पूरे समाज को भी आलोकित करता है। इस आदर्श के माध्यम से देशवासी संयम, सामर्थ्य और कर्तव्य परायणता के साथ राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।

श्रेष्ठ आचरण समाज को देता है प्रकाश
प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्कृष्ट व्यवहार और नैतिक आचरण समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह केवल व्यक्तिगत जीवन को ही नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना को भी दिशा देता है। उनके अनुसार यही मूल्य राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव हैं।

एक्स पर साझा किया संदेश
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा—“श्रेष्ठ आचरण वह दीपक है, जिससे व्यक्ति के साथ-साथ समाज भी आलोकित होता है। इसी आदर्श को अपनाते हुए हमारे देशवासी आज पूरे संयम, सामर्थ्य और कर्तव्यनिष्ठा से राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।”

संस्कृत सुभाषितम् का अर्थ स्पष्ट किया गया
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए सुभाषितम् में कहा गया है—“तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ। ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि॥”

इसका भावार्थ है कि क्या उचित है और क्या अनुचित, इसका निर्धारण व्यक्तिगत राय या क्षणिक भावनाओं से नहीं, बल्कि शास्त्रों द्वारा स्थापित सुव्यवस्थित मानकों के आधार पर होना चाहिए।

शास्त्र आधारित आचरण पर जोर
इस संदेश में यह स्पष्ट किया गया कि व्यक्ति को जीवन में निर्णय लेते समय स्थापित सिद्धांतों और अनुशासित मार्ग का पालन करना चाहिए। ऐसा करने से आचरण संतुलित, स्वीकार्य और समाज के लिए उपयोगी बनता है।

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