भारत 20 से 22 मई 2026 तक नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में एशियाई उत्पादकता संगठन (एपीओ) के शासी निकाय के 68वें सत्र की मेजबानी करेगा। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में एपीओ के 20 सदस्य देशों के 60 से अधिक वरिष्ठ प्रतिनिधि भाग लेंगे।
उद्घाटन सत्र में शामिल होंगे पीयूष गोयल
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 21 मई को आयोजित उद्घाटन सत्र में शामिल होंगे। कार्यक्रम में एपीओ के निदेशक, सलाहकार, सदस्य देशों के राजनयिक मिशनों के प्रतिनिधि और अन्य आमंत्रित अतिथि भी भाग लेंगे। इसके अलावा कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और भूटान की सरकारों के पर्यवेक्षकों के साथ ग्लोबल ग्रीन ग्रोथ इंस्टीट्यूट के प्रतिनिधियों की भी उपस्थिति रहेगी।
एपीओ विजन 2030 और बजट पर होगी चर्चा
बैठक के दौरान एपीओ विजन 2030 फ्रेमवर्क, 2027-28 की द्विवर्षीय अवधि के प्रारंभिक बजट तथा एपीओ महासचिव चुनाव प्रक्रिया सहित कई अहम मुद्दों पर उच्च स्तरीय विचार-विमर्श होगा। कार्यक्रम के प्रमुख एजेंडों में 2026-27 के लिए अध्यक्ष और उपाध्यक्षों का चुनाव, वार्षिक एवं वित्तीय रिपोर्ट को अपनाना, संस्थागत सुधारों पर चर्चा तथा सचिवालय के प्रदर्शन की समीक्षा शामिल है।
उत्पादकता क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान को मिलेगा सम्मान
उद्घाटन सत्र के दौरान एपीओ राष्ट्रीय पुरस्कार कार्यक्रम के तहत उत्पादकता पैरोकारों और तकनीकी विशेषज्ञों को सम्मानित किया जाएगा। इन पुरस्कारों का उद्देश्य सदस्य देशों में उत्पादकता आधारित संस्कृति को बढ़ावा देना और उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं एवं कंपनियों को प्रोत्साहित करना है।
सर्वोच्च निर्णय लेने वाला मंच है शासी निकाय
शासी निकाय एपीओ की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है, जो संगठन की रणनीतिक दिशा, शासन व्यवस्था, कार्यक्रम प्राथमिकताओं और वित्तीय नियोजन पर निर्णय लेती है। यह वार्षिक बैठक सदस्य देशों के बीच सहयोग और नीति समन्वय को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच मानी जाती है।
भारत की सक्रिय भूमिका
अमरदीप सिंह भाटिया ने मई 2025 में आयोजित एपीओ शासी निकाय के 67वें सत्र में इसकी अध्यक्षता ग्रहण की थी। उसी दौरान भारत ने 68वें सत्र की मेजबानी करने की घोषणा की थी।
1961 में हुई थी एपीओ की स्थापना
एशियाई उत्पादकता संगठन की स्थापना 1961 में हुई थी। यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 21 सदस्य देशों का एक अंतर-सरकारी संगठन है, जो पारस्परिक सहयोग, ज्ञान साझा करने और तकनीकी सहयोग के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने तथा सतत सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है।
सहयोग और ज्ञान साझा करने को मिलेगा बढ़ावा
इस आयोजन के दौरान द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों के माध्यम से सदस्य देशों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा। भारत की मेजबानी को क्षेत्रीय स्तर पर उत्पादकता आधारित विकास, नवाचार और सतत विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।