घुटने में दर्द और जकड़न महसूस करना काफी कॉमन हो गया है। केवल 60 की उम्र में पहुंच रहे बुजुर्ग ही नहीं बल्कि 30-40 साल वाले युवा भी घुटनों के दर्द से परेशान है। जिसकी वजह से उनके रोजमर्रा के कामों पर असर पड़ रहा। दरअसल, घुटनों में दर्द होने से ज्यादा समस्या उसका सही ट्रीटमेंट नहीं है। अक्सर लोगों को देखा गया है जब वो घुटने में दर्द महसूस करते हैं तो इन 6 गलतियों को करना शुरू कर देते हैं। जिससे ना केवल दर्द बढ़ता है बल्कि घुटनों का डैमेज भी बढ़ जाता है। ज्यादातर फिजियोथेरेपिस्ट का मानना है कि घुटने में दर्द हो तो इन 6 गलतियों को ना करें खासतौर पर बुजुर्ग लोगों को तो इन गलतियों से जरूर बचना चाहिए।
घुटने में दर्द होने पर आराम करना
घुटने में दर्द की शिकायत होती है तो लोग आराम करना शुरू कर देते हैं जबकि इंडिया भर के फिजियोथेरेपिस्ट का कहना है कि ये आदत सबसे ज्यादा घुटनों को डैमेज करती है। पूरी तरह से आराम करने का मतलब है कि घुटनों के आसपास की मसल्स जिसे क्वाडिराइसेप्स बोले हैं तो कुछ दिनों में कमजोर होने लगती है। और, जब कमजोर क्वाड होगा तो वो जोड़ों पर और ज्यादा लोड बढ़ाएगा, जिससे दर्द कम होने की बजाय और बढ़ेगा। इंडियन जर्नल ऑफ ऑर्थोपेडिक्स के 2019 की स्टडी के मुताबिक 40 की उम्र के ज्यादा वाले एडल्ट लोगों में बैठे रहने की आदत घुटनों के दर्द के बढ़ने का मेन कारण बनता जा रहा है।
तो इसका उपाय क्या है? उपाय आराम करना नहीं बल्कि छोटी वॉक करना है, स्ट्रेट लेग रेज एक्सरसाइज करना, थोड़ी साइकिलिंग। कुल मिलाकर जोड़ों को दर्द में भी सर्कुलेशन चाहिए जिससे वो ठीक हो सकें ना कि उन्हें पूरी तरह आराम चाहिए।
सूजन वाले घुटनों में हीट मसाज
घुटनों में दर्द, सूजन दिख रही, छूने पर गर्माहट महसूस हो रही और काफी सारे लोग गर्म पैड, गर्म पानी की बोतल लेकर सिंकाई करने लगते हैं। गर्माहट की वजह से ब्लड फ्लो उस एरिया में बढ़ जाता है जबकि वहां पर पहले से ही सूजन है। और हीट इस सूजन को और बढ़ा देती है। जब जोड़ों में सूजन हो रही हो तो उसका इलाज बर्फ है, कपड़े में लपेटकर करीब 15-20 मिनट की ठंडी सिंकाई।
जब जोड़ों में टाइटनेस महसूस हो रही हो, घुटने जाम हो गए हों तो गर्म सिंकाई देनी चाहिए। अगर जोड़ों में सूजन तो वहां पर ठंडी सिंकाई जरूरी होती है।
जमीन पर पालथी मारकर देर तक बैठना
भारतीय घरों में जमीन पर बैठकर खाना, पूजा करना और कई बार यूं ही बैठकी करना हो तो जमीन पर लोग बैठ जाते हैं और 20 से 30 मिनट तक जमीन पर पैरों को मोड़कर बैठे रहने से घुटनों पर लोड बढ़ता है। किसी ऐसे इंसान के लिए जिसे जल्दी कार्टिलेज घिसने या ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या हो रही है,ये आदत एक नुकसान है जो चुपचाप धीरे-धीरे होती है। इसलिए एक ही पोजीशन में घुटनों को लॉक करके ना बैठें।
बॉडी वेट और पोश्चर इग्नोर करना
आर्थराइटिस फाउंडेशन की रिसर्च के मुताबिक शरीर का एक किलो ज्यादा वजन चलते समय घुटनों पर 4 किलो का दबाव ज्यादा बनाता है। घुटने के दर्द को कम करने के लिए कई तरह के इलाज करते हैं। लेकिन बढ़े हुए वजन और खराब पोश्चर को सही करने को लेकर कुछ नहीं करते जबकि कई बार घुटनों के दर्द का यहीं इलाज होता है।
स्क्वाट की गलत पोजीशन
गांव और छोटे शहरों में जहां हर घर में इंडियन स्टाइल टॉयलेट हैं और खाना पकाने के लिए जमीन पर बैठना पड़ता और उनके घरों में चारपाई या मोढ़े भी काफी कम उंचाई के होते हैं। इन सब पर बैठते वक्त स्क्वाट्स यानी पैरों की गलत पोजीशन घुटने पर दबाव बढ़ाती है। घुटनों पर दबाव रोकने के लिए इन सारे कामों को बंद करने की जरूरत नहीं होती बस सही तरीके से बैठने की जरूरत होती है।
पेन किलर ज्यादा टाइम तक खाना
किसी भी दर्द का सॉल्यूशन पेन किलर दवाएं नहीं होती हैं और घुटनों में दर्द में लोग पेनकिलर खाते हैं जिससे दर्द का सिग्नल मिलना बंद हो जाता है लेकिन दर्द बढ़ाने वाले कारण सारे वहीं बने रहते हैं, गलत पोश्चर , गलत आदतें, जिससे डैमेज दिन पर दिन बढ़ता जाता है।