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गब्बर का एक्शन मूड: अवैध कॉलोनाइजरों और सुस्त अफसरों पर गिरेगी गाज, अनिल विज ने ACB चीफ को भेजा 'रिमाइंडर'

24 जून, 2026 06:31 PM

चंडीगढ़ : हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने अंबाला जिले में फल-फूल रहे अवैध कॉलोनी नेटवर्क के खिलाफ एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। विज ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के प्रमुख ए.एस. चावला को रिमाइंडर पत्र भेजकर अवैध कॉलोनियां काटने वाले कॉलोनाइजरों, निर्माण कार्य कराने वालों तथा ऐसे निर्माणों को नहीं रोकने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
विज ने स्पष्ट किया कि अवैध कॉलोनियों का निर्माण केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने और आम लोगों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित करने का भी बड़ा कारण बन रहा है।

पहले भी उठाया था मुद्दा, अब मांगी जवाबदेही
अनिल विज इससे पहले भी अंबाला में अवैध कॉलोनियों के बढ़ते जाल को लेकर एसीबी को शिकायत भेज चुके हैं। अब रिमाइंडर पत्र के माध्यम से उन्होंने मामले में कार्रवाई की प्रगति जानने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया है। विज का कहना है कि यदि अवैध निर्माण लंबे समय तक जारी रहे हैं तो यह केवल कॉलोनाइजरों की नहीं, बल्कि संबंधित विभागों की लापरवाही का भी संकेत है।

अवैध रजिस्ट्रियों पर भी उठाए सवाल
मंत्री ने इस बात पर भी गंभीर चिंता जताई है कि कई अवैध कॉलोनियों में प्लॉटों की रजिस्ट्रियां होने की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि बिना वैधानिक स्वीकृति के विकसित कॉलोनियों में रजिस्ट्रियां हो रही हैं तो इसकी भी विस्तृत जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान
विज ने कहा कि अवैध कॉलोनियों के कारण सरकार को विकास शुल्क, लाइसेंस फीस और अन्य राजस्व मदों में भारी नुकसान उठाना पड़ता है। नियोजित विकास की प्रक्रिया को दरकिनार कर बनाई जा रही कॉलोनियां न केवल कानून का उल्लंघन करती हैं, बल्कि शहरी विकास की योजनाओं को भी प्रभावित करती हैं।

आम नागरिक भुगतते हैं सबसे बड़ी कीमत
उन्होंने कहा कि अवैध कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने वाले लोग बाद में सबसे अधिक परेशान होते हैं। ऐसी कॉलोनियों में अक्सर पक्की सड़कें, स्वच्छ पेयजल, सीवरेज, ड्रेनेज और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं। कई स्थानों पर कॉलोनाइजर नियमानुसार सड़कें विकसित करने के बजाय संकरी गलियां छोड़ देते हैं, जिससे भविष्य में यातायात और नागरिक सुविधाओं की गंभीर समस्याएं खड़ी हो जाती हैं।

पार्क और सार्वजनिक सुविधाओं का भी अभाव
विज ने कहा कि अधिकांश अवैध कॉलोनियों में पार्क, खेल मैदान, सामुदायिक केंद्र और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए कोई व्यवस्था नहीं होती। इसका सीधा असर वहां रहने वाले परिवारों की जीवन गुणवत्ता पर पड़ता है।

अवैध कॉलोनियों के खिलाफ सख्त कानून: नियम तोड़े तो बुलडोजर, जुर्माना और जेल तक का प्रावधान
हरियाणा सहित देश के विभिन्न राज्यों में अवैध कॉलोनियों और अनधिकृत निर्माणों पर रोक लगाने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान बनाए गए हैं। शहरी विकास को व्यवस्थित रखने और लोगों को धोखाधड़ी से बचाने के उद्देश्य से टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग, नगर निकायों और अन्य नियामक संस्थाओं को व्यापक अधिकार दिए गए हैं।

क्या होती है अवैध कॉलोनी?
बिना लाइसेंस या स्वीकृति के विकसित की गई कॉलोनियों को अवैध अथवा अनधिकृत कॉलोनी माना जाता है। इसमें टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की अनुमति के बिना की गई प्लॉटिंग, रेरा पंजीकरण के बिना संपत्तियों की बिक्री तथा कृषि भूमि का बिना चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) अनुमति के आवासीय या व्यावसायिक उपयोग शामिल है।

बुलडोजर से ध्वस्तीकरण तक का अधिकार
कानूनी प्रावधानों के तहत जिला नगर योजनाकार और स्थानीय प्रशासन को अवैध निर्माणों, अनधिकृत सड़कों और प्लॉटिंग को बिना किसी वित्तीय मुआवजे के हटाने का अधिकार प्राप्त है। आवश्यकता पड़ने पर ऐसे निर्माणों को सील भी किया जा सकता है।

अवैध रजिस्ट्रियों और खरीद-फरोख्त पर रोक
सरकार द्वारा अवैध घोषित क्षेत्रों में भूमि की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्रियों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में भारी आर्थिक दंड तथा अन्य कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है।

कॉलोनाइजरों पर एफआईआर और जेल
भू-माफियाओं, अवैध कॉलोनाइजरों और धोखाधड़ी कर प्लॉट बेचने वालों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जा सकते हैं। गंभीर मामलों में जेल और भारी जुर्माने का भी प्रावधान है। विभिन्न राज्यों में इन प्रावधानों को और अधिक कठोर बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।

खरीदारों को भी होता है बड़ा नुकसान
विशेषज्ञों के अनुसार अवैध कॉलोनियों में निवेश करने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है। ऐसी कॉलोनियों में सरकार की ओर से बिजली, पानी, सीवरेज, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं। यदि भविष्य में किसी कॉलोनी का नियमितीकरण होता भी है तो निवासियों को भारी विकास शुल्क जमा करवाना पड़ता है।

बैंक भी नहीं देते ऋण
अनधिकृत कॉलोनियों में स्थित संपत्तियों के नक्शे और दस्तावेज वैध न होने के कारण अधिकांश राष्ट्रीयकृत बैंक और वित्तीय संस्थान ऐसे प्लॉटों या मकानों पर होम लोन देने से बचते हैं। इससे संपत्ति का मूल्य और उसकी बिक्री क्षमता भी प्रभावित होती है।

कानून से ऊपर कोई नहीं: विज का स्पष्ट संदेश
अनिल विज के ताजा हस्तक्षेप ने यह संकेत दिया है कि अंबाला में अवैध कॉलोनियों के मामले में अब केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों और कॉलोनाइजरों की जवाबदेही तय करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए जाएंगे। विज का स्पष्ट संदेश है कि अवैध निर्माण, भ्रष्टाचार और राजस्व चोरी के मामलों में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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