गुड़गांव : गुड़गांव को स्वच्छ और सुंदर बनाने के भले ही नगर निगम अधिकारी प्रयास कर रहे हों, लेकिन निगम के प्रयासों पर अवैध कूड़ा कलेक्शन करने वाले पानी फेर रहे हैं। घरों से कूड़ा उठाने के नाम पर अवैध उगाही करने के साथ ही कूड़े को खुले मैदान में या सड़क किनारे डिस्पोज ऑफ किया जा रहा है। यही कारण है कि जगह-जगह कूड़े के ढेर दिखाई दे रहे हैं और नगर निगम को मजबूरन ट्रैक्टर ट्रॉली खड़ी करनी पड़ रही है। हैरत की बात यह है कि घरों से कूड़ा उठाने के लिए नगर निगम ने किसी निजी व्यक्ति को न तो टेंडर दिया है और न ही कोई अनुमति। यहां तक कि किसी को निजी व्यक्ति अथवा किसी जन प्रतिनिधि और उनके किसी नुमाइंदे को भी नगर निगम के डंपिंग स्टेशन में कूड़ा फेंकने की अनुमति नहीं दी है। इसका खुलासा स्वयं नगर निगम ने अपनी एक आरटीआई के जवाब में किया है।
आपको बता दें कि नगर निगम की तरफ से डोर-टू-डोर वेस्ट कलेक्शन के लिए टेंडर जारी किया है। ठेकेदारों द्वारा अपनी गाड़ियां लगाई गई हैं जो लोगों के घरों से कूड़ा लेजाकर निर्धारित डंपिंग स्टेशन पर डालती हैं। यहां कूड़े का सेग्रीगेशन किए जाने के साथ ही इसका निस्तारण भी किया जाता है। इन ठेकेदार के वाहनों के अलावा किसी भी निजी एजेंसी अथवा व्यक्ति या किसी जन प्रतिनिधि को कूड़ा एकत्र करने के लिए अपने स्तर पर वाहन लगाने अथवा कूड़े को डंपिंग स्टेशन पर डालने के लिए अनुमति नहीं दी गई। नगर निगम के अधिकारियों द्वारा एक आरटीआई का जवाब देते हुए कहा गया है कि किसी भी जन प्रतिनिधि या उसके नुमाइंदे अथवा किसी निजी व्यक्ति को कूड़ा उठाने और इसके नाम पर रुपए वसूलने का अधिकार नहीं दिया गया है। इतना ही कोई भी निजी वाहन अथवा निजी एजेंसी को डंपिंग स्टेशन में कूड़ा अपने स्तर पर डालने की अनुमति तक नहीं है। यह अधिकार केवल नगर निगम द्वारा अधिकृत किए गए ठेकेदारों को ही दिया गया है। ऐसे में कुछ जन प्रतिनिधियों द्वारा अपने वार्ड में मनमानी कर पार्षद अथवा पार्षद पति द्वारा ठेका देने का दावा करते हुए लोगों से न केवल वसूली की जा रही है बल्कि उनके घरों से कूड़ा एकत्र कर उसे खुले स्थान पर डंप किया जा रहा है।
आपको यह भी बता दें कि पिछले दिनों वार्ड-33 में अवैध रूप से चल रही कूड़े की गाड़ियों को लोगों ने पकड़ा था जोकि कूड़ा उठाने के नाम पर लोगों से उगाही कर रहा था। इसकी शिकायत जब नगर निगम अधिकारियों को दी गई तो कूड़े की गाड़ियां चलाने वालों का कहना था कि उन्हें कूड़ा उठाने का ठेका स्थानीय पार्षद और उसके पति ने दिया है। ऐसे में नगर निगम अधिकारियों ने उसकी लगाम कसी तो कुछ अवैध गाड़ियां बंद कर दी गई, लेकिन वर्तमान में भी अधिकारियों की नाक के नीचे यह अवैध गाड़ियां चलाई जा रही हैं और वर्तमान में जिन ठेकेदारों को कूड़ा उठाने का टेंडर नगर निगम ने जारी किया है उनके कार्य में बाधा उत्पन्न की जा रही है।
वहीं, वार्ड-33 के लोगों ने बताया कि लोगों के घरों से कूड़ा उठाने के बाद उसे धनवापुर रोड पर ही डंप किया जा रहा है। जिस स्थान पर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं वहां असल में लोग बहुत ही कम कूड़ा डालते हैं जबकि अवैध रूप से चल रही कूड़े की गाड़ियां ही यहां पर खाली होती हैं। हैरत की बात यह है कि अधिकारियों ने आज तक यह जानने का प्रयास ही नहीं किया कि आखिर जब यह अवैध रूप से चल रही गाड़ियां घरों से कूड़ा उठाती हैं तो यह आखिर कूड़ा कहां फेंक रही हैं। अधिकारियों ने केवल आरटीआई में नगर निगम द्वारा किसी भी निजी व्यक्ति अथवा किसी पार्षद या उसके नुमाइंदों को कोई अधिकार न देने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। ऐसे में जब अधिकारी ही इसको शह देेंगे तो स्वच्छता के नाम पर जगह-जगह कूड़े के ढेर ही लगेंगे।