नई दिल्ली : इजरायल के 2026 के आम चुनाव में किसी भी राजनीतिक गठबंधन को संसद में बहुमत नहीं मिला है। केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) ने शुक्रवार सुबह अंतिम नतीजे जारी किए। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले लिकुड गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि गादी आइजेनकोट की याशर पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें हासिल हुई हैं। शेष 19 सीटें अरब दलों के खाते में गई हैं।
द टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, इस नतीजे से नेतन्याहू के गठबंधन की ताकत में बड़ी गिरावट आई है। निवर्तमान संसद में उनके गठबंधन के घटक दलों के पास कुल 68 सीटें थीं।
आधिकारिक चुनाव परिणाम 4 नवंबर को इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को सौंपे जाने हैं। इससे पहले केंद्रीय चुनाव समिति कथित त्रुटियों और शिकायतों की अंतिम जांच पूरी करेगी।
इसके बाद राष्ट्रपति हर्जोग सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ विचार-विमर्श करेंगे। इस दौरान प्रत्येक दल का नेता अगले प्रधानमंत्री के लिए अपने पसंदीदा उम्मीदवार का नाम सुझाएगा।
सरकार गठन को लेकर अनिश्चितता के बावजूद नई संसद यानी 26वीं नेसेट का शपथ ग्रहण 10 नवंबर को निर्धारित है।
रिपोर्टों के मुताबिक, नई सरकार का गठन चुनौतीपूर्ण हो सकता है और इसमें दो महीने से अधिक समय लग सकता है। किसी भी राजनीतिक खेमे के पास बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों के करीब भी संख्या नहीं है।
चुनाव में कुल पात्र मतदाताओं में से 77.9 प्रतिशत ने मतदान किया। यह कई दशकों में सबसे अधिक मतदान प्रतिशत बताया गया है।
बुधवार को राष्ट्रपति हर्जोग ने राजनीतिक नेताओं से एक और चुनाव की नौबत रोकने के लिए हरसंभव प्रयास करने की अपील की थी। उन्होंने सरकार गठन की बातचीत में शामिल नेताओं से खुले मन से विचार-विमर्श करने को कहा।
नेतन्याहू और आइजेनकोट दोनों ने दावा किया है कि अगली सरकार का गठन वही करेंगे।
इस सप्ताह की शुरुआत में यरुशलम स्थित लिकुड चुनाव मुख्यालय में समर्थकों को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने कहा था कि इजरायल के ‘जायोनी समुदाय’ में दक्षिणपंथी खेमे को स्पष्ट बहुमत हासिल है। उन्होंने मजबूत दक्षिणपंथी सरकार बनाने की अपील की थी।
उन्होंने अरब दलों के साथ सहयोग करने को तैयार राजनीतिक पार्टियों की आलोचना करते हुए ऐसे गठबंधन को ‘शर्मनाक’ बताया था।
मंगलवार को हुए ये चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद देश में पहला चुनावी मुकाबला था। वर्ष 2022 के चुनावों के बाद से इजरायल के राजनीतिक परिदृश्य और मतदाताओं की प्राथमिकताओं से जुड़े मुद्दों में बड़े बदलाव आए हैं।