लुधियाना : महानगर में राजनीति की आड़ में प्रॉपर्टी के नाम पर भोले-भाले और अनपढ़ प्रवासी मजदूरों को अपना शिकार बनाने वाले एक बड़े सियासी चेहरे का सनसनीखेज कारनामा बेनकाब हुआ है। यहाँ मुंडियां कलां के मौजूदा कांग्रेस पार्षद गुरमीत सिंह के खिलाफ एक गरीब मजदूर के साथ लाखों रुपये की धोखाधड़ी और प्लॉट की फर्जी डीलिंग करने के आरोप में संगीन धाराओं के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है।
पीड़ित को ही झूठे केस में फंसाने की दी धमकी
आरोप है कि शातिर पार्षद ने जिस प्लॉट का सौदा पीड़ित से किया, उसका वह खुद कभी मालिक था ही नहीं। जब पीड़ित को ठगी का पता चला और उसने अपनी गाढ़ी कमाई वापस मांगी, तो सत्ता के नशे में चूर पार्षद ने पुलिस के बड़े अफसरों से अपनी नजदीकियों का रौब दिखाते हुए पीड़ित को ही झूठे केस में फंसाने और गंभीर नतीजे भुगतने की खौफनाक धमकी दे डाली। एडीसीपी (ADCP Zone-4) की उच्च स्तरीय जांच के बाद पुलिस कमिश्नर के आदेश पर यह बड़ी कार्रवाई की गई है। जानकारी के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई पीड़ित मोती लाल की लिखित शिकायत पर की गई है। मोती लाल ने बताया कि वह अपने परिवार के सिर पर छत देने के लिए एक प्लॉट की तलाश में था। इस दौरान उसका संपर्क अपने चाचा किशन पाल के माध्यम से मौजूदा कांग्रेस पार्षद गुरमीत सिंह के साथ हुआ, क्योंकि उसके चाचा ने भी पूर्व में गुरमीत के ताजपुर रोड स्थित मुख्य दफ्तर के जरिए एक प्लॉट खरीदा था।
रजिस्ट्री को लेकर करने लगा टाल-मटोल
आरोपी पार्षद गुरमीत सिंह ने पीड़ित को ताजपुर रोड पर अपनी एक कथित कॉलोनी दिखाई और वहां 70 वर्ग गज का प्लॉट नंबर 224 उसे पसंद आ गया। 5 फरवरी 2023 को दोनों पक्षों के बीच 6400 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से कुल 4,48,000 रुपये में सौदा पक्का हो गया। सौदा तय होने के बाद पीड़ित मोती लाल ने गवाहों के सामने पार्षद गुरमीत सिंह को 1,00,000/- (एक लाख) रुपये नगद बतौर बयाना (एडवांस) दे दिए। बाकी की रकम को 30 आसान मासिक किश्तों में चुकाया जाना था और आधिकारिक रजिस्ट्री के लिए 5 अगस्त 2025 की तारीख मुकर्रर की गई थी। पीड़ित मोती लाल ने पेट काट-काटकर अलग-अलग तारीखों पर आरोपी पार्षद को कुल 2,27,600 रुपये का भुगतान कर दिया। साल 2024 में जब उसने बकाया 2,20,400 रुपये की अंतिम रकम का इंतजाम कर लिया और गुरमीत सिंह से रजिस्ट्री करने को कहा, तो आरोपी आज-कल कहकर टालमटोल करने लगा और बहाने बनाने लगा।
17 अप्रैल 2020 को रद्द हो चुका था सौदा
जब काफी समय बीत जाने के बाद भी पार्षद ने रजिस्ट्री नहीं की, तो पीड़ित मोती लाल को शक हुआ। उसने अपने स्तर पर माल महकमे (राजस्व विभाग) और जमीन के रिकॉर्ड की खुफिया जांच करवाई, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। जांच में सच सामने आया कि जिस जमीन को अपनी कॉलोनी बताकर पार्षद गुरमीत सिंह बेच रहा था, उसका असली मालिक वह है ही नहीं! उस जमीन के वास्तविक मालिक इंदरजीत सिंह और उनकी पत्नी सुखजिंदर कौर हैं। असल में गुरमीत सिंह का असली मालिकों के साथ पुराना सौदा हुआ था, लेकिन शर्तें पूरी न करने और पैसे न देने के कारण 17 अप्रैल 2020 को ही वह सौदा रद्द हो चुका था। इसके बावजूद शातिर पार्षद ने खुद को भू-स्वामी दर्शाकर एक अनपढ़ प्रवासी मजदूर के साथ यह धोखाधड़ी की। सच्चाई सामने आने के बाद जब उस ने पार्षद के दफ्तर जाकर अपनी रकम वापस मांगी, तो आरोपी पार्षद आगबबूला हो गया। उसने पीड़ित के साथ जमकर गाली-गलौज की और अपनी ऊंची राजनीतिक पहुँच का हवाला दिया।
आरोपी पार्षद के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज
आरोपी ने पीड़ित को सरेआम हड़काते हुए कहा कि उसका शहर के बड़े-बड़े पुलिस अफसरों के साथ उठना-बैठना है, अगर उसने पुलिस में शिकायत करने की जुर्रत की, तो उसे झूठे मामले में जेल की सलाखों के पीछे सड़वा दिया जाएगा। लुधियाना के ADCP (जोन-4) जशनदीप सिंह गिल द्वारा इस पूरे प्रकरण की गहनता से विभागीय जांच की गई। जांच रिपोर्ट में साफ हो गया कि आरोपी पार्षद गुरमीत सिंह को भली-भांति पता था कि उसके पास उक्त प्लॉट की रजिस्ट्री कराने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, इसके बावजूद उसने साज़िश के तहत एक गरीब के ₹2,27,600 हड़प लिए। एडीसीपी की जांच के बाद थाना जमालपुर में को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 420 (धोखाधड़ी) और रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 की धारा 82 के तहत FIR No. 0169 दर्ज कर ली गई है।