शिमला : हिमाचल में लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) का प्रकोप दोबारा बढ़ने के बीच सरकार ने इसे महामारी घोषित करने की दिशा में तैयारियां शुरू कर दी हैं। सरकार ने पशुपालन विभाग से लंपी रोग से संक्रमित पशुओं का जिलावार आंकड़ा मांगा है। बताया जा रहा है कि यदि बीमारी का प्रकोप 20 से 25 फीसदी तक पहुंचता है तो इसे महामारी घोषित करने पर विचार किया जा सकता है। जानकारी के अनुसार अब तक करीब 2,500 पशु संक्रमित हो चुके हैं, जबकि करीब 100 पशुओं की मौत की पुष्टि हुई है। सोलन, हमीरपुर, बिलासपुर और ऊना समेत कई जिलों में संक्रमण के नए मामले सामने आने की सूचना है। लंपी वायरस के कारण पिछले वर्ष भी प्रदेश में बड़ी संख्या में पशु प्रभावित हुए थे। बीमारी के कारण पशुपालकों को पशुधन के नुक्सान के साथ आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा था।
उस समय राज्य में बीमारी को महामारी घोषित नहीं किए जाने के कारण केंद्र से मिलने वाली संभावित राहत को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी थी। पशुपालकों का कहना था कि बीमारी से हुए नुक्सान की भरपाई के लिए उन्हें पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिल पाई। लंपी स्किन डिजीज मुख्य रूप से पशुओं में होने वाला संक्रामक रोग है। इसके बढ़ते मामलों ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। बीमारी के कारण पशुओं के स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन पर भी असर पड़ता है।
केंद्र ने सहयोग के लिए महामारी घोषित करने की शर्त का दिया था हवाला
पिछले वर्ष लंपी के मामले सामने आने के बाद प्रदेश के कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने केंद्र सरकार से सहयोग की मांग की थी। उस दौरान केंद्र की ओर से यह कहा गया था कि यदि राज्य सरकार बीमारी को महामारी घोषित करती है तो केंद्र की ओर से राहत उपलब्ध कराने का प्रावधान हो सकता है। केंद्र ने उन राज्यों को राहत राशि उपलब्ध कराई थी, जहां लंपी को महामारी घोषित किया गया था। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार राज्य सरकार बीमारी के बढ़ते प्रकोप को लेकर पहले से तैयारी करती नजर आ रही है।
स्थिति के आधार पर लिया जाएगा फैसला: प्रो. चंद्र
कृषि एवं पषुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि प्रदेश में लंपी स्किन डिजीज के बढ़ते मामलों को सरकार गंभीरता से ले रही है। बीमारी के वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा रहा है। सरकार पशु पालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए हर जरूरी कदम उठाएगी तथा स्थिति के आधार पर फैसला लिया जाएगा।