शिमला : मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार अखिल भारतीय श्रेणी के अधिकारियों की फौज को कम करके 200 करोड़ रुपए बचाएगी। इसके लिए उनकी तरफ से प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले अधिकारियों को फाइल को तुरंत अप्रूवल दी जा रही है। पहले इस तरह की फाइलों को रोका जाता था। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू शिमला में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने आईएएस पदों की संख्या 153 से घटाकर 130, आईएफएस संख्या 118 से 83 कर रही है तथा आईपीएस को 96 पदों तक रखा जा रहा है। वह आईएएस अधिकारी संख्या 130 से घटाकर 100 से 110 करने के पक्षधर हैं, लेकिन अधिकारियों को इस पर आपत्ति है।
उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे अधिकारी चाहिए जो सरकारी योजनाओं को तुरंत अमलीजामा पहनाएं। उन्होंने कहा कि सरकार 5 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से बस पास बनाएगी। इसके अलावा महिलाओं का 50 फीसदी किराया लगेगा। उन्होंने कहा कि एचआरटीसी में अफसरों की फौज कम होगी। एचआरटीसी में रीजन के हिसाब से आरएम पदों को भरा गया है, लेकिन अब बसों के हिसाब से नियुक्ति होगी। इस दिशा में सचिव व एमडी को कार्य करने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बसों का फ्लीट कम नहीं रहेगा।
नई इलैक्ट्रिक बसों से मैंटीनैस का खर्चा भी बचेगा। उन्होंने कहा कि सरकार इन बसों की खरीद पर सबसिडी देने के अलावा 50 हजार रुपए महीना और आय-व्यय के अंतर की भरपाई सरकार खुद करेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एचआरटीसी खुद पैरों पर खड़ी होगी और सरकार की जेब भी भरेगी। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सत्ता में रहते हुए हिमाचल प्रदेश पर 10,000 करोड़ रुपए की देनदारियां छोड़कर गए हैं। राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के मुद्दे पर भी वह चुप्पी साधे रहे।
सालाना 8,000 से 10,000 करोड़ रुपए की आरडीजी रुकने के बावजूद किसी का वेतन और पैंशन को नहीं रुकने दिया। यह आत्मनिर्भर हिमाचल प्रदेश की निशानी है। लोकतंत्र में विरोध करना सबका अधिकार है और छात्र जीवन में उन्होंने भी ऐसा किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने चतुर्थ श्रेणी का पे-एरियर देना शुरू कर दिया है। इसी तरह तृतीय श्रेणी को 35 फीसदी एरियर देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि प्रथम और द्वितीय श्रेणी को वैसे इतनी आवश्यकता नहीं होती, लेकिन सरकार फिर भी उनको 15 फीसदी बकाया भुगतान कर रही है।