नई दिल्ली(एजेंसी) : भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को पॉलिसी रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया। बढ़ती महंगाई के जोखिम, ऊंची वैश्विक यील्ड और घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूती के बीच RBI ने मौद्रिक नीति को सख्त करने का फैसला किया है।
मौद्रिक नीति समिति यानी MPC ने सर्वसम्मति से रेपो रेट बढ़ाने का फैसला किया। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौजूदा व्यापक आर्थिक और वित्तीय परिस्थितियों, घटनाक्रम और भविष्य के परिदृश्य के विस्तृत आकलन के बाद यह फैसला लिया गया है।
इस बढ़ोतरी के बाद स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी यानी SDF रेट 5.25 प्रतिशत हो गया है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी यानी MSF रेट और बैंक रेट 5.75 प्रतिशत पर पहुंच गए हैं। MPC का रुख बहुमत से calibrated tightening किया गया है।
यह फैसला बढ़ते price pressures के बीच आया है। अगस्त में भारत की CPI महंगाई 4.82 प्रतिशत रही थी। अर्थशास्त्रियों और रिसर्च रिपोर्ट्स ने वित्त वर्ष 2026-27 में महंगाई के 5 प्रतिशत से ऊपर जाने का अनुमान जताया है। तीसरी तिमाही में महंगाई करीब 5.9 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।
वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां भी कम अनुकूल हुई हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने सितंबर में अपनी पॉलिसी रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की थी, जबकि अमेरिका की 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड करीब 5.3 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।
लिक्विडिटी भी RBI के लिए एक प्रमुख चिंता रही। RBI की स्पेशल फॉरेक्स स्वैप फैसिलिटी के तहत 31 अगस्त तक FCNR(B) डिपॉजिट के जरिए 132.98 अरब डॉलर जुटाए गए, जिससे बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी आई और इसे calibrated तरीके से absorb करने की जरूरत बढ़ी।
वहीं, घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स ने भी घरेलू मांग, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज में मजबूती जारी रहने के संकेत दिए हैं।
ताजा फैसले से आने वाले महीनों में मौद्रिक नीति की दिशा तय होने की उम्मीद है। अर्थशास्त्रियों ने पहले वित्त वर्ष 2026-27 में कुल 75 बेसिस पॉइंट तक की सख्ती और वित्त वर्ष के अंत तक रेपो रेट के करीब 6 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना जताई थी। हालांकि, यह महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।